Sunday, October 11, 2026
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उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 साल पूरे होने पर 9 नवंबर को देहरादून आएंगे पीएम मोदी, ₹8,140 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की देंगे सौगात

देहरादून: उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 नवंबर 2026 को देहरादून पहुंच सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य के रजत जयंती समारोह के दौरान प्रधानमंत्री विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। कार्यक्रम दोपहर करीब 12:30 बजे शुरू होने की जानकारी सामने आई है।

₹8,140 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं पर रहेगा फोकस

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान उत्तराखंड को ₹8,140 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं की सौगात मिलने की संभावना है। इनमें करीब ₹930 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण किया जाएगा, जबकि ₹7,210 करोड़ से अधिक की योजनाओं का शिलान्यास प्रस्तावित है।

इन परियोजनाओं का संबंध पेयजल, सिंचाई, तकनीकी शिक्षा, ऊर्जा, शहरी विकास, खेल और कौशल विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से है। इन योजनाओं के माध्यम से राज्य में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और विकास कार्यों को गति देने पर जोर रहेगा।

राज्य स्थापना की रजत जयंती पर जारी होगा विशेष डाक टिकट

उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक स्मारक डाक टिकट जारी किए जाने की भी जानकारी है। यह डाक टिकट राज्य की रजत जयंती के अवसर को यादगार बनाने के लिए जारी किया जाएगा।

9 नवंबर को मनाया जाता है उत्तराखंड स्थापना दिवस

उत्तराखंड का गठन 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग होकर हुआ था। वर्ष 2026 में राज्य अपने गठन के 25 वर्ष पूरे कर रहा है। इसी उपलक्ष्य में प्रदेशभर में रजत जयंती से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री के प्रस्तावित दौरे को लेकर विकास परियोजनाओं और राज्य स्थापना दिवस समारोह पर विशेष ध्यान रहेगा। हालांकि, कार्यक्रम की अंतिम रूपरेखा और आधिकारिक विवरण की पुष्टि संबंधित सरकारी सूचना के आधार पर की जानी चाहिए।

नहीं रहे दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर, 75 साल की उम्र में निधन; ‘विश्वनाथ’ से ऐसे बने थे ‘नाना’

मुंबई/गोवा। हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार सुबह गोवा के डोना पाउला स्थित उनके आवास पर उन्हें बेहोशी की हालत में पाया गया। गंभीर कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक CPR देकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। अस्पताल में उन्हें सुबह करीब 5:20 बजे मृत घोषित किया गया।

विश्वनाथ गजानन पाटेकर था असली नाम

नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुड-जंजीरा में हुआ था। उनका असली नाम विश्वनाथ गजानन पाटेकर था। उनके पिता का नाम दिनकर पाटेकर और मां का नाम निर्मला पाटेकर था। मराठी परिवार में जन्मे नाना ने मुंबई के बांद्रा स्कूल ऑफ आर्ट से पढ़ाई की थी।

मां की सहेली ने दिया ‘नाना’ नाम

आज पूरी दुनिया उन्हें नाना पाटेकर के नाम से जानती है, लेकिन ‘नाना’ नाम उन्हें जन्म के साथ नहीं मिला था। एक पुराने इंटरव्यू में नाना ने खुद बताया था कि उनकी मां की एक सहेली थीं, जो उनके लिए बहन जैसी थीं। बचपन में वह उन्हें प्यार से ‘नाना-नाना’ कहकर बुलाती थीं। धीरे-धीरे यही नाम परिवार और आसपास के लोगों के बीच लोकप्रिय हो गया।

नाना ने बताया था कि उन्हें यह नाम बेहद पसंद था और उनके पासपोर्ट, आधार कार्ड और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में भी नाना पाटेकर नाम ही दर्ज था।

स्कूल में ‘विशू’ नाम से पुकारे जाते थे

स्कूल के दिनों में नाना को विश्वनाथ या ‘विशू’ कहकर बुलाया जाता था। उन्होंने बताया था कि अगर आज कोई उन्हें ‘विशू’ कहकर पुकारता है तो वह समझ जाते हैं कि सामने वाला उनके स्कूल के दिनों का कोई पुराना परिचित है।

