जल्द खुलने वाला है नौकरियों का पिटारा, लेकिन केवल ये ही होंगे हकदार

जल्द की नौकरियों का पिटारा खुलने वाला है। नगर निकायों के सीमा विस्तार, दून स्मार्ट सिटी और स्वास्थ्य महकमे में बंपर नौकरियां निकलने वाली हैं।

सीमा विस्तार वाले 41 नगर निकायों में ढाई हजार कार्मिकों की जल्द भर्ती की जाएगी। सरकार ने इसके लिए सभी संबंधित निकायों से प्रस्ताव देने को कहा है। सोमवार को शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने इस संबंध में अफसरों के साथ बैठक भी की। त्रिवेंद्र सरकार ने निकाय चुनाव से पहले बडे़ पैमाने पर सीमा विस्तार किया है। 41 नगर निकायों में सीमा विस्तार की कार्रवाई की गई है। हालांकि, इनमें से रुड़की और बाजपुर के मामले में हाईकोर्ट का स्टे आ गया है। शुरू में सरकार ने लालकुआं में भी सीमा विस्तार का निर्णय लिया था, लेकिन इस निकाय के आसपास वन भूमि की उपलब्धता को देखते हुए संबंधित प्रस्ताव को रोक दिया गया था। सीमा विस्तार की प्रक्रिया के पूरा हो जाने के बाद अब सरकार ने वहां पर कर्मचारियों की कमी की ओर ध्यान दिया है।

विधानसभा में शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने सोमवार को अफसरों के साथ बैठक की। कौशिक के अनुसार संबंधित निकायों के नगर आयुक्तों और अधिशासी अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अगले दस दिन में कर्मियों की जरूरत का प्रस्ताव दें। बैठक में शामिल रहे शहरी विकास सचिव नितेश कुमार झा ने कहा कि बजट से पहले यह कसरत जरूरी है। जरूरत के हिसाब से बजट आवंटन के लिए वित्त विभाग को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
‘सीमा विस्तार वाले नगर निकायों में क्लर्क, एकाउंटेंट, पर्यावरण मित्र समेत कई श्रेणी के पदों जल्द भर्ती की जानी है। मोटे-मोटे तौर पर ऐसे पदों की संख्या करीब ढाई हजार निकल रही है। जल्द से जल्द प्रस्ताव संबंधी औपचारिकताओं को पूरा कराया जाएगा। कोशिश ये ही है कि नगर निकाय चुनाव के आस-पास इन पदों को भर दिया जाए।’

स्मार्ट सिटी की स्थापना की प्रक्रिया भी तेज हुई है। इस क्रम में शहरी विकास विभाग ने देहरादून ‘स्मार्ट सिटी लिमिटेड’ कंपनी के लिए 32 अस्थायी पदों के गठन की अनुमति प्रदान की है। इसमें दो पद आईएएस और सीनियर पीसीएस के लिए और एक पद राज्य वित्त सेवा के लिए रखा गया है। इसके अतिरिक्त जीएम और एजीएम सरीखे पदों को प्रतिनियुक्ति या फिर अनुबंध आधारित रखा गया है। राजधानी को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिलने के बाद अब इसकी स्थापना की तैयारियों में तेजी आई है। इस क्रम में अब इस कार्य के लिए बनाई गई कंपनी में 32 अधिकारियों और कर्मचारियों के पद सृजित किए गए हैं।

