Friday, October 16, 2026
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भारत-कनाडा संबंधों को मजबूत करने पर जोर, पीएम मोदी और एस. जयशंकर से मिलीं कनाडाई विदेश मंत्री अनीता आनंद

नई दिल्ली: भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, रक्षा, सुरक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।

2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य

बैठक में भारत और कनाडा के बीच आर्थिक सहयोग को नई गति देने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को लेकर चल रही वार्ताओं को जल्द पूरा करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य भी चर्चा के केंद्र में रहा।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय व्यापार 23.66 अरब अमेरिकी डॉलर रहा था। दोनों देश व्यापारिक संबंधों के विस्तार के साथ निवेश और आर्थिक सहयोग की संभावनाओं को भी आगे बढ़ाना चाहते हैं।

‘टीम कनाडा ट्रेड मिशन’ के साथ बढ़ेगा आर्थिक सहयोग

कनाडाई विदेश मंत्री अनीता आनंद की भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू के नेतृत्व में ‘टीम कनाडा ट्रेड मिशन’ भी भारत में सक्रिय है। इस पहल का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक संपर्कों और कारोबारी सहयोग को बढ़ावा देना है।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच भी द्विपक्षीय संबंधों को लेकर बातचीत हो चुकी है। इन उच्चस्तरीय संपर्कों को दोनों देशों के बीच सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों को आगे बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

दिसंबर 2026 में कनाडा जा सकते हैं पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिसंबर 2026 में कनाडा दौरे पर जाने की संभावना जताई गई है। प्रस्तावित यात्रा को भारत-कनाडा संबंधों को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, दोनों देशों के बीच हालिया बैठकों और व्यापारिक संपर्कों का मुख्य उद्देश्य आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना, व्यापार बढ़ाना और रक्षा, तकनीक, ऊर्जा तथा शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग की नई संभावनाएं तलाशना है।

हिमालयी आपदाओं से निपटने में AI की होगी अहम भूमिका, सतत विकास में स्थानीय समुदायों की भागीदारी जरूरी: मुख्य सचिव

देहरादून, 15 अक्टूबर 2026: उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने गुरुवार को दून विश्वविद्यालय में “बदलती जलवायु में हिमालय: आपदाएं, सतत विकास एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ती चुनौतियों से निपटने, आपदाओं का आकलन करने और जोखिम कम करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मुख्य सचिव ने जोर दिया कि आधुनिक तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल के साथ सतत विकास की योजनाओं में स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

आपदा प्रबंधन और पूर्वानुमान में तकनीक का इस्तेमाल जरूरी

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र अपनी भौगोलिक परिस्थितियों और संवेदनशीलता के कारण कई तरह की चुनौतियों का सामना करता है। ऐसे में आपदाओं का आकलन करने, उनके संभावित प्रभावों का पूर्वानुमान लगाने और प्रभावी योजनाएं तैयार करने के लिए नवीन तकनीकों का उपयोग किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित समाधान स्थानीय जरूरतों और परिस्थितियों के अनुरूप विकसित किए जाने चाहिए, ताकि उनका लाभ आम लोगों तक पहुंच सके और आपदा जोखिम को कम करने में मदद मिले।

‘स्मॉल AI’ से कम संसाधनों में विकसित होंगे प्रभावी समाधान

संगोष्ठी में दक्षिण कैरोलिना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर तथा आईएआईआरओ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं संस्थापक निदेशक प्रो. अमित शेठ ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की उभरती तकनीक ‘स्मॉल AI’ की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि कम संसाधनों में सुलभ और प्रभावी तकनीकी समाधान विकसित करके भारत की विशिष्ट विकास संबंधी जरूरतों को पूरा किया जा सकता है। हिमालयी क्षेत्रों में लगातार सामने आने वाली आपदाओं से निपटने और उनके प्रभाव को कम करने में भी इन तकनीकों का उपयोग महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

अनुसंधान को बढ़ावा देने पर दिया जोर

अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) के संयुक्त सचिव डॉ. निशांत वर्मा ने दून विश्वविद्यालय में विकसित हो रहे शोध और अनुसंधान के वातावरण की सराहना की। उन्होंने देश में अनुसंधान गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा शोध के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने में एएनआरएफ की भूमिका पर जानकारी दी।

वहीं, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और शोध संबंधी उपलब्धियों को साझा किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों और शोधार्थियों के निरंतर प्रयासों से विश्वविद्यालय में अनुसंधान गतिविधियों को मजबूत किया जा रहा है।

जलवायु परिवर्तन और हिमालयी चुनौतियों पर होगा मंथन

दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में जलवायु परिवर्तन से हिमालयी क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले खतरों, आपदा आकलन, जोखिम न्यूनीकरण, सतत विकास और शोध एवं निर्णय प्रक्रिया में AI के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ चर्चा करेंगे।