समय के साथ ‘नाना’ नाम उनकी पहचान बन गया और विश्वनाथ पीछे छूट गया।

दमदार अभिनय से बनाई अलग पहचान

नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा के साथ-साथ रंगमंच पर भी अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी दमदार आवाज, तीखे संवाद और सहज लेकिन प्रभावशाली अभिनय ने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे विशिष्ट अभिनेताओं में शामिल किया। ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अब तक छप्पन’, ‘वेलकम’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा। उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले और भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से भी सम्मानित किया। 

एक साधारण नाम से बनी करोड़ों दिलों की पहचान

‘विश्वनाथ’ से ‘नाना’ बनने की उनकी कहानी जितनी सरल है, उतनी ही भावुक भी। मां की सहेली द्वारा प्यार से दिया गया एक घरेलू नाम आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गया। पर्दे पर अपने दमदार किरदारों से लोगों के दिलों में जगह बनाने वाले नाना पाटेकर का निधन भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति है।

उत्तराखंड में 4.9 तीव्रता का भूकंप, दिल्ली-NCR समेत कई राज्यों में महसूस हुए झटके

देहरादून। उत्तराखंड में मंगलवार देर रात भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार भूकंप की तीव्रता 4.9 मैग्नीट्यूड दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र चमोली जिले में बताया गया है, जबकि इसकी गहराई करीब 13 किलोमीटर रही।

भूकंप के झटके उत्तराखंड के अलावा दिल्ली-NCR, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और हरियाणा समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में महसूस किए गए। दिल्ली-NCR के नोएडा और गुरुग्राम में भी लोगों ने कुछ देर तक कंपन महसूस किया।

भूकंप के झटके महसूस होने के बाद कई स्थानों पर लोग अपने घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। स्थानीय लोगों ने कुछ समय तक हल्के कंपन महसूस होने की जानकारी दी। फिलहाल भूकंप से किसी बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना सामने नहीं आई है।

उत्तराखंड बना देश का छठवां पूर्ण साक्षर राज्य, CM धामी बोले- हर प्रदेशवासी के लिए गौरव की उपलब्धि

मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम के बाद उत्तराखंड ने हासिल किया मुकाम, नव-साक्षरों को मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित

देहरादून। उत्तराखंड ने पूर्ण साक्षर राज्य बनने की उपलब्धि हासिल कर देश में एक नया मुकाम प्राप्त किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में इस उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई दी। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) की परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करने वाले नव-साक्षरों को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड का पूर्ण साक्षर राज्य बनना प्रत्येक प्रदेशवासी के लिए गौरव की उपलब्धि है। यह शिक्षकों, विद्यार्थियों, नव-साक्षरों, स्वयंसेवकों और अभियान से जुड़े सभी लोगों की मेहनत एवं सामूहिक सहभागिता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों और दूरस्थ क्षेत्रों वाले प्रदेश में यह लक्ष्य हासिल करना प्रदेशवासियों की दृढ़ इच्छाशक्ति और सामूहिक प्रयासों का प्रमाण है।

देश का छठवां पूर्ण साक्षर राज्य बना उत्तराखंड

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड ने यह उपलब्धि हासिल की है। मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम के बाद उत्तराखंड देश का छठवां पूर्ण साक्षर राज्य बना है।

उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि शिक्षा सहित प्रत्येक क्षेत्र में उत्तराखंड को अग्रणी बनाने के संकल्प को और मजबूती प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने नव-साक्षरों को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने साबित किया है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती और आगे बढ़ने के लिए कभी देर नहीं होती। शिक्षा व्यक्ति को आत्मविश्वास देने के साथ जीवन में नए अवसरों के द्वार खोलती है।

