Sunday, February 8, 2026
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आवास एवं शहरी विकास विभाग में सुधारों पर केंद्र से 264.5 करोड़ की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाले गुड गवर्नेंस मॉडल को केंद्र सरकार ने फिर सराहा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा आवास एवं शहरी विकास विभाग में लागू किए गए विभिन्न सुधारों के लिए केंद्र सरकार ने राज्य को 264.5 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की है। मुख्यमंत्री धामी ने इस उपलब्धि के लिए केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह राशि राज्य में शहरी विकास को नई गति प्रदान करेगी।

केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय द्वारा राज्यों को शहरी एवं आवास क्षेत्र से जुड़े नीतिगत सुधार लागू करने के निर्देश दिए गए थे। इन्हीं सुधारों के सफल क्रियान्वयन के तहत मंत्रालय ने “स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इनवेस्टमेंट 2025–26” के अंतर्गत उत्तराखंड को यह प्रोत्साहन राशि प्रदान की है।

इस प्रोत्साहन राशि के अंतर्गत शहरी विकास विभाग को जीआईएस आधारित यूटिलिटी मैपिंग (सीवर, पेयजल एवं ड्रेनेज कार्य) के लिए 3 करोड़ रुपये, सरकारी भूमि एवं भवनों की मैपिंग हेतु 6.5 करोड़ रुपये, तथा नगर निकायों के स्तर पर आय के स्रोत बढ़ाने के लिए 10 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है।

आवास विभाग के प्रयासों को मिली बड़ी सफलता

केंद्र सरकार द्वारा सबसे अधिक प्रोत्साहन राशि आवास विभाग के अंतर्गत किए गए सुधारों के लिए स्वीकृत की गई है। अर्बन लैंड एंड प्लानिंग रिफॉर्म के तहत उत्तराखंड आवास विभाग द्वारा टाउन प्लानिंग स्कीम एवं लैंड पूलिंग स्कीम के नियम लागू किए गए, जिसके लिए 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई है। इसके अतिरिक्त पुराने शहरी क्षेत्रों के पुनरुद्धार कार्यक्रम के लिए 140 करोड़ रुपये तथा बिल्डिंग बायलॉज में ग्रीन बिल्डिंग मानकों के क्रियान्वयन हेतु 5 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है।

आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि आवास विभाग मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को किफायती आवास उपलब्ध कराने के साथ-साथ उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लक्ष्य के साथ निरंतर कार्य कर रहा है।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड सरकार केंद्र सरकार के सभी दिशा-निर्देशों को पूरी निष्ठा के साथ लागू कर रही है। इसी क्रम में आवास एवं शहरी विकास विभाग में किए गए सुधारों पर यह 264.5 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत हुई है। इससे पूर्व खनन क्षेत्र में किए गए सुधारों के लिए भी केंद्र सरकार से 200 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि प्राप्त हो चुकी है। इन उपलब्धियों के साथ उत्तराखंड देश के सामने गुड गवर्नेंस के एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर कर सामने आया है।

आधुनिक तकनीक के माध्यम से महिला सशक्तिकरण पर यूसैक में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

देहरादून |  उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) के सभागार में आज आधुनिक तकनीक के माध्यम से महिला सशक्तिकरण विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य महिलाओं को अंतरिक्ष तकनीक RS/GIS, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एवं ड्रोन तकनीक जैसी आधुनिक तकनीकों से जोड़कर उन्हें शैक्षणिक एवं व्यावसायिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती कुसुम कंडवाल, यूसैक के निदेशक एवं यौकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत, पूर्व निदेशक वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान डॉ. मीरा तिवारी, शिक्षाविद प्रो. रीमा पंत एवं वैज्ञानिक डॉ. पूनम गुप्ता द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया।

कार्यशाला में यूसैक की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरुण रानी ने स्वागत संबोधन प्रस्तुत करते हुए RS/GIS, AI एवं ड्रोन तकनीक के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार ये तकनीकें महिलाओं को रोजगार, नवाचार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर प्रदान कर रही हैं।

