Thursday, February 26, 2026
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बेटियों के जन्म से करियर तक सरकार का साथ – पुष्कर सिंह धामी

देहरादून। प्रदेश सरकार बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और रोजगार सुनिश्चित करने के लिए निरंतर ठोस कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि जन्म से लेकर उच्च शिक्षा और आत्मनिर्भर बनने तक बेटियों को हर स्तर पर सहयोग दिया जाए।

मुख्यमंत्री ने गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास से वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत नंदा गौरा योजना के तहत प्रदेश की 33,251 बालिकाओं के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से 1 अरब 45 करोड़ 93 लाख रुपए की धनराशि एक क्लिक से हस्तांतरित की।

उन्होंने कहा कि समाज में बेटा-बेटी के बीच भेदभाव को समाप्त करने और कन्या जन्म को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से यह योजना संचालित की जा रही है। योजना के तहत बालिका के जन्म पर 11 हजार रुपए तथा 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने पर उच्च शिक्षा के लिए 51 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक इस योजना के माध्यम से 3,77,784 बालिकाओं को कुल 11 अरब 68 करोड़ 49 लाख रुपए की सहायता राशि वितरित की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करने के साथ ही सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत आरक्षण भी प्रदान कर रही है, जिससे महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है और प्रशासनिक व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार लखपति दीदी योजना के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का कार्य कर रही है। नंदा गौरा योजना कन्या भ्रूण हत्या पर रोक, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने और लैंगिक समानता स्थापित करने में प्रभावी साबित हो रही है।

इस अवसर पर महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने बताया कि इस वर्ष लाभान्वित होने वाली बालिकाओं में 5,913 नवजात शामिल हैं, जबकि 27,338 बालिकाओं को 12वीं पास करने पर सहायता राशि प्रदान की गई है। उन्होंने सभी लाभार्थियों को शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम में सचिव चंद्रेश कुमार, विभागीय निदेशक बंशीलाल राणा सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

SASCI योजना के तहत उत्तराखंड को 350 करोड़ की प्रोत्साहन राशि, मुख्यमंत्री धामी ने जताया आभार

देहरादून। उत्तराखंड राज्य को पूंजीगत निवेश हेतु विशेष सहायता योजना (SASCI) के भाग-IX “वित्तीय प्रबंधन में दक्षता के लिए राज्यों को प्रोत्साहन” के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा 350 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं भारत सरकार का आभार व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्वीकृति राज्य सरकार द्वारा अपनाए गए सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन, पारदर्शिता और राजकोषीय अनुशासन का परिणाम है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड ने कर संग्रह बढ़ाने, व्यय नियंत्रण, डिजिटल भुगतान प्रणाली को सशक्त करने तथा बजटीय प्रबंधन में सुधार जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि इससे पूर्व राज्य को खनन क्षेत्र में पारदर्शी नीतियों, ई-टेंडरिंग एवं ऑनलाइन मॉनिटरिंग प्रणाली लागू करने तथा परिवहन विभाग में सुधारों के लिए भी केंद्र सरकार से प्रोत्साहन राशि प्राप्त हो चुकी है। यह दर्शाता है कि उत्तराखंड लगातार सुधार आधारित शासन मॉडल को अपनाकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सशक्त पहचान बना रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड सुशासन, पारदर्शिता और विकास के नए मानक स्थापित कर रहा है। केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर दिया गया यह प्रोत्साहन राज्य के लिए प्रेरणास्रोत है और इससे विकास परियोजनाओं को नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री और भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार ‘विकास भी, विरासत भी’ के संकल्प के साथ उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने हेतु निरंतर प्रयासरत है।

चारधाम यात्रा 2025 के अभिनव ट्रैफिक मॉडल पर उत्तराखंड पुलिस को राष्ट्रीय SKOCH Award, एसपी लोकजीत सिंह होंगे सम्मानित

देहरादून। उत्तराखंड पुलिस के लिए गर्व का विषय है कि चारधाम यात्रा 2025 के सफल संचालन हेतु विकसित अभिनव ट्रैफिक एवं कंट्रोल रूम प्रबंधन प्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित SKOCH Group द्वारा प्रदान किए जाने वाले SKOCH Award के लिए चयनित किया गया है।