संगोष्ठी में दिल्ली विश्वविद्यालय, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की सहित देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों और दून विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के संयोजक एवं भूविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. विपिन कुमार सहित अन्य लोग भी उपस्थित रहे।

इस संगोष्ठी का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्रों की विशिष्ट चुनौतियों के समाधान के लिए वैज्ञानिक शोध, आधुनिक तकनीक और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विचार-विमर्श करना है।

अंकिता भंडारी हत्याकांड: उत्तराखंड पुलिस ने 24 घंटे में गिरफ्तार किए थे तीनों आरोपी, 88 दिन में दाखिल किया आरोपपत्र

देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच और न्यायिक कार्रवाई को लेकर अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) डॉ. वी. मुरुगेशन ने गुरुवार को पुलिस मुख्यालय, देहरादून में आयोजित प्रेस वार्ता में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में ऋषिकेश के निकट वनंतरा रिजॉर्ट में हुई इस घटना के बाद उत्तराखंड पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 24 घंटे के भीतर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित हुई थी एसआईटी

डॉ. मुरुगेशन के अनुसार, मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था। जांच की जिम्मेदारी डीआईजी स्तर की महिला आईपीएस अधिकारी को सौंपी गई, ताकि मामले की निष्पक्ष और प्रभावी जांच सुनिश्चित की जा सके।

88 दिन में दाखिल किया गया आरोपपत्र

एडीजी ने बताया कि एसआईटी ने जांच के दौरान डिजिटल, तकनीकी, फॉरेंसिक और भौतिक साक्ष्य जुटाए। इसके साथ ही आरोपियों से पूछताछ की गई तथा गवाहों के बयानों और फॉरेंसिक रिपोर्टों का गहन विश्लेषण किया गया।

उन्होंने बताया कि एसआईटी ने 88 दिनों में जांच पूरी कर करीब 500 पृष्ठों का विस्तृत आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। पुलिस के अनुसार, जांच में उपलब्ध साक्ष्यों को व्यवस्थित रूप से संकलित कर अभियोजन की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।

तीनों दोषियों को सुनाई गई आजीवन कठोर कारावास की सजा

डॉ. मुरुगेशन ने बताया कि मामले में त्वरित सुनवाई और प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के लिए उत्तराखंड शासन की ओर से आवश्यक प्रयास किए गए। अभियोजन पक्ष की पैरवी और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर 30 मई 2025 को कोटद्वार स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने तीनों आरोपियों पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई।

पुलिस के अनुसार, तीनों दोषी वर्तमान में जेल में बंद हैं और सजा काट रहे हैं।

अंकिता भंडारी हत्याकांड ने पूरे उत्तराखंड को झकझोरा

सितंबर 2022 में 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या के मामले ने पूरे उत्तराखंड में व्यापक आक्रोश पैदा किया था। घटना के बाद न्याय की मांग को लेकर प्रदेशभर में विरोध-प्रदर्शन हुए थे। यह मामला आज भी राज्य में महिला सुरक्षा, निष्पक्ष जांच और न्यायिक जवाबदेही से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में चर्चा में रहता है।

पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में एडीजी ने जांच से लेकर न्यायालय में दोषसिद्धि तक की कार्रवाई का विवरण साझा करते हुए मामले में पुलिस की कार्रवाई और अभियोजन प्रक्रिया की जानकारी दी।

अंकिता भंडारी हत्याकांड: राहुल गांधी ने राष्ट्रपति मुर्मू को लिखा पत्र, दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर पुनर्विचार की मांग

नई दिल्ली: उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर राजनीतिक सरगर्मी के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर सवाल उठाते हुए सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।

दुष्यंत गौतम के पदभार ग्रहण पर रोक लगाने की मांग

राहुल गांधी ने अपने पत्र में कहा है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़ी जांच और न्याय की प्रक्रिया पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को राज्यपाल का पदभार ग्रहण करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने राष्ट्रपति से इस मामले में हस्तक्षेप करने और सरकार को नियुक्ति पर पुनर्विचार करने की सलाह देने का अनुरोध किया है।

यह मांग ऐसे समय में सामने आई है, जब अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर उत्तराखंड समेत अन्य स्थानों पर भी आवाज उठ रही है।

अंकिता के माता-पिता से मिले राहुल और प्रियंका गांधी

इससे पहले राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने दिल्ली में इंडिया गेट के पास अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने परिवार को न्याय की लड़ाई में हरसंभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया।

अंकिता के परिवार और प्रदर्शनकारियों की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच, सीबीआई जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जाती रही है।