यूसैक के निदेशक एवं यौकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में आधुनिक तकनीक के माध्यम से महिलाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास, नवाचार और नेतृत्व के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, इंटरनेट, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया ने महिलाओं को नई पहचान और आत्मनिर्भरता प्रदान की है। AI आधारित प्लेटफॉर्म, मोबाइल हेल्थ ऐप्स, टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन परामर्श और सुरक्षा ऐप्स महिलाओं के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को सुदृढ़ कर रहे हैं।

मुख्य अतिथि कुसुम कंडवाल ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का तात्पर्य महिलाओं को निर्णय निर्माण, नेतृत्व और शासन के प्रत्येक स्तर पर समान अवसर, अधिकार और संसाधन उपलब्ध कराना है। प्रशासनिक सेवाओं एवं नेतृत्व में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से शासन की गुणवत्ता, संवेदनशीलता और प्रभावशीलता में वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल मंच महिलाओं के अधिकारों, समस्याओं और उपलब्धियों को मुखर रूप से सामने लाने का सशक्त माध्यम बन गए हैं।

कार्यशाला के अति विशिष्ट अतिथि, प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता दिलीप ताहिल ने कहा कि तकनीकी विकास ने फिल्म जगत में भी महिलाओं को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डिजिटल कैमरा, एडिटिंग सॉफ्टवेयर, वीएफएक्स और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने महिलाओं को निर्देशक, लेखक, सिनेमेटोग्राफर और निर्माता के रूप में नए अवसर प्रदान किए हैं। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने उनकी आवाज को वैश्विक पहचान दिलाई है।

विशिष्ट अतिथि वैज्ञानिक डॉ. पूनम गुप्ता ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षा, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म, डिजिटल क्लासरूम और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से महिलाओं तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच सरल हुई है। दूर-दराज क्षेत्रों की महिलाएं भी अब घर बैठे कौशल विकास और उच्च शिक्षा प्राप्त कर पा रही हैं।

शिक्षाविद प्रो. रीमा पंत ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म महिलाओं को अपनी आवाज उठाने, नेटवर्क बनाने और नेतृत्व में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रहे हैं। ई-गवर्नेंस और सोशल मीडिया के माध्यम से महिलाएं नीति निर्माण और सामाजिक परिवर्तन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि समान पहुंच, प्रशिक्षण और सुरक्षा सुनिश्चित होने पर तकनीक महिला सशक्तिकरण की सबसे बड़ी कुंजी बन सकती है।

कार्यशाला में डीएवी पीजी कॉलेज की एनसीसी छात्राएं, महिला प्रौद्योगिकी संस्थान, देहरादून की छात्राएं, यूसैक के वैज्ञानिक, शोधार्थी एवं कार्मिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नीलम रावत द्वारा प्रस्तुत किया गया।

इस अवसर पर डीएवी पीजी कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर लेफ्टिनेंट डॉ. अर्चना पाल, महिला प्रौद्योगिकी संस्थान की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अंशुल, यूसैक के वैज्ञानिक प्रियदर्शी उपाध्याय, डॉ. आशा थपलियाल, डॉ. गजेन्द्र सिंह, शशांक लिंगवाल, पुष्कर सिंह, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी आर.एस. मेहता, जनसंपर्क अधिकारी सुधाकर भट्ट, देवेश कपरवान, सौरभ डंगवाल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सुशासन का सशक्त मॉडल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान राज्य में सुशासन, पारदर्शिता और त्वरित सेवा वितरण का एक प्रभावी एवं जन-केंद्रित मॉडल बनकर उभरा है। इस अभिनव पहल के माध्यम से सरकार स्वयं जनता के द्वार तक पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कर रही है, जिससे प्रशासन और आमजन के बीच विश्वास और संवाद की नई परंपरा स्थापित हुई है।