पुलिस अधीक्षक (यातायात) देहरादून लोकजीत सिंह के नेतृत्व में “चारधाम यात्रा 2025 : निर्बाध तीर्थ प्रबंधन हेतु अभिनव कंट्रोल रूम समाधान” नामांकन को 106वें SKOCH समिट में सम्मानित किया जाएगा। यह पुरस्कार शासन एवं विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट और परिणाम-आधारित नवाचारों के लिए दिया जाता है।

चारधाम यात्रा के दौरान प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं। वर्ष 2025 में यातायात प्रबंधन को सुरक्षित, सुचारु और तकनीक-आधारित बनाने के लिए ट्रैफिक पुलिस द्वारा उन्नत कंट्रोल रूम सिस्टम, रियल-टाइम मॉनिटरिंग, डिजिटल समन्वय, इंटेलिजेंट रूट डायवर्जन और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत किया गया। इसके परिणामस्वरूप यातायात जाम में उल्लेखनीय कमी आई और तीर्थयात्रियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित हुई।

यह सम्मान एसपी (ट्रैफिक) लोकजीत सिंह की तकनीकी दक्षता, पारदर्शी कार्यशैली और जनसेवा के प्रति समर्पण का प्रमाण है। चारधाम यात्रा जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में प्रभावी यातायात प्रबंधन राज्य की प्रशासनिक क्षमता और बहु-एजेंसी समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बना।

उल्लेखनीय है कि यह पुरस्कार 28 मार्च 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 106वें SKOCH समिट के दौरान प्रदान किया जाएगा। पुलिस महानिदेशक एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने इस उपलब्धि पर श्री लोकजीत सिंह सहित पूरी ट्रैफिक पुलिस टीम को बधाई देते हुए इसे प्रदेश के लिए प्रेरणादायी क्षण बताया।

वर्ष 2024 की चारधाम यात्रा के दौरान आई चुनौतियों से सीख लेते हुए पुलिस मुख्यालय ने वर्ष 2025 के लिए सशक्त रणनीति तैयार की। IG रेंज के अंतर्गत केंद्रीकृत कंट्रोल रूम की स्थापना की जिम्मेदारी एसपी लोकजीत सिंह को सौंपी गई। सीमित समय में आधुनिक तकनीकी संसाधनों और निरंतर मॉनिटरिंग के माध्यम से यात्रा प्रबंधन को व्यवस्थित ढांचे में ढाला गया।

धराली आपदा के दौरान रेस्क्यू समन्वय, पहलगाम आतंकी हमले के समय सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखना तथा विभिन्न हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी—इन जटिल परिस्थितियों में कंट्रोल रूम की त्वरित और समन्वित कार्रवाई ने यात्रा को सुरक्षित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसके अलावा लोकजीत सिंह को पूर्व में वर्ष 2021 में कोविड प्रबंधन में उत्कृष्ट योगदान के लिए FICCI द्वारा FICCI Smart Policing Award से सम्मानित किया जा चुका है। साथ ही वर्ष 2024 में चारधाम यात्रा प्रबंधन में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए राज्यपाल द्वारा उत्कृष्ट सेवा पदक भी प्रदान किया गया था।

राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त यह सम्मान उत्तराखंड पुलिस की नवाचार आधारित कार्यशैली, प्रतिबद्धता और जनसेवा के प्रति समर्पण का प्रतीक है। यह उपलब्धि पूरे प्रदेश के लिए गौरव, प्रेरणा और विश्वास का संदेश देती है।

सरकारी कार्यालयों की सुरक्षा पर सख्त मुख्यमंत्री धामी, एसओपी बनाने के निर्देश

देहरादून।

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने सरकारी कार्यालयों और कार्यस्थलों पर अधिकारियों, कर्मचारियों एवं शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मुख्य सचिव को विस्तृत एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