सितंबर 2022 में हुई थी अंकिता भंडारी की हत्या

19 वर्षीय अंकिता भंडारी की सितंबर 2022 में उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित वनंत्रा रिसॉर्ट में हत्या कर दी गई थी। इस मामले ने पूरे प्रदेश में व्यापक आक्रोश पैदा किया था और लंबे समय तक विरोध-प्रदर्शन हुए थे।

मामले को लेकर अब एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। राहुल गांधी के राष्ट्रपति को लिखे पत्र के बाद दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति और अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर विवाद फिर चर्चा में आ गया है।

देश में पहले भी 8 बार हो चुका है SIR, विपक्ष के विरोध पर भूपेंद्र यादव का करारा पलटवार

नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश में जारी राजनीतिक बहस के बीच केंद्रीय पर्यावरण मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। ‘पंचायत आजतक राजस्थान’ कार्यक्रम में शामिल हुए भूपेंद्र यादव ने कहा कि देश में SIR की प्रक्रिया पहली बार नहीं हो रही है, बल्कि इससे पहले भी आठ बार यह प्रक्रिया अपनाई जा चुकी है।

भूपेंद्र यादव ने SIR को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों और विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस प्रक्रिया को लेकर भ्रम फैलाने के बजाय इसके ऐतिहासिक संदर्भ को समझना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पहले भी कई बार हो चुकी है।

SIR को लेकर सियासत तेज

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। विपक्ष इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं बीजेपी की ओर से इसका बचाव किया जा रहा है।

भूपेंद्र यादव के बयान को SIR पर विपक्ष के विरोध के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। उनके मुताबिक, यह कोई नई प्रक्रिया नहीं है और देश में पहले भी आठ बार इसे अपनाया जा चुका है।

SIR को लेकर जारी इस राजनीतिक बहस के बीच अब यह मुद्दा चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची की पारदर्शिता और राजनीतिक दलों के आरोपों के केंद्र में बना हुआ है।

राहुल गांधी के आचरण पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, CJI सूर्यकांत बोले- न्यायपालिका को कोई डरा-धमका नहीं सकता

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 12 अक्टूबर को हुए मार्च और अदालत परिसर में कथित हंगामे से जुड़े मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आचरण पर कड़ी नाराजगी जताई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि न्यायपालिका को कोई भी डरा-धमका नहीं सकता। अदालत ने राहुल गांधी के वकील कपिल सिब्बल से उनके आचरण को लेकर स्पष्टीकरण देने को भी कहा।

राहुल गांधी से मांगा गया स्पष्टीकरण

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कपिल सिब्बल से 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट परिसर में भीड़ के साथ प्रवेश करने और उस दौरान हुए घटनाक्रम को लेकर राहुल गांधी का पक्ष स्पष्ट करने को कहा। अदालत ने संकेत दिया कि कुछ याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं पर विचार करने का सवाल फिलहाल अनंतिम है और इस पर आगे का निर्णय संबंधित स्पष्टीकरण पर निर्भर कर सकता है।

SIR प्रक्रिया और कथित वोट चोरी का मामला

यह मामला मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) प्रक्रिया के खिलाफ विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों से जुड़ा है। विपक्षी दलों और असदुद्दीन ओवैसी की ओर से दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किए हैं।

विपक्ष की ओर से मतदाता सूची की प्रक्रिया और कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का जवाब और अदालत की आगे की कार्यवाही मामले की दिशा तय करेगी।

CJI से मुलाकात की मांग पर भी हुआ था विवाद

जानकारी के मुताबिक, 12 अक्टूबर को राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग तथा कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर चर्चा के लिए CJI सूर्यकांत से मुलाकात का समय मांगा था।

बताया जा रहा है कि मुख्य न्यायाधीश ने न्यायिक मर्यादा और शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का हवाला देते हुए प्रशासनिक स्तर पर मुलाकात से इनकार किया था। उन्होंने संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी थी।

आगे की सुनवाई पर टिकी नजरें

इस घटनाक्रम के बाद सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई और राहुल गांधी की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण पर नजरें टिकी हैं। अदालत की टिप्पणियों और आगे होने वाली कार्यवाही से यह स्पष्ट होगा कि याचिकाओं पर सुनवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है।

CJP के विरोध में उतरे रणवीर शौरी, जान से मारने की मिली धमकी

मुंबई।। बॉलीवुड अभिनेता रणवीर शौरी को ‘सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) के विरोध प्रदर्शन और राजनीति से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखने के बाद ईमेल के जरिए जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। अभिनेता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर धमकी भरे ईमेल के स्क्रीनशॉट साझा करते हुए मदद की गुहार लगाई।