अभियान के अंतर्गत प्रदेश के सभी जनपदों में नियमित रूप से जनसेवा शिविरों (कैंपों) का आयोजन किया जा रहा है। इन शिविरों के माध्यम से नागरिकों को प्रशासनिक सेवाएं, शिकायत निवारण, विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र तथा केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है।

अभियान की प्रगति एवं उपलब्धियाँ:

अब तक प्रदेश भर में कुल 589 जनसेवा कैंप आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें से 08 कैंप 07 फरवरी 2026 को आयोजित किए गए। इन कैंपों में कुल 4,63,956 नागरिकों ने सहभागिता की, जबकि 07 फरवरी को आयोजित कैंपों में 4,237 नागरिकों ने भाग लिया।

अभियान के तहत नागरिकों से प्राप्त शिकायतों एवं प्रार्थना पत्रों के निस्तारण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। अब तक कुल 45,601 शिकायत/प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 30,723 मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया जा चुका है। यह आंकड़े सरकार की संवेदनशीलता, तत्परता और जवाबदेही को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

प्रमाण पत्र एवं योजनाओं का लाभ:

“जन-जन के द्वार” अभियान के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्रों हेतु भी आवेदन प्राप्त किए जा रहे हैं। अब तक कुल 65,528 प्रमाण पत्रों के लिए आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिससे नागरिकों को कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं।

साथ ही, केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से अब तक 2,58,056 नागरिकों को लाभान्वित किया जा चुका है। इससे समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना सुनिश्चित हुआ है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान इसी सोच का प्रत्यक्ष उदाहरण है, जिसमें प्रशासन स्वयं जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं का समाधान कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान प्रदेश में लोक विश्वास को सुदृढ़ करने, भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाने और सेवाओं की सरल एवं सुगम पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।

सुशासन की ओर सशक्त कदम:

“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान ने यह सिद्ध कर दिया है कि उत्तराखंड सरकार संवाद, सेवा और समाधान के मूल मंत्र के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यह अभियान प्रदेश को सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और जनहितकारी नीतियों की दिशा में निरंतर आगे बढ़ा रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर फिल्म ‘गोदान’ को उत्तराखंड में टैक्स फ्री, शासनादेश जारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर किसान परंपरा, ग्रामीण जीवन और गोवंश के महत्व पर आधारित फिल्म ‘गोदान’ को उत्तराखंड राज्य में टैक्स फ्री कर दिया गया है। इस संबंध में शासन द्वारा औपचारिक शासनादेश जारी कर दिया गया है, जिसके साथ ही यह निर्णय प्रदेशभर में तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

फिल्म ‘गोदान’ 06 फरवरी को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। यह फिल्म भारतीय संस्कृति, ग्रामीण परिवेश और किसान जीवन की संवेदनशील झलक प्रस्तुत करती है तथा समाज को अपनी परंपराओं, मूल्यों और सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का सशक्त संदेश देती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि गाय केवल धर्म और आस्था का विषय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सामाजिक ताने-बाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की फिल्में समाज में सकारात्मक सोच, संवेदनशीलता और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा देती हैं, इसलिए ऐसे रचनात्मक प्रयासों को प्रोत्साहन दिया जाना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार गोवंश संरक्षण की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में गोसदनों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे निराश्रित एवं बेसहारा गोवंश की समुचित देखभाल सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही गोपालकों और पशुपालकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित किया जा रहा है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तराखंड सरकार सामाजिक, सांस्कृतिक एवं जनहित से जुड़े विषयों पर आधारित फिल्मों और रचनात्मक प्रयासों को भविष्य में भी निरंतर प्रोत्साहन देती रहेगी, ताकि संस्कृति, परंपरा और समाज के मूल्यों को सशक्त बनाया जा सके।