सोमवार को उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक मोर्चा के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री से भेंट कर 21 फरवरी को प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में हुई घटना सहित हाल के दिनों में विभिन्न स्थानों पर सरकारी कार्मिकों के साथ हुई घटनाओं का उल्लेख किया और ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की।

मुख्यमंत्री ने कर्मचारी नेताओं की बातों को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि सरकार कार्मिकों के मान-सम्मान और सुरक्षा को लेकर सदैव संवेदनशील और प्रतिबद्ध रही है। उन्होंने तत्काल मुख्य सचिव को फोन कर अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देशों वाली एसओपी तैयार करने को कहा।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड पुलिस के पुलिस महानिदेशक (DGP) को भी निर्देश दिए कि सभी सरकारी कार्यालयों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं और इस प्रकार की घटनाओं पर त्वरित एवं सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही देहरादून पुलिस के एसएसपी को शिक्षा निदेशालय में हुई घटना में शामिल दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

इस अवसर पर राज्य औषधीय पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष प्रताप सिंह पंवार, उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक मोर्चा के अध्यक्ष राम सिंह चौहान, महामंत्री मुकेश बहुगुणा सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

संस्कृत प्रतिभाओं को सम्मान, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दी छात्रवृत्तियाँ और किया ई-संस्कृत संभाषण शिविर का शुभारंभ

देहरादून। सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने गार्गी बालिका संस्कृत छात्रवृत्ति तथा डॉ. भीमराव अंबेडकर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति संस्कृत छात्रवृत्ति विद्यार्थियों को प्रदान की।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षा स्वाध्याय केन्द्र एवं ई-संस्कृत संभाषण शिविर का वर्चुअल शुभारंभ किया। साथ ही उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के त्रैमासिक पत्र संस्कृत वार्ता का विमोचन भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड की पहचान केवल ऊँचे पर्वतों और ऐतिहासिक मंदिरों से ही नहीं, बल्कि ज्ञान और आस्था की भाषा देववाणी संस्कृत से भी है। वेदों, उपनिषदों, रामायण, महाभारत, आयुर्वेद, खगोलशास्त्र, गणित और दर्शनशास्त्र जैसे समृद्ध ज्ञान की जड़ें संस्कृत में निहित हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत हमारे अतीत की धरोहर ही नहीं, बल्कि भविष्य की संभावना भी है।

उन्होंने संस्कृत की वैज्ञानिकता का उल्लेख करते हुए महर्षि पाणिनि द्वारा रचित अष्टाध्यायी को विश्व के भाषाविदों के लिए आज भी आश्चर्य का विषय बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में संस्कृत के वैज्ञानिक व्याकरण पर शोध किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन हेतु निरंतर कार्य हो रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से संस्कृत को आधुनिक और व्यवहारिक भाषा के रूप में स्थापित करने के प्रयास किए गए हैं। एआई तकनीक के माध्यम से संस्कृत ग्रंथों को नए स्वरूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सदियों से संस्कृत अध्ययन और शोध का केंद्र रहा है। राज्य में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया गया है और सभी जनपदों में आदर्श संस्कृत ग्राम स्थापित किए गए हैं। ‘गार्गी संस्कृत बालिका छात्रवृत्ति योजना’ की शुरुआत भी राज्य में पहली बार की गई है।

संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अनेक नवाचार किए गए हैं। संस्कृत विश्वविद्यालय में सुविधाओं का विस्तार किया गया है और प्रत्येक जनपद में संस्कृत ग्राम स्थापित किए गए हैं।

इस अवसर पर विधायक सविता कपूर, खजान दास, सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक कुमार, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकान्त पाण्डेय एवं निदेशक संस्कृत शिक्षा कंचन देवराड़ी सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

देहरादून के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई रफ्तार — आवास सचिव ने एमडीडीए की प्रमुख परियोजनाओं का किया निरीक्षण

देहरादून, 21 फरवरी 2026। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के तहत राजधानी देहरादून को सुनियोजित और आधुनिक स्वरूप देने के लिए मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) की महत्वपूर्ण परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने प्राधिकरण की तीन प्रमुख परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता की समीक्षा की।

