प्रशासन के इस कदम के बाद मदिरों में कोरोना नहीं दे पायेगा ‘दस्तक’

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दिन-प्रतिदिन बढ़ते कोरोना वायरस के रोकथाम के कारण गढ़वाल और कुमाऊं में कर्फयू जैसी स्थिति बन गई है। सभी पर्यटन स्थलों की तरह मंदिर भी इससे अछूते नहीं रहे है अब वह पर भी पर्यटकों के आने पर रोक लगा दी गई है। प्रदेश की सभी सीमाएं सील कर दी गई है खासकर नेपाल सीमा में कोई भी नागारिक भारतीय सीमा में स्वास्थ्य जांच कराए प्रवेश नहीं कर सकेगा। एक तरफ जहां सिद्धबली बाबा मंदिर फिलहाल बंद कर दिया गया है तो वहीं कैंचीधाम बैजनाथ और जागेश्वर में भी 31 मार्च तक भक्तों के प्रवेश पर रोक है।
आज अल्मोड़ा के स्मारक पुरास्थल और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संग्रहालयों में भी पर्यटकों के लिए 31 मार्च तक एंट्री बैन कर दी गई है। वही केंद्रीय परिवार कल्याण मंत्रालय की सलाह पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने जागेश्वर धाम संग्रहालय कटारमल और द्वाराहाट समेत जिले के करीब 12 मंदिरों में लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है

केंद्रीय पुरातत्व विभाग द्वारा बैजनाथ धाम में भी पाबंदी के चलते यहां आए कई श्रादालुओं को बिना दर्शन करके लौटना पड़र। अब प्रशासन आदेशानुसार मंदिर के पुजारी के आलावा किसी को भी सुबह.शाम पूजा करने की अनुमति नही है। पूजा के बाद तुरंत मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। इसके साथ ही कुमाऊं भर में सभी शैक्षणिक गतिविधियां बंद हैं।

ऋषिकेश में सामूहिक गंगा आरती पर रोक

कोरोना के चलते ऋषिकेश में सभी नदी तटों पर सामूहिक गंगा आरती पर अगले आदेश तक बैन लगा दिया गया है। वहीं उत्तराखंड के राजधानी में आयोजित सबसे प्रसिद्ध मेले झंडेजी पूर्णागिरि का भी समय से पहले समापन कर दिया गया है।

वही चंपावत में इस बार वहा आयोजित चैती मेले के आयोेजन पर रोक लगा दी गई है पूरे प्रदेश में प्रदर्शन शादी और धार्मिक आयोजनों में 50 से ज्यादा लोगों के जुटने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। राजधानी देहरादून के स्पोर्ट्स कॉलेज में बाहरी खिलाड़ियों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है। सभी पोलिर्टिकल पार्टियों ने भी अपने सभी कार्यक्रम स्थगित कर दिए है।

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