विंटर कार्निवाल में मुख्यमंत्री धामी का संदेश: युवा नेतृत्व ही प्रदेश और देश का भविष्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को हेमवंती नंदन बहुगुणा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खटीमा में छात्र संघ द्वारा आयोजित विंटर कार्निवाल में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर विंटर कार्निवाल का विधिवत शुभारंभ किया तथा छात्र संघ के सभी नवनिर्वाचित सदस्यों को उनके सफल कार्यकाल के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्र संघ द्वारा पहली बार विंटर कार्निवाल के अंतर्गत भजन क्लंबिंग जैसे आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन की शुरुआत की गई है, जो सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन केवल कार्यक्रम नहीं होते, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति, लोक परंपराओं और युवा चेतना के संगम का प्रतीक होते हैं। भजन क्लंबिंग जैसे आयोजन यह सिद्ध करते हैं कि आज का युवा आधुनिकता के साथ-साथ अपनी जड़ों से भी मजबूती से जुड़ा हुआ है। संगीत, भक्ति और संस्कृति के माध्यम से युवाओं को सकारात्मक दिशा देना, इस पहल की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

मुख्यमंत्री ने छात्र संघ की पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि इस आयोजन के माध्यम से छात्र-छात्राओं ने नेतृत्व क्षमता, संगठन शक्ति और सामाजिक दायित्व का परिचय दिया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिन विद्यार्थियों ने आज इस कार्यक्रम का संचालन किया है, वही भविष्य में राज्य और देश का नेतृत्व करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खटीमा मेरे लिए केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि मेरा घर, मेरी कर्मभूमि और मेरी पहचान है। खटीमा की मिट्टी ने उन्हें जनसेवा का संस्कार दिया है और यहां की हर गली व हर गांव उनके हृदय के अत्यंत निकट है। उन्होंने कहा कि सरकार ने खटीमा में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए निरंतर ठोस कदम उठाए हैं। गदरपुर-खटीमा बाईपास, नौसर में पुल निर्माण और सड़कों के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से कनेक्टिविटी को सुदृढ़ किया गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि खटीमा में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना, चकरपुर में राष्ट्रीय स्तर के आधुनिक खेल स्टेडियम का निर्माण, आधुनिक आईटीआई एवं पॉलीटेक्निक कॉलेज, 100 बेड का नया अस्पताल परिसर, विद्यार्थियों के लिए “साथी केंद्र” और औद्योगिक विकास के लिए सिडकुल की स्थापना की गई है। इसके साथ ही खटीमा-टनकपुर के बीच भव्य सैन्य स्मारक निर्माण, पंतनगर में अंतरराष्ट्रीय स्तर के हवाई अड्डे, जमरानी बांध बहुउद्देशीय परियोजना, एम्स सैटेलाइट सेंटर और खुरपिया में इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटी जैसी योजनाओं पर कार्य प्रगति पर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड आज रोजगार सृजन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है। प्रदेश की प्रतिव्यक्ति आय में 17 गुना वृद्धि, सड़कों के नेटवर्क में दोगुना विस्तार और बिजली उत्पादन में चार गुना बढ़ोतरी इसका प्रमाण है। हाल ही में पलायन निवारण आयोग की रिपोर्ट में 44 प्रतिशत रिवर्स पलायन दर्ज होना इस बात का संकेत है कि युवा फिर से अपने गांवों की ओर लौट रहे हैं। प्रदेश की बेरोजगारी दर में 4.4 प्रतिशत की रिकॉर्ड कमी आई है, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की संस्कृति, अस्मिता और कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं होगा। दंगारोधी, धर्मांतरण विरोधी कानूनों, लैंड जिहाद के खिलाफ कार्रवाई, अवैध मदरसों पर कार्रवाई, ऑपरेशन कालनेमि और समान नागरिक संहिता जैसे निर्णय नए उत्तराखंड के संकल्प को दर्शाते हैं। सख्त नकल विरोधी कानून के चलते 28 हजार से अधिक युवाओं को योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी मिली है और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत 200 से अधिक भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार देवभूमि उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के अपने “विकल्प रहित संकल्प” को पूरा करने के लिए निरंतर प्रयासरत है और खटीमा के लोगों का स्नेह व सहयोग इस संकल्प को और मजबूत करता रहेगा।