निरीक्षण के दौरान सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य तय समयसीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरे किए जाएं, ताकि शहर में यातायात, पार्किंग और व्यापारिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित हो सके।

इंदिरा मार्केट पुनर्विकास परियोजना

इंदिरा मार्केट एवं टैक्सी स्टैंड क्षेत्र के दुकानदारों के पुनर्वास के लिए संचालित इस परियोजना के प्रथम चरण का कार्य तेजी से चल रहा है। C और D ब्लॉक में दो तल के बेसमेंट का निर्माण पूरा हो चुका है तथा शीर्ष तल का निर्माण जारी है। परियोजना में तीन तल के बेसमेंट सहित लगभग 1050 कार पार्किंग की व्यवस्था की जा रही है। इसे दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

आढ़त बाजार परियोजना: हरिद्वार बाइपास क्षेत्र में लगभग 7.7 हेक्टेयर भूमि पर नया आढ़त बाजार विकसित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 24 मीटर चौड़ी सड़क, मंडियों के लिए व्यवस्थित लेआउट, लगभग 650 वाहनों की मल्टी लेवल पार्किंग, वेयरहाउस, कार्यालय, एसटीपी, पार्क और अन्य आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

मल्टी लेवल कार पार्किंग — तहसील परिसर: पलटन बाजार एवं तहसील चौक क्षेत्र की पार्किंग समस्या के समाधान के लिए आधुनिक तहसील कार्यालय के साथ लगभग 1000 वाहनों की क्षमता वाली मल्टी लेवल पार्किंग विकसित करने का प्रस्ताव है। सचिव ने संबंधित अधिकारियों को वार्ता प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कर परियोजना को धरातल पर उतारने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान प्राधिकरण सचिव, अभियंता और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में शहर के संतुलित विकास के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंदिरा मार्केट, आढ़त बाजार और मल्टी लेवल पार्किंग जैसी परियोजनाएं शहर की यातायात व्यवस्था और व्यापारिक गतिविधियों को नई मजबूती प्रदान करेंगी।

जनजाति समुदाय के उत्थान को सरकार प्रतिबद्ध — सीमांत क्षेत्रों के निवासी देश की सीमा के प्रहरी: मुख्यमंत्री

चमोली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को बिरही (बेडूबगड़) में नीति-माणा जनजाति कल्याण समिति द्वारा आयोजित तीन दिवसीय जनजाति समागम-2026 के समापन समारोह में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनजाति समुदाय के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय निवासी देश की सीमाओं के सजग प्रहरी हैं।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में नीति घाटी भोटिया जनजाति के शीतकालीन प्रवास एवं भूमि संबंधी मामलों के निस्तारण, बेडूबगड़ भोटिया पड़ाव में सामुदायिक भवन निर्माण, स्व. गौरा देवी की प्रतिमा एवं पार्क निर्माण, बैरासकुंड मंदिर के सौंदर्यीकरण तथा बेडूबगड़ पड़ाव की भूमि को सुरक्षित करने के लिए कार्यों की घोषणा की।

उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम हैं। जनजातीय समाज ने सदियों से प्रकृति संरक्षण, लोकज्ञान और सामूहिक जीवन की परंपरा को सहेजकर समाज को मजबूत किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समाज के उत्थान के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें उन्नत ग्राम अभियान और एकलव्य आदर्श विद्यालय प्रमुख हैं। राज्य में जनजातीय छात्रों को प्राथमिक से स्नातकोत्तर स्तर तक छात्रवृत्ति दी जा रही है, 16 राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय संचालित हैं तथा बेटियों के विवाह हेतु 50 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान है।

उन्होंने बताया कि जनजातीय संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिवर्ष जनजातीय एवं खेल महोत्सव आयोजित किए जा रहे हैं। टिम्मरसैंण महादेव, हीरामणि मंदिर और मलारी गांव के सामुदायिक स्थल के विकास के लिए करोड़ों रुपये की धनराशि स्वीकृत की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान के तहत प्रदेश के 128 जनजातीय गांव चिन्हित किए हैं, जहां शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही तकनीकी शिक्षा से जोड़ने के लिए आईटीआई संस्थान और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु निशुल्क कोचिंग की व्यवस्था की गई है।