अब डिजिटल और वित्तीय साक्षरता पर रहेगा जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि साक्षरता का अर्थ केवल पढ़ना-लिखना या हस्ताक्षर करना नहीं है। वर्तमान समय में अपने अधिकारों और कर्तव्यों की समझ, डिजिटल एवं वित्तीय साक्षरता तथा जीवनोपयोगी कौशल भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा कि पूर्ण साक्षरता को अंतिम मंजिल नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत के रूप में देखना होगा। अब डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता और जीवन कौशल को प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे, ताकि प्रदेश का हर नागरिक बदलती तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सके।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में शिक्षा को समावेशी और आधुनिक बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। एक शिक्षित व्यक्ति न केवल अपना जीवन बदलता है, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।

500 विद्यालयों में वर्चुअल क्लासरूम की व्यवस्था

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। नंदा गौरा योजना के माध्यम से पात्र छात्राओं को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। प्रदेश के 500 विद्यालयों में वर्चुअल क्लासरूम और सेंट्रल स्टूडियो की व्यवस्था की जा रही है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में 189 अटल उत्कृष्ट विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री बालाश्रय योजना के माध्यम से अनाथ बच्चों की निःशुल्क शिक्षा सुनिश्चित की जा रही है। इसके अलावा हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर के 100-100 विद्यालयों में आधुनिक प्रयोगशालाएं विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

अगले छह माह में शत-प्रतिशत साक्षरता का लक्ष्य

कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने पूर्ण साक्षर राज्य बनने की महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस अभियान को सफल बनाने में करीब 25 हजार स्वयंसेवकों ने अहम योगदान दिया है।

उन्होंने बताया कि अगले छह माह में राज्य को शत-प्रतिशत साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत वर्ष 2035 तक उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (GER) को 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का राष्ट्रीय लक्ष्य है। शिक्षा मंत्री के अनुसार, उत्तराखंड इस लक्ष्य को इसी वर्ष हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस गांव में एक भी बच्चा पढ़ने वाला होगा, वहां विद्यालय बंद नहीं किया जाएगा।

कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

इस अवसर पर विधायक सविता कपूर, अपर सचिव भारत सरकार अर्चना शर्मा अवस्थी, सचिव शिक्षा ज्योति यादव, अपर सचिव नमामि बंसल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

खटीमा में ‘आंगन मिलन’ कार्यक्रम में पहुंचे CM धामी, बच्चों को परोसा भोजन; गर्भवती महिलाओं को बांटी पोषण किट

मुख्यमंत्री ने 10 गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार किट और 10 लाभार्थियों को महालक्ष्मी किट की वितरित, 9 आंगनबाड़ी और 2 आशा कार्यकत्रियों को किया सम्मानित

खटीमा, 5 अक्टूबर 2026। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को खटीमा के आंगनबाड़ी केंद्र गोसीकुआ भुड़ाई में आयोजित ‘आंगन मिलन’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों, गर्भवती महिलाओं, माताओं और आंगनबाड़ी एवं आशा कार्यकत्रियों से आत्मीय संवाद कर सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने बच्चों को अपने हाथों से भोजन परोसा और उनके साथ बैठकर समय बिताया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने गोदभराई रस्म में प्रतिभाग कर गर्भवती महिलाओं को आशीर्वाद दिया। उन्होंने 10 गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार सामग्री की किट और 10 लाभार्थियों को महालक्ष्मी किट वितरित की। इसके साथ ही पांच नन्हे बच्चों का अपने हाथों से अन्नप्राशन संस्कार कराया तथा नौ आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और दो आशा कार्यकत्रियों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने समृद्धि और हरियाली के प्रतीक के रूप में पौधरोपण भी किया।

‘आंगन मिलन’ सेवा, स्नेह और संवाद का माध्यम

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि ‘आंगन मिलन’ कार्यक्रम का उद्देश्य सेवा, स्नेह और संवाद को प्रत्येक व्यक्ति और हर घर तक पहुंचाना है। प्रदेशभर में ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल बच्चों को पोषण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये बच्चों के स्वस्थ भविष्य, प्रारंभिक शिक्षा, संस्कार और सर्वांगीण विकास की नींव तैयार करने वाले महत्वपूर्ण केंद्र हैं।

मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की सराहना करते हुए कहा कि वे बच्चों की देखभाल और पोषण के साथ सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके बच्चे भी नगला तराई स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़े हैं।