वहीं इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने खटीमा में पूर्व जिला पंचायत सदस्य स्व. राम सिंह जेठी की पत्नी के निधन, स्व. ढील्लू सिंह राणा एवं स्व. जशोधर भट्ट के निधन पर उनके आवास पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त की।

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, मेयर दीपक बाली, नगर पालिका अध्यक्ष रमेश चंद्र जोशी, दर्जा मंत्री अनिल कपूर डब्बू, जिलाध्यक्ष कमल जिंदल, पूर्व मंडी अध्यक्ष नंदन सिंह खड़ायत, अमित पांडे, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा, पुलिस अधीक्षक निहारिका तोमर, अपर जिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्रा, उप जिलाधिकारी तुषार सैनी, सीओ बीएस धोनी सहित छात्र संघ के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

भारत माता मंदिर में स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की समाधि मंदिर मूर्ति स्थापना समारोह का भव्य समापन

हरिद्वार | 06 फरवरी, 2026 हरिद्वार के सप्तऋषि क्षेत्र स्थित भारत माता मंदिर परिसर में ब्रह्मलीन परम पूज्य गुरुदेव स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की समाधि मंदिर मूर्ति स्थापना के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय भव्य समारोह का शुक्रवार को विधिवत समापन हुआ। समापन अवसर पर समाधि मंदिर एवं प्रतिमा का विधिवत अनावरण किया गया।

इस अवसर पर केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक तथा जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज सहित अनेक संत-महात्मा एवं गणमान्य अतिथियों ने गुरुदेव स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज के समाधि स्थल पर पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित किए।

तीन दिवसीय इस आयोजन में देशभर से संत-महात्मा, धर्मगुरु, सामाजिक कार्यकर्ता एवं राजनीतिक नेतृत्व उपस्थित रहा। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्र चेतना, सनातन संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा एवं मानव सेवा जैसे विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मां गंगा के तट पर इस पावन अवसर में सम्मिलित होना उनके लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हैं, किंतु उनके विचार, साधना और जीवन दर्शन आज भी समाज का मार्गदर्शन कर रहे हैं। प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा उनके मूल्यों और आदर्शों को पुनः जागृत करने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की रक्षा केवल सीमाओं की सुरक्षा नहीं, बल्कि संस्कृति और मूल्यों की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवभूमि उत्तराखंड में सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज ने आध्यात्मिक साधना को समाज सेवा से जोड़कर एक विशिष्ट जीवन दर्शन प्रस्तुत किया। भारत माता मंदिर राष्ट्र प्रेम और सांस्कृतिक गौरव का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सनातन संस्कृति को वैश्विक पहचान मिल रही है और उत्तराखंड विकास व विरासत के संतुलन के साथ आगे बढ़ रहा है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी सनातन परंपरा के सशक्त ध्वजवाहक थे। उन्होंने भारत माता मंदिर को राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह मंदिर संपूर्ण भारत को एक सूत्र में बांधने का कार्य करता है।

हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि भारत माता मंदिर की स्थापना एक दूरदर्शी राष्ट्र मंदिर की अवधारणा के साथ की गई थी, जिसे आज और अधिक सशक्त रूप दिया जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी राष्ट्र, धर्म और मानव चेतना के अमर पथप्रदर्शक थे।

भारत सरकार के ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि संत समाज से उन्हें सदैव प्रेरणा और मार्गदर्शन मिलता रहा है और इस आयोजन में सम्मिलित होना उनके लिए सौभाग्य की बात है।

कार्यक्रम में जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज, कार्ष्णि पीठाधीश्वर स्वामी गुरु शरणानंद जी महाराज, उप मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश बृजेश पाठक, हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, विधायक प्रेमचंद अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