उन्होंने कहा कि चमोली जिले में 800 से अधिक होम-स्टे संचालित हैं, जिनसे 4 हजार से अधिक स्थानीय लोगों को स्वरोजगार मिला है। जनजातीय संस्कृति, धार्मिक और साहसिक पर्यटन के माध्यम से आजीविका के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं तथा उत्तराखंड की समृद्ध परंपराओं को वैश्विक पहचान मिल रही है।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, जनजातीय संगठनों के पदाधिकारियों और जिला स्तरीय अधिकारियों सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने की कुंभ मेला-2027 तैयारियों की समीक्षा, समयबद्ध कार्य पूरे करने के सख्त निर्देश

हरिद्वार, 21 फरवरी 2026। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को हरिद्वार में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में कुंभ मेला-2027 की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि आगामी कुंभ मेला दिव्य, भव्य और ऐतिहासिक होगा तथा श्रद्धालुओं की सुविधा, सुगमता और सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मेले से संबंधित सभी कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग बेहतर समन्वय के साथ कार्य करें और लिए गए निर्णयों का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

मेला नियंत्रण भवन में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने पिछली बैठक में दिए गए निर्देशों पर हुई कार्रवाई और वर्तमान कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने मेले से जुड़े सभी कार्य आगामी अक्टूबर तक पूर्ण करने के निर्देश दिए तथा स्थायी एवं अस्थायी कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर दिया। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए थर्ड-पार्टी ऑडिट कराने के भी निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री ने परिवहन और पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने, वैकल्पिक मार्ग चिन्हित करने तथा संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए स्नान, आवागमन और ठहराव की विस्तृत योजना बनाने को कहा। महिला और वृद्ध श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं करने के निर्देश भी दिए गए।

उन्होंने कुंभ क्षेत्र में स्वच्छता, स्वास्थ्य सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर बोट और बाइक एंबुलेंस की व्यवस्था की जाए। साथ ही पर्याप्त पुलिस बल, साइबर सुरक्षा, अग्निशमन और रेस्क्यू टीमों की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा।

मुख्यमंत्री ने घाटों के सुदृढ़ीकरण, पुलों के सुरक्षा ऑडिट, विद्युत लाइनों को भूमिगत करने तथा भूमि प्रबंधन को सुव्यवस्थित रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कुंभ के सफल आयोजन के लिए साधु-संतों, अखाड़ों, जनप्रतिनिधियों और स्वयंसेवी संगठनों का सहयोग लिया जाए।

बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, सुबोध उनियाल तथा पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत सहित कई जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिभाग कर सुझाव दिए।

सरकारी विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा — 880 स्मार्ट टीवी से सजेगी स्मार्ट क्लास

देहरादून, 21 फरवरी 2026// सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार जिला प्रशासन देहरादून द्वारा सरकारी विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में कदम तेज कर दिए गए हैं। जनपद के स्कूलों में स्मार्ट क्लास सुविधा विकसित करने हेतु कुल 880 स्मार्ट टीवी का स्टॉक तैयार कर लिया गया है, जिससे अब सरकारी विद्यालय भी निजी स्कूलों की भांति आधुनिक डिजिटल शिक्षण व्यवस्था से जुड़ सकेंगे।

जिला प्रशासन द्वारा पिछले डेढ़ वर्ष से “उत्कर्ष” परियोजना के तहत सरकारी विद्यालयों को सुविधासंपन्न बनाया जा रहा है। इस परियोजना के अंतर्गत स्कूलों में फर्नीचर, खेल अवस्थापना, शौचालय, विद्युत, पेयजल, मंकीनेट तथा लाइब्रेरी जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जा चुकी हैं।

जिलाधिकारी सविन बसंल के निर्देशानुसार खरीदे गए स्मार्ट टीवी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्री-डिस्पैच इंस्पेक्शन (PDI) कराया जाएगा। इसके तहत जिला सूचना विज्ञान अधिकारी और मुख्य शिक्षा अधिकारी कंपनी के विनिर्माण स्थल पांडिचेरी जाकर उपकरणों का भौतिक निरीक्षण करेंगे।

