कांग्रेस सरकार में विदेश घूमने वाले मंत्री और अफसरों की विजिलेंस जांच

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त्रिवेंद्र सरकार पूर्व वन मंत्री नवप्रभात और आईएफएस अफसरों के विदेश दौरे में हुई वित्तीय अनियमितताओं के विजिलेंस जांच कराने जा रही है। इससे अफसरों की परेशानी बढ़ना तय माना जा रहा है। हरीश रावत सरकार ने इस मामले के विजिलेंस जांच कराने से साफ इनकार कर दिया था।
यह 11 साल पुराना मामला है, जब जून, 2006 में तत्कालीन वन मंत्री नवप्रभात की अगुवाई में ईको-पर्यटन संबंधी अध्ययन दल दक्षिणी अफ्रीका की यात्रा पर गया था। यात्रा के लिए वन विभाग के अफसरों ने सीएफडी खाते से 20 लाख रुपये निकाले थे। यात्रा पर सिर्फ 6,88,926 का खर्चा आया, लेकिन अफसरों ने शेष राशि खाते में जमा नहीं कराई। जब यह प्रकरण उछला तो अफसरों ने वर्ष 2012 तक शेष रकम जमा कराई गई। तब संबंधित अफसरों से स्पष्टीकरण मांगे गए, लेकिन सभी अपनी गलतियों से पल्ला झाड़ते रहे। सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने संबंधित फाइल को तलब किया है, जिसकी अब विजिलेंस जांच कराई जा रही है। सूत्रों ने बताया कि गड़बड़ी पाए जाने के बावजूद तत्कालीन सरकार के विजिलेंस जांच की सिफारिश न मानने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

हरीश रावत सरकार ने नहीं दी थी इजाजत
मार्च, 16 में अनियमितताओं की जांच के लिए शासन ने विजिलेंस जांच की सिफारिश की थी, लेकिन तत्कालीन वन मंत्री दिनेश अग्रवाल और मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इजाजत देने से इनकार कर दिया था। इसके पीछे तर्क दिया गया कि चूंकि उक्त शेष राशि जमा कराई जा चुकी है और कहीं भी सरकारी धनराशि के दुरुपयोग किया जाना प्रतीत नहीं होता, लिहाजा विजिलेंस जांच का कोई औचित्य नहीं है।
ये गए थे अफ्रीका के दौरे पर
पूर्व वन मंत्री नव प्रभात, पूर्व विधायक डा. शैलेंद्र मोहन सिंघल
आईएफएस डीबीएस खाती, विनोद सिंघल व जीएस पांडे

ये उठाए गए थे सवाल
यात्रा के छह साल बाद तक क्यों किश्तों में जमा कराई गई रकम
इस अवधि में यह रकम किसके पास थी
उक्त राशि पर कितना ब्याज बनता है
ब्याज की राशि क्यों जमा नहीं कराई गई
टूर व्यवस्थापक को बिना टेंडर के क्यों हायर किया

 

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