तत्कालीन सेनाध्यक्ष सैम मानेकशॉ  ने भी उत्तराखंड के जांबाजो का माना लोहा 

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साल 1971 में हुए भारत-पाक युद्ध में भारत की शानदार जीत में उत्तराखंड के जवानों का भी बहुत बड़ा योगदान रहा। इस युद्ध में जहां भारत में साढ़े तीन हजार सैनिको ने शहादत दी जिसमें 250 सैनिक उत्तराखंडी थे।अपने अदम्य साहस के चलते प्रदेश के 74 जवानों को वीरता के पदक से भी नवाजा गया।
यही कारण है कि उत्तराखंड की धरती को  वीरों की धरती कहा जाता है । साल 1971 का  युद्ध इसका सबसे बड़ा उदाहरण है । इन रणबांकुरों की कुर्बानी  और साहस को पूरी दुनिया मानती है साथ ही ये आज की  भावी पीढ़ी में जोश भरती है।  प्रदेश के जवानों का लोहा भी तत्कालीन सेनाध्यक्ष सैम मानेकशॉ बाद में फील्ड मार्शल व बांग्लादेश में पूर्वी कमान का नेतृत्व करने वाले सैन्य कमांडर ले. जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा ने भी माना । युद्ध में शरीक होने वाले थलसेना, नौसेना व वायुसेना के तमाम योद्धा जंग के उन पलों को याद कर जोश से भर जाते हैं
उत्तराखण्ड के वीरों के इस अदम्य साहस के वजह से आज संसार में उत्तराखण्ड  का भी मान बढ़ा है।

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