निरीक्षण के दौरान स्मार्ट टीवी की गुणवत्ता, तकनीकी मानक, सुरक्षा प्रावधान तथा निर्धारित विनिर्देशों के अनुरूपता की विस्तृत जांच की जाएगी। संतोषजनक पाए जाने के बाद ही सामग्री को जनपद में भेजने की अनुमति दी जाएगी।

जिला प्रशासन का उद्देश्य है कि विद्यालयों को उच्च गुणवत्ता वाले उपकरण प्राप्त हों और सार्वजनिक धन का उपयोग पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ हो। इस पहल से शिक्षण प्रक्रिया अधिक रोचक, प्रभावी एवं सहभागितापूर्ण बनेगी, शिक्षकों को ऑडियो-विजुअल माध्यम से पढ़ाने में सुविधा मिलेगी तथा ग्रामीण व दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालय भी तकनीकी रूप से सशक्त बनेंगे।

इस महत्वाकांक्षी स्मार्ट क्लास परियोजना से जिले के हजारों विद्यार्थियों को आधुनिक डिजिटल शिक्षण संसाधनों का लाभ मिलेगा और भविष्य की डिजिटल शिक्षा प्रणाली के लिए मजबूत आधार तैयार होगा।

फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने में उत्तराखण्ड आगे, 25 फिल्मों को ₹8.28 करोड़ अनुदान जारी

देहरादून, 20 फरवरी 2026। उत्तराखण्ड राज्य सरकार फिल्म उद्योग के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्राकृतिक सौंदर्य, सुरक्षित वातावरण, सरल प्रक्रियाएँ और फिल्म-फ्रेंडली नीति के कारण राज्य देश-विदेश के फिल्म निर्माताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनकर उभर रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड में फिल्म नीति-2024 को प्रभावी रूप से लागू किया गया है, जिसके अंतर्गत सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से फिल्म निर्माताओं को त्वरित अनुमति प्रदान की जा रही है। शूटिंग अनुमति प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है, जिससे निर्माताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि फिल्म नीति से पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार फीचर फिल्म, वेब सीरीज, डॉक्यूमेंट्री और शॉर्ट फिल्म निर्माण को भी सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रही है।

उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बंशीधर तिवारी ने बताया कि परिषद द्वारा वर्ष में दो बार अनुदान समिति की बैठक आयोजित की जाती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 25 फिल्मों को ₹8.28 करोड़ की अनुदान राशि जारी की गई। जुलाई 2025 में 12 फिल्मों तथा जनवरी 2026 में 13 फिल्मों को अनुदान स्वीकृत हुआ।

क्षेत्रीय सिनेमा को मिला बड़ा प्रोत्साहन:

फिल्म नीति-2024 के तहत इस वित्तीय वर्ष में 14 गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी फिल्मों को अनुदान जारी किया गया। इनमें “जोना”, “मीठी माँ कु आशीर्वाद”, “मेरे गांव की बाट”, “घपरोल”, “द्वी होला जब साथ”, “गढ़-कुमौं”, “संस्कार”, “मेरु गौ”, “धरती म्यर कुमाऊँ” सहित कई फिल्में शामिल हैं।

हिन्दी एवं अंग्रेजी फिल्मों को भी सहायता:

राज्य की फिल्म-फ्रेंडली नीति से आकर्षित होकर देश-विदेश के निर्माता उत्तराखण्ड में शूटिंग कर रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 11 हिन्दी/अंग्रेजी फिल्मों को भी अनुदान दिया गया है, जिनमें “विकी विद्या का वह वाला वीडियो”, “लाइफ हिल गई”, “Tanvi The Great”, “केसरी चैप्टर-2”, “Middle Class Love” सहित अन्य फिल्में शामिल हैं।

परिषद के अनुसार राज्य में फिल्म शूटिंग बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो रही है। सरकार का लक्ष्य उत्तराखण्ड को देश का प्रमुख फिल्म डेस्टिनेशन बनाना है, जिससे सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ आर्थिक विकास को भी गति मिल सके।