इसके तहत सीईओ का पद आईएएस के लिए जबकि एडिशनल सीईओ के पद पर आईएएस या फिर वरिष्ठ पीसीएस अफसर को रखा जाएगा। फाइनेंस कंट्रोलर का पद राज्य वित्त सेवा के अधिकारी के लिए अधिकृत किया गया है। इसके अलावा जीएम टेक्निकल, जीएम आईटी, जीएम प्लान एंड डिजाइन, कंपनी सेकेट्री, पब्लिक रिलेशन ऑफिसर, एजीएम सिविल के पद को प्रतिनियुक्ति या फिर अनुबंध के आधार पर भरा जाएगा। इसी क्रम में एजीएम वॉटर वर्क्स, एजीएम इलेक्ट्रिकल के पदों को प्रतिनियुक्ति और अनुबंध के अलावा अतिरिक्त प्रभार के रूप में देने का विकल्प भी रखा गया है। यह भी प्रावधान किया गया है कि श्रेणी-ग और श्रेणी-घ के किसी भी पद पर दैनिक, तदर्थ, संविदा और नियत वेतन पर नियुक्ति नहीं होगी। ये पद आउटसोर्स के माध्यम से भरे जाएंगे।

वहीं अब प्रदेश में नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के तहत डॉक्टरों की भर्ती टेंडर के जरिए होगी। डॉक्टर खुद बताएंगे कि उन्हें कितना वेतन चाहिए। इसी के आधार पर शासन डॉक्टरों का चयन कर उन्हें तैनाती देगा। प्रदेश में फिजिशियन, हृदय रोग विशेषज्ञ, सर्जन, महिला रोग विशेषज्ञों की बहुत कमी है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया बदलने का फैसला किया है। अब नेशनल हेल्थ मिशन के तहत डॉक्टरों को टेंडर के जरिए भर्ती करने की योजना बनाई गई है। इसमें डॉक्टर खुद अपनी विशेषज्ञता, अनुभव के आधार पर टेंडर प्रक्रिया के जरिए बताएंगे कि उनको सेवा देने के बदले कितना वेतन चाहिए। इसके बाद शासन सभी डॉक्टरों के कोट किए वेतन का मूल्यांकन और चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद तैनाती देगा।

अभी देहरादून और उत्तरकाशी में तैनात डॉक्टर का करीब एक सामान वेतन होता है, जिसे शासन तय करता है। अब टेंडर प्रक्रिया के तहत जगह के हिसाब से भी वेतन मांगने का अधिकार डॉक्टरों को मिल जाएगा। यूपी जैसे अन्य राज्यों में टेंडर के जरिए डॉक्टरों की भर्ती का प्रयोग हो चुका है, उसी तर्ज पर प्रदेश में इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि टेंडर प्रक्रिया से विशेषज्ञ डॉक्टरों के विकल्प बड़ी संख्या में मिल सकेंगे। उत्तराखंड में विशेषज्ञ डॉक्टरों की बेहद कमी है। मौजूदा समय में 1241 सर्जन, फिजिशियन, कार्डियोलॉजिस्ट के पद हैं। इनमें केवल 405 पदों पर ही डॉक्टर काम कर रहे हैं, जबकि 836 पद रिक्त हैं। जो पद भरे गए हैं, उनमें भी कई डॉक्टर प्रशासनिक कामों में लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग में सामान्य और विशेषज्ञ डॉक्टरों के कुल 2715 पद है जिनमें 1086 पदों पर ही डॉक्टर कार्यरत हैं।

विशेषज्ञों डॉक्टरों की स्थिति
पद नाम .              स्वीकृत पद      कार्यरत        रिक्त
रेडियोलॉजिस्ट           135             37            98
स्त्री रोग विशेषज्ञ        167             57           110
सर्जन                       126            42            64
कर्डियोलॉजिस्ट          42              05            37
फिजिशियन              127            28            99
आर्थो सर्जन               99             42             57
बाल रोग विशेषज्ञ      133            57             76
त्वचा रोग विशेषज्ञ      35             05             30
पैथोलॉजिस्ट             116           30             86
नेत्र रोग                    75             39              36
एनेस्थेटिस्ट               139           74             92
‘टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से डॉक्टरों को खुद अपने अनुभव, विशेषज्ञता और जगह के आधार पर वेतन कोड करने का अधिकार होगा। इसके बाद मूल्यांकन व चयन प्रक्रिया पूरी कर डॉक्टरों को भर्ती किया जाएगा।’
-नितेश झा, सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा

 

 

 

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