मातृशक्ति और बच्चों का स्वास्थ्य सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि माताओं और बच्चों का स्वास्थ्य एवं पोषण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। महालक्ष्मी किट योजना, पोषण योजनाओं और मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना के माध्यम से माताओं एवं बच्चों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

उन्होंने कहा कि दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बर्थ वेटिंग होम की व्यवस्था की जा रही है। जरूरत पड़ने पर हेली एंबुलेंस की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं, जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं को स्वास्थ्य सेवाएं और पात्र लाभार्थियों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रारंभिक बाल्यावस्था जीवन का महत्वपूर्ण चरण है। इस दौरान बच्चों को पौष्टिक आहार, उचित देखभाल, प्रारंभिक शिक्षा और अच्छे संस्कार मिलना जरूरी है। इससे उनके स्वस्थ एवं सशक्त भविष्य की मजबूत नींव रखी जा सकती है।

‘कोई बच्चा कुपोषित न रहे’, सरकार का संकल्प

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि उत्तराखंड में कोई भी बच्चा कुपोषित न रहे और प्रत्येक बच्चे को स्वस्थ, सुरक्षित एवं संस्कारयुक्त वातावरण मिले। बच्चों के पोषण और बेहतर भविष्य की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि जब सरकार, समाज और परिवार मिलकर माताओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण के लिए प्रयास करते हैं, तभी स्वस्थ एवं सशक्त उत्तराखंड की नींव मजबूत होती है। मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी और आशा कार्यकत्रियों से भी इसी सेवा भावना के साथ कार्य करते रहने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में उनकी यात्रा प्रेरणादायी रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश के सभी वर्गों के कल्याण और राष्ट्रहित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। उनका कार्य, समर्पण और सेवा भाव देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है।

सेवा संकल्प अभियान के तहत नानकमत्ता पहुंचे CM धामी, गुरुद्वारा परिसर में किया श्रमदान

गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब में मत्था टेक प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की, बोले- स्वच्छता हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी

नानकमत्ता, 5 अक्टूबर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सोमवार को ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत नानकमत्ता पहुंचे। यहां उन्होंने गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब परिसर में आयोजित स्वच्छता अभियान में प्रतिभाग कर श्रमदान किया। मुख्यमंत्री ने स्वयं साफ-सफाई कर लोगों को स्वच्छता को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने का संदेश दिया।

इससे पहले मुख्यमंत्री ने गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब में मत्था टेककर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से मुख्यमंत्री को सरोपा एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।

धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखने की अपील

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने के साथ ही आसपास के परिवेश को स्वच्छ रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य है, जहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं।

उन्होंने कहा कि धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के साथ बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों, अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी स्वच्छता बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए। स्वच्छता किसी एक अभियान या कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे जनभागीदारी के माध्यम से निरंतर आगे बढ़ाना जरूरी है।

सेवा संकल्प अभियान के तहत हो रहे विभिन्न कार्यक्रम

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा के प्रति समर्पण का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में सेवा, स्वच्छता और जनभागीदारी की भावना को नई मजबूती मिली है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के जन्मदिवस 17 सितंबर से प्रदेश में शुरू हुए ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत सेवा, जनभागीदारी, संवाद और नवाचार से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब परिसर में स्वच्छता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अपने आसपास के क्षेत्रों को स्वच्छ रखने में सक्रिय योगदान दें और स्वच्छता को दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं।

ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, भाजपा जिलाध्यक्ष कमल जिंदल, नगर पंचायत अध्यक्ष प्रेम सिंह टुरना, पूर्व विधायक प्रेम सिंह राणा, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष सरदार जोगेंद्र सिंह, महासचिव सरदार अमरजीत सिंह बोपराय, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, एसएसपी अजय गणपति और मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शासनी सहित गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

थारू जनजाति संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री धामी ने सुनी समाज की समस्याएं

