आप कितने ‘स्वार्थी हो’ नरेंद्र सिंह नेगी जी!

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उत्तराखंड के मशहूर लोक गायक वैसे तो अपने गानों को लेकर अक्सर चर्चा में बने रहते हैं लेकिन इस बार वह अपने गीतों नहीं अपने इस बयान से लोगों की आलोचना का शिकार हो रहे हैं
दरअसल राज्य के प्रदेश के साथ पहाड़ी क्षेत्र में शराब की फैक्ट्री के खोलने के ऐलान के बाद राजभर में सरकार के इस फैसले का जमकर विरोध हो रहा है सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक हर कोई आंदोलित है लेकिन इसके बावजूद सरकार टस से मस नहीं हो रही है वह अपने फैसले पर अडिग है इससे लोगों में में राज्य सरकार के खिलाफ गुस्सा भर गया है और इसी गुस्से को बढ़ाने का काम नरेंद्र सिंह नेगी द्वारा सरकार का समर्थन करने से हुआ।
नरेंद्र सिंह नेगी प्रदेश की एक मशहूर हस्ती है  उन्होंने समाज की कुर्तियों के खिलाफ अपने गीतों के द्वारा राजनेताओं की जमकर आलोचना की और उनके इस अंदाज के आज भी प्रादेशवासी क़ायल है जिससे वह आने वाली पीढ़ी को भी प्रेरित करते है
शराब का समर्थन करने से पहले नरेंद्र सिंह नेगी को अपने पुराने गाने  याद करने चाहिए । जिसमें  उन्होंने शराब परोसने का जिम्मेदार खुलकर राजनेताओं को ही माना था। साल 2010 में आई एल्बम “मायको मुंडरो” में राजनेताओं कि चुनाव के समय शराब के इस्तेमाल की खूब आलोचना की थी । तो उसके 6 साल बाद जब हरीश रावत सरकार पर शराब को लेकर कई तरह के आरोप लगे उस समय उनका  गीत “दारु बिना यख मुक्ति नि, बिना दारू की कुई ज़ुक्ति नही” काफी प्रचलित हुआ था। अपने इन  गानों के जरिए नरेंद्र सिंह नेगी ने समाज पर पड़ रहे शराब के बुरे असर की जमकर  कटाक्ष की थी। उनके गानों का प्रभाव कई हद तक समाज में पड़ता है और लोग उससे प्रेरणा लेकर अपने आप को बदलने की कोशिश करते हैं।
लेकिन उनके द्वारा हाल ही में सरकार के केदार की नगरी में शराब की फैक्ट्री को लेकर समर्थन करने से लोगों में उनके प्रति वह मान सम्मान नहीं रह गया है आज लोग उन्हें एक ‘स्वार्थी गायक ‘ के रूप में देख रहे हैं जो सिर्फ अपने बारे में ही सोचता है, उन्हें अपने नाम और पैसे से ही लेना देना है, उन्हें उत्तराखंड , उत्तराखंड वासियों से कोई वास्ता नहीं है।
अब सवाल उठता है आखिर नरेंद्र सिंह नेगी ने ऐसा क्यों किया ?  क्या सरकारी दबाव था या प्रदेश सरकार के प्रति वफादारी । बहरहाल, यह अनुमान लगाना तो मुश्किल होगा लेकिन इतना तो तय है कि सीएम त्रिवेंद्र द्वारा उन्हें “जागर संगीत नाटक अकादमी सम्मान” चुने जाने के लिए उनके आवास में लव लश्कर के साथ बधाई देने पहुंचे शायद उन्हें उनका यह अंदाज पसंद आया होगा इसलिए वह  सरकार के समर्थन में खुलकर सामने आ गए। नरेंद्र सिंह को  मीडियो द्वारा पूछा गया कि क्या आप सरकार के शराब की फैक्ट्री खोलने का समर्थन करते हैं जिस पर उन्होंने कहा ” सरकार का यह फैसला युवाओं को रोजगार और किसानों की आमदनी बढ़ाने वाला है, शराब बाहर से आयात करनी पड़ती थी अब वह प्रदेश में बनेगी और जिससे काफी पैसा बचेगा और अगर इसका विरोध होता है तो उससे पहले शराब पीना लोगों को बंद करना पड़ेगा। अगर शराब की खपत नहीं होगी तो फैक्ट्रियां भी नहीं खुलेगी।”
बस जैसी ही उनका यह बयान वायरल हुआ सोशल मीडिया में वैसे ही उन पर लोग जमकर  कटाक्ष करने लग गए। हर उत्तराखंडी उनके इस बयान से काफी आहत था वह अपने पेज पर नरेंद्र सिंह नेगी के बयान शेयर कर उनकी आलोचना कर रहा था। कुछ होने के बाद भी नरेंद्र सिंह नेगी अपने बयान पर कायम है लेकिन एक बात जरूर नरेंद्र सिंह नेगी को सोचनी होगी की उनकी पहचान समाज में एक आदर्श व्यक्ति की तरह है अगर यह आदर्श व्यक्ति ही अपनी दिशा से भटक जाए तो लोग आहत तो होंगे ही।
वैसे इतना सब कुछ होने के बाद अपने उत्तराखंडी की पहचान उन्हें  दिखानी चाहिए और अपने इस बयान को लेकर लोगों से माफी मांगनी चाहिए। उन्हें पता होना चाहिए शराब कभी रोजगार आमदनी नहीं मौत ही परोसती है ।
अगर वह वह समझते हैं कि उन्होंने जो भी बोला है वह एकदम सही है तो उन्हें सिर्फ सीएम त्रिवेंद्र रावत के उस बधाई संदेश को सुन लेना चाहिए जो मुख्यमंत्री ने उनके “जागर संगीत नाटक सम्मान” पाने के लिये उनके आवास जाकर दिया था। सीएम त्रिवेंद्र रावत ने कहा था की नरेंद्र सिंह नेगी ने चार दशक की संगीत यात्रा में उन्हें पहाड़ के जन जीवन के हर एक पहलू को बारीकी से छुआ है ।
आखिर में हम तो नरेंद्र सिंह नेगी को यही राय देंगे की उनका जुड़ाव किसी एक व्यक्ति से नहीं है बल्कि डेढ़ करोड़ उत्तराखंड वासियों से है

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