उत्तराखंड में पर्वतारोहण को नई उड़ान 83 प्रमुख हिमालयी चोटियां पर्वतारोहियों के लिए खुलीं

देवभूमि उत्तराखंड ने साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पर्वतारोहण को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (UTDB) ने वन विभाग के समन्वय से गढ़वाल और कुमाऊं हिमालय क्षेत्र की 83 प्रमुख पर्वत चोटियों को पर्वतारोहण अभियानों के लिए पूरी तरह खोल दिया है। यह निर्णय उत्तराखंड को वैश्विक पर्वतारोहण मानचित्र पर एक सशक्त और आकर्षक गंतव्य के रूप में स्थापित करेगा।

खोली गई चोटियों की ऊंचाई 5,700 मीटर से 7,756 मीटर तक है। इनमें कामेट (7,756 मीटर), नंदा देवी ईस्ट, चौखंबा समूह, त्रिशूल समूह, शिवलिंग, सतोपंथ, चंगाबांग, पंचचूली और नीलकंठ जैसी विश्व प्रसिद्ध एवं चुनौतीपूर्ण चोटियां शामिल हैं। ये शिखर न केवल तकनीकी कठिनाई और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध हैं, बल्कि हिमालय की भव्यता के जीवंत प्रतीक भी माने जाते हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हिमालय हमारी पहचान, हमारी विरासत और हमारी शक्ति है। 83 प्रमुख पर्वत चोटियों को पर्वतारोहण के लिए खोलना राज्य के साहसिक पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। हमारा उद्देश्य है कि देश के युवा पर्वतारोहण जैसे साहसिक क्षेत्रों में आगे आएं, स्थानीय लोगों को रोजगार मिले और पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलित विकास सुनिश्चित हो। राज्य सरकार सुरक्षित, जिम्मेदार और सतत पर्वतारोहण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारतीय युवाओं को पर्वतारोहण के लिए प्रोत्साहित करना, साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देना और सीमावर्ती व दूर-दराज क्षेत्रों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करना है।

भारतीय पर्वतारोहियों को बड़ी राहत:

अधिसूचित 83 चोटियों पर अब भारतीय पर्वतारोहियों को किसी भी प्रकार का अभियान शुल्क—जैसे पीक फीस, कैंपिंग फीस या पर्यावरण शुल्क—नहीं देना होगा। पहले यह शुल्क भारतीय पर्वतारोहण संस्था (IMF) और वन विभाग द्वारा लिया जाता था, लेकिन अब राज्य सरकार स्वयं इसका वहन करेगी। इससे आर्थिक कारणों से पीछे रह जाने वाले युवाओं को बड़ा अवसर मिलेगा।

विदेशी पर्वतारोहियों के लिए सरल व्यवस्था:

विदेशी पर्वतारोहियों पर पहले लगने वाले राज्य स्तरीय अतिरिक्त शुल्क को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। अब उन्हें केवल IMF द्वारा निर्धारित शुल्क ही देना होगा। इससे उत्तराखंड की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपील बढ़ेगी और विदेशी अभियानों की संख्या में वृद्धि होगी।

ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया:

सभी पर्वतारोहण अभियानों के लिए आवेदन अब उत्तराखंड माउंटेनियरिंग परमिशन सिस्टम (UKMPS) के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किए जाएंगे। यह प्रणाली पारदर्शी, तेज और पूरी तरह डिजिटल है, जिससे अनुमति प्रक्रिया में देरी नहीं होगी।

स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा:

इस फैसले से सीमावर्ती गांवों में पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी। स्थानीय लोगों को गाइड, पोर्टर, होमस्टे, परिवहन और अन्य सेवाओं के माध्यम से रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। यह पहल पलायन रोकने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी सहायक सिद्ध होगी।

सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण पर सख्ती:

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी अभियानों में सुरक्षा मानकों और पर्यावरणीय नियमों का सख्ती से पालन अनिवार्य होगा। पर्वतारोहियों को “लीव नो ट्रेस” सिद्धांत अपनाना होगा और हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी की रक्षा सुनिश्चित करनी होगी।

उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने देश-विदेश के सभी पर्वतारोहियों का इन अद्भुत हिमालयी शिखरों पर स्वागत करते हुए कहा है कि यह पहल देवभूमि उत्तराखंड की साहसिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला मील का पत्थर साबित होगी।

गौरतलब है कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026–27 में पहाड़ी राज्यों के पर्यटन को नई ऊंचाई देने की महत्वपूर्ण घोषणा की है। बजट में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में पर्यावरण-अनुकूल (इको-फ्रेंडली) माउंटेन ट्रेल्स विकसित करने का ऐलान किया गया है। यह कदम भारत को विश्व स्तरीय ट्रेकिंग और हाइकिंग गंतव्य बनाने की दिशा में बड़ा प्रयास है, जिससे साहसिक पर्यटन को बढ़ावा और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन होगा

मुख्यमंत्री धामी ने फिल्म “जलमभूमि” के पोस्टर का किया विमोचन, फिल्म टीम को दी शुभकामनाएं

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास में फिल्म “जलमभूमि” के पोस्टर का विधिवत विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने फिल्म के निर्माता-निर्देशक के. राम नेगी एवं पूरी फिल्म टीम को शुभकामनाएं और बधाई दीं। उल्लेखनीय है कि यह फिल्म 6 फरवरी को रिलीज होने जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “जलमभूमि” जैसी फिल्में समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती हैं और सिनेमा के माध्यम से सामाजिक सरोकारों को मजबूती मिलती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक सौंदर्य, विविध भौगोलिक परिस्थितियों, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और शांत वातावरण के कारण फिल्म निर्माण के लिए एक आदर्श राज्य के रूप में उभर रहा है।

मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि राज्य सरकार फिल्म उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उत्तराखंड में फिल्म नीति को प्रभावी रूप से लागू किया गया है, जिसके तहत फिल्म निर्माताओं को सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से त्वरित अनुमति प्रदान की जा रही है। शूटिंग अनुमति प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है, ताकि फिल्म निर्माताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा फिल्म शूटिंग पर सब्सिडी, स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और युवाओं को रोजगार के अवसर, तथा स्थानीय संसाधनों के अधिकतम उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के माध्यम से राज्य को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फिल्म मानचित्र पर स्थापित करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि फिल्म नीति का उद्देश्य केवल फिल्मों की शूटिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती मिल रही है। उत्तराखंड में वेब सीरीज, डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिल्म और फीचर फिल्मों के निर्माण को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने फिल्म की सफलता की कामना करते हुए कहा कि राज्य सरकार भविष्य में भी सिनेमा और रचनात्मक उद्योगों को हरसंभव सहयोग देती रहेगी।

इस अवसर पर विधायक दुर्गेश लाल भी उपस्थित रहे।

सीएम धामी के सख्त निर्देश: कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उत्तराखंड में कानून व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यशैली और जनसेवा को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य में शांति, सुरक्षा और सुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए सभी विभागों को पूरी जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करना होगा।

आज सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अखिल भारतीय डीजी/आईजी सम्मेलन से प्राप्त निष्कर्षों की समीक्षा करते हुए राज्य की कानून व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था, पर्यटन प्रबंधन, राजस्व, नशा मुक्ति, अभियोजन, कारागार सुधार एवं जनशिकायत निवारण से जुड़े विषयों पर गहन समीक्षा की। बैठक में मुख्य सचिव सहित सभी जिलों के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तथा पुलिस एवं प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पुलिस का वर्क कल्चर सुधारा जाए और आम आदमी को किसी भी तरह से परेशान न किया जाए। थानों और चौकियों स्तर पर मानवीय, संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए। निर्दोष नागरिकों को अनावश्यक रूप से परेशान करने की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा।

दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे के खुलने के बाद राज्य में पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि की संभावना को देखते हुए मुख्यमंत्री ने सरकार को पूरी तरह अलर्ट रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि होटल, आवास, पार्किंग, ट्रैफिक प्लान, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा से जुड़ी सभी तैयारियाँ समयबद्ध रूप से पूरी की जाएँ, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो। मुख्यमंत्री ने बताया कि कैंची धाम बाईपास का कार्य जून माह तक पूरा कर लिया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बड़ी राहत मिलेगी।

लैंड फ्रॉड के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि भूमि से जुड़े अपराधों पर कठोर कानून बनाया जाएगा और दोषियों को किसी भी सूरत में राहत नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अवैध निर्माण और अतिक्रमण को संरक्षण देने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अपराध नियंत्रण को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस की रात्रि गश्त को और अधिक सघन किया जाए तथा निरंतर पेट्रोलिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि अपराधियों पर शिकंजा कसा जा सके। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि आपराधिक मामलों की विवेचना अनावश्यक रूप से लंबित न रखी जाए।

नशा मुक्ति अभियान को जन आंदोलन बनाने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जनपद से मासिक नशा मुक्ति रिपोर्ट सीधे शासन को भेजी जाए। इसकी नियमित समीक्षा गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक द्वारा की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने अभियोजन व्यवस्था पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अभियोजन किसी भी स्तर पर कमजोर नहीं होना चाहिए। अभियोजन अधिकारियों का परफॉर्मेंस ऑडिट कराया जाए, ताकि दोषियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया मजबूत हो।

जनशिकायत निवारण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री ने 1905 हेल्पलाइन पर जीरो पेंडेंसी का लक्ष्य निर्धारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाओं का 100 प्रतिशत क्रियान्वयन जिलों में अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। योजनाएँ केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए।

डिजिटल गवर्नेंस को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसे केवल औपचारिकता न मानते हुए पूरी गंभीरता के साथ लागू किया जाए। साथ ही, उन्होंने अगले छह माह में विशेष अभियान चलाकर प्रत्येक जनपद के गांवों को 100 प्रतिशत योजनाओं से संतृप्त करने के निर्देश दिए।

चारधाम यात्रा की तैयारियों के संबंध में मुख्यमंत्री ने संबंधित जनपदों में संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। वहीं, लोक निर्माण विभाग को सड़कों के डामरीकरण का कार्य 15 फरवरी तक प्रारंभ करने और गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न करने के सख्त निर्देश दिए गए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आदमपुर हवाई अड्डे को गुरु रविदास महाराज के नाम समर्पित करना सामाजिक समरसता की दिशा में ऐतिहासिक कदम: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आदमपुर हवाई अड्डे का नाम संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज के नाम पर समर्पित किया जाना, उनके महान विचारों, सामाजिक चेतना और मानवता के प्रति समर्पण को सच्ची श्रद्धांजलि है। संत रविदास जी की जयंती के पावन अवसर पर लिया गया यह निर्णय न केवल अत्यंत सराहनीय है, बल्कि सामाजिक समरसता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम भी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संत रविदास जी ने अपने जीवन और विचारों के माध्यम से समानता, करुणा, सेवा और मानव मात्र के सम्मान का जो संदेश दिया, वह आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने भेदभाव, ऊँच-नीच और असमानता के विरुद्ध आवाज़ उठाकर एक समतामूलक समाज की परिकल्पना प्रस्तुत की, जो आज के समय में भी पूरी तरह प्रासंगिक है।

धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में महापुरुषों और संतों के विचारों को सम्मान देने की परंपरा निरंतर सशक्त हो रही है। आदमपुर हवाई अड्डे को संत गुरु रविदास महाराज के नाम से जोड़ना, उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने और नई पीढ़ी को उनके विचारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय गौरव को और अधिक मजबूत करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि संत रविदास जी के आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज समरसता, सद्भाव और सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ेगा।