खटीमा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को खटीमा में आयोजित थारू जनजाति संवाद कार्यक्रम में प्रतिभाग कर थारू समाज के प्रतिनिधियों की समस्याएं, सुझाव और अपेक्षाएं सुनीं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बीएसएफ के एवरेस्ट विजेता मोहन सिंह राणा तथा आईटीबीपी के एवरेस्ट विजेता टीला सेन को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि थारू समाज के साथ उनका जुड़ाव वर्षों पुराना है और खटीमा से उनका आत्मीय संबंध हमेशा बना रहेगा। उन्होंने कहा कि यह संवाद केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सरकार और थारू समाज के बीच विश्वास एवं विकास की साझेदारी को मजबूत करने का माध्यम है। सरकार समाज की समस्याओं और सुझावों के आधार पर योजनाओं को और प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में धर्मांतरण की रोकथाम के लिए सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया गया है और धर्मांतरण करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री ने नशे को समाज और परिवार के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर नशे के खिलाफ अभियान चला रही हैं। उन्होंने समाज और प्रशासन से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने का आह्वान किया।

जनजातीय समाज के विकास को सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समाज के सशक्तिकरण के लिए अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का जनजातीय समाज से होना इस सोच का महत्वपूर्ण उदाहरण है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार जनजातीय समाज को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अटल आवास योजना में आय सीमा को व्यावहारिक बनाया गया है और घर निर्माण की लागत में भी बढ़ोतरी की गई है। उधम सिंह नगर में इस योजना के तहत लगभग तीन करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के माध्यम से भी बड़ी संख्या में जनजातीय परिवारों को लाभ मिला है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत उधम सिंह नगर जनपद में पहले चरण में 824 और दूसरे चरण में 101 आवासों का निर्माण किया गया है।

शिक्षा और छात्रावास सुविधाओं पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए आश्रम पद्धति विद्यालयों, छात्रावासों और आईटीआई संस्थानों के विकास पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। आश्रम पद्धति विद्यालयों को कक्षा 12 तक अपग्रेड करने का कार्य गतिमान है। वहीं, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के माध्यम से भी जनजातीय बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।

उन्होंने बताया कि खटीमा में बालिका छात्रावास के लिए चार करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जबकि बाजपुर में 16 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विद्यालय और छात्रावास का निर्माण किया जा रहा है। गदरपुर में 100 बेड का बालक छात्रावास भी बनाया जा रहा है।

थारू राजकीय इंटर कॉलेज में दो करोड़ रुपये से अधिक की लागत से खेल मैदान के सौंदर्यीकरण, ऑडिटोरियम के आधुनिकीकरण और भवन की मरम्मत का कार्य किया जा रहा है।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि थारू समाज की माताओं और बहनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से रोजगार, प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वन धन केंद्रों के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़कर महिलाओं की आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि जनजातीय समाज की महिलाओं को एक करोड़ रुपये से अधिक की चक्रीय निधि और आठ करोड़ रुपये से अधिक की निवेश सहायता उपलब्ध कराई गई है। इसके माध्यम से महिलाओं के छोटे-छोटे रोजगार को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

बुनियादी सुविधाओं का विस्तार

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत वर्ष 2020 से 2025 तक 10 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न योजनाएं पूरी की गई हैं। इसके अलावा हजारों परिवारों को पेयजल, बिजली और गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। विधानसभा क्षेत्र सितारगंज में थारू विकास भवन का निर्माण भी किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत जनजातीय क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाओं के लिए दो करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि स्वीकृत की गई है। जनजातीय परिवारों की बेटियों की शादी के लिए 50 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। जनजातीय क्षेत्रों के विकास को गति देने के लिए उधम सिंह नगर, देहरादून, पिथौरागढ़ और चमोली में अलग-अलग जनजाति कल्याण अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।

बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस का दर्जा

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय समाज के गौरव को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का ऐतिहासिक कार्य किया। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लेकर देश को जनजातीय समाज के साहस, संघर्ष और बलिदान से परिचित कराया गया।

उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार का संकल्प है कि थारू समाज का प्रत्येक परिवार विकास की मुख्यधारा से जुड़े, प्रत्येक युवा आत्मनिर्भर बने और प्रत्येक बेटी शिक्षित एवं सशक्त बने। थारू समाज की हर समस्या, सुझाव और अपेक्षा सरकार की प्राथमिकता है।

प्रतिनिधियों ने जताया आभार

संवाद कार्यक्रम के दौरान थारू समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधियों ने कहा कि मुख्यमंत्री हमेशा समाज के सुख-दुख से जुड़े रहे हैं और थारू संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण के लिए किए गए कार्य ऐतिहासिक हैं।

सीएम हेल्पलाइन-1905 पर जन शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं: मुख्यमंत्री धामी

पेयजल व जल जीवन मिशन की लंबित शिकायतें एक सप्ताह में निपटाने के निर्देश, शून्य कार्रवाई वाले अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी होंगे

देहरादून, 30 जुलाई। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन-1905 की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को जन शिकायतों के समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक निस्तारण के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम है और शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या उदासीनता स्वीकार नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने पेयजल विभाग एवं जल जीवन मिशन से जुड़ी बड़ी संख्या में लंबित शिकायतों पर नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी लंबित मामलों का एक सप्ताह के भीतर प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि समयसीमा का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री धामी ने निर्देश दिए कि जिन अधिकारियों की सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण में शून्य प्रतिशत कार्यवाही है, उन्हें विभागाध्यक्ष तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी करें। यदि उनका स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया जाता है तो नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि निर्धारित समय सीमा में जिन शिकायतों का समाधान नहीं हो पा रहा है, उनकी नियमित समीक्षा विभागाध्यक्ष और जिलाधिकारी स्तर पर की जाए। साथ ही स्पेशल क्लोज, डिमांड, सजेशन एवं अन्य श्रेणियों में दर्ज शिकायतों की भी गंभीरता से जांच हो, ताकि किसी भी वास्तविक शिकायत का समाधान प्रभावित न हो।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रत्येक सोमवार को जिला स्तर पर जिलाधिकारी, मंडल स्तर पर मंडलायुक्त तथा शासन स्तर पर सभी सचिव ‘समाधान दिवस’ के माध्यम से जन समस्याओं की नियमित सुनवाई और समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि समाधान दिवस को प्रभावी जनसेवा मंच के रूप में विकसित किया जाए और इसकी नियमित मॉनिटरिंग भी की जाए।

बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय वन सेवा के अधिकारियों द्वारा अपने प्रारंभिक सेवा क्षेत्रों में किए गए जनहित के नवाचारों की विस्तृत रिपोर्ट 50 दिनों के भीतर उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि सरकारी कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद पहले ही महीने से पेंशन मिलनी शुरू हो जाए।

मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन, लोक निर्माण, पर्यटन, स्वास्थ्य और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को चारधाम यात्रा मार्गों का स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने भूमि संबंधी विवादों का भी प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

बैठक में सचिव डॉ. पंकज पांडेय ने बताया कि 18 अप्रैल से 28 जुलाई 2026 के बीच मुख्यमंत्री हेल्पलाइन-1905 पर 67,843 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें 20,461 शिकायतों का पूर्ण निस्तारण, 31,363 का आंशिक निस्तारण, 7,404 शिकायतें प्रक्रियाधीन, 4,061 लंबित तथा 3,738 शिकायतें स्पेशल क्लोज श्रेणी में हैं। उन्होंने बताया कि स्पेशल क्लोज की दर घटकर 5.5 प्रतिशत रह गई है, जो शिकायत निस्तारण व्यवस्था में सुधार का संकेत है।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अल्मोड़ा, टिहरी, हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर के शिकायतकर्ताओं से फोन पर बातचीत कर उनकी शिकायतों के समाधान की जानकारी भी ली। शिकायतकर्ताओं ने हेल्पलाइन के माध्यम से समस्याओं के समाधान पर संतोष व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री का आभार जताया।

बैठक में राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय कुमार रुहेला, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, एल. फैनई, डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिवगण, विभागाध्यक्ष तथा सभी जिलाधिकारी वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।

80वें स्वतंत्रता दिवस पर उत्तराखंड में होंगे भव्य कार्यक्रम, मुख्य सचिव ने दिए व्यापक तैयारियों के निर्देश

देहरादून, 29 जुलाई। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियों को लेकर आयोजित बैठक में प्रदेशभर में भव्य और जनभागीदारी आधारित कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल औपचारिक आयोजन न होकर राष्ट्रभक्ति, सामाजिक सहभागिता और जनजागरूकता का पर्व बने।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि राज्य एवं जनपद स्तर पर खेल प्रतियोगिताएं, रक्तदान शिविर, हाई एल्टीट्यूड साहसिक गतिविधियां, मैराथन, साइकिल, बाइक एवं कार रैली जैसे विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। साथ ही प्रदेश के प्रमुख शहरों में पुलिस, सेना, अर्द्धसैनिक बल एवं एनसीसी बैंड द्वारा देशभक्ति से ओत-प्रोत संगीतमय प्रस्तुतियां आयोजित करने के भी निर्देश दिए।

उन्होंने जल संरक्षण एवं संवर्द्धन के साथ-साथ बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि रक्तदान और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों में अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित की जाए।

महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी ने बताया कि 15 अगस्त को प्रातः 10 बजे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी परेड ग्राउंड, देहरादून में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। मुख्य सचिव सुबह 9 बजे सचिवालय में ध्वजारोहण करेंगे, जबकि देहरादून को छोड़कर सभी जिलाधिकारी अपने-अपने जनपदों में सुबह 9:30 बजे ध्वजारोहण करेंगे। देहरादून के सभी सरकारी एवं गैर-सरकारी कार्यालयों में सुबह 9 बजे ध्वजारोहण किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि 14 अगस्त को शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक तथा 15 अगस्त को सुबह 6 बजे से 11 बजे तक प्रदेश के प्रमुख चौराहों पर लाउडस्पीकर के माध्यम से देशभक्ति गीत प्रसारित किए जाएंगे। इसके अलावा 14 अगस्त को प्रदेश मुख्यालय में कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन होगा तथा सरकारी भवनों और ऐतिहासिक इमारतों को एलईडी रोशनी से सजाया जाएगा।

प्रदेश के सभी शिक्षण संस्थानों में सुबह 7 बजे प्रभात फेरी निकाली जाएगी। इसके बाद ध्वजारोहण, राष्ट्रगान, खेलकूद प्रतियोगिताएं, विचार गोष्ठियां, प्रदर्शनी, वाद-विवाद, निबंध प्रतियोगिताएं एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

बैठक में प्रमुख सचिव एल. फैनई, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव शैलेश बगौली, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम, बृजेश कुमार संत, विनय शंकर पाण्डेय, विनोद कुमार सुमन, युगल किशोर पंत, रणवीर सिंह चौहान, जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आशीष चौहान सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

कारगिल विजय दिवस पर मुख्यमंत्री धामी ने ‘रन फॉर कारगिल हीरोज’ मैराथॉन को दिखाई हरी झंडी, शहीदों को दी श्रद्धांजलि

देहरादून, 26 जुलाई। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को गढ़ीकैंट स्थित शौर्य स्थल, चीड़बाग में आयोजित ‘रन फॉर कारगिल हीरोज’ मैराथॉन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने शौर्य स्थल पर पुष्पचक्र अर्पित कर कारगिल युद्ध के अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी और राष्ट्र की रक्षा में उनके सर्वोच्च बलिदान को नमन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। वर्ष 1999 में भारतीय सैनिकों ने विषम परिस्थितियों में अद्वितीय वीरता का परिचय देते हुए मातृभूमि की रक्षा की और पूरी दुनिया के सामने भारतीय सेना की वीरता का परचम लहराया। उन्होंने कहा कि देश सदैव अपने वीर सैनिकों और शहीदों के बलिदान का ऋणी रहेगा।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड वीरों की भूमि है और राज्य के अनेक सैनिकों ने कारगिल युद्ध सहित विभिन्न सैन्य अभियानों में अपने शौर्य और सर्वोच्च बलिदान से देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है तथा उनके सम्मान और हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ प्रयासरत है।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे शहीदों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं तथा देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के प्रति अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करें।

इस अवसर पर सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, युवा, मातृशक्ति तथा अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।