दो अलग-अलग ईमेल अकाउंट से भेजे गए धमकी भरे संदेश

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, रणवीर शौरी को 12 अक्टूबर 2026 की रात दो अलग-अलग ईमेल अकाउंट से संदेश प्राप्त हुए। इन ईमेल में कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के साथ उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई थी। बताया जा रहा है कि यह मामला CJP के विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक मुद्दों पर अभिनेता की ओर से की गई आलोचनात्मक टिप्पणियों के बाद सामने आया।

मुंबई पुलिस ने शुरू की कार्रवाई

धमकी भरे ईमेल के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर साझा करने के बाद मुंबई पुलिस की साइबर सेल और संबंधित पुलिस विभाग ने अभिनेता से संपर्क किया। इसके बाद रणवीर शौरी ने मामले में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।

फिलहाल, मामले में धमकी भेजने वाले व्यक्तियों की पहचान और धमकी के पीछे की वास्तविक वजह की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। ऑनलाइन माध्यम से मिलने वाली ऐसी धमकियों को लेकर साइबर सुरक्षा और सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े सवाल भी चर्चा में हैं।

धर्म परिवर्तन के बाद नहीं मिलेगा जाति आधारित आरक्षण सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

नई दिल्ली: धर्म परिवर्तन और जाति आधारित आरक्षण से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने आरक्षण व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर दी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल पूर्व जाति के आधार पर धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता। मामले में तमिलनाडु सरकार के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम बने लोगों को आरक्षण का लाभ देने का प्रावधान किया गया था।

मद्रास हाईकोर्ट का फैसला बरकरार

बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें तमिलनाडु सरकार के संबंधित फैसले को रद्द कर दिया गया था। इस मामले में दाखिल याचिका खारिज किए जाने की बात भी सामने आई है।

धर्म परिवर्तन के बाद सामाजिक पिछड़ेपन का दर्जा

मामले से जुड़े तर्कों के अनुसार, हिंदू जाति व्यवस्था के तहत मिलने वाला सामाजिक पिछड़ेपन का दर्जा धर्म परिवर्तन के बाद किसी दूसरे धर्म की सामाजिक व्यवस्था में स्वतः लागू नहीं माना जा सकता। हालांकि, आरक्षण की पात्रता संबंधित संवैधानिक प्रावधानों, जाति की श्रेणी और लागू नियमों पर निर्भर करती है।

अनुसूचित जाति के दर्जे पर क्या कहता है संविधान?

संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 में अनुसूचित जाति के दर्जे के लिए धर्म संबंधी शर्तें निर्धारित हैं। इसके तहत हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाता। इस प्रावधान का संबंध विशेष रूप से अनुसूचित जाति (SC) के दर्जे से है; इसे अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण नियमों के समान नहीं समझना चाहिए।

इमरान खान को 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का नोटिस, राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल होने पर कार्रवाई की खबर

मुंबई: बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, मुंबई में राजनीतिक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के मामले में उन्हें 28 अक्टूबर 2026 तक भारत छोड़ने का नोटिस जारी किया गया है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई उनके ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्डधारक होने और प्रदर्शन में भाग लेने से जुड़े नियमों के तहत की गई है।

क्या है पूरा मामला?

इमरान खान ने 10 अक्टूबर 2026 को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थन में आयोजित किया गया था, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं को लेकर भी सवाल उठाए थे।

प्रदर्शन के दौरान मुंबई पुलिस ने इमरान खान और उनके साथ मौजूद कुछ अन्य लोगों को हिरासत में लिया था। हालांकि, बाद में उन्हें उसी दिन रिहा कर दिया गया था।

अमेरिकी नागरिक हैं इमरान खान

इमरान खान का जन्म अमेरिका में हुआ था और उनके पास अमेरिकी नागरिकता तथा अमेरिकी पासपोर्ट है। वह भारत के नागरिक नहीं हैं, बल्कि भारत में रहने और काम करने के लिए ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड का इस्तेमाल करते हैं।

OCI कार्डधारकों को भारत में कई सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन यह भारतीय नागरिकता के समान नहीं है। विदेशी नागरिकों की राजनीतिक गतिविधियों में भागीदारी को लेकर लागू नियमों के तहत उनके मामले की जांच किए जाने की बात सामने आई है।

राजनीतिक प्रदर्शन में भाग लेने पर कानूनी कार्रवाई

रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन में शामिल होने के बाद इमरान खान के खिलाफ आव्रजन संबंधी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है। उन्हें 28 अक्टूबर 2026 तक भारत छोड़ने का नोटिस दिए जाने की खबर है।

हालांकि, नोटिस जारी करने वाले प्राधिकरण, उसमें उल्लिखित कानूनी धाराओं और भारत छोड़ने के निर्देश के सटीक आधार की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। विदेशी नागरिकों की राजनीतिक गतिविधियों पर लागू नियमों और किसी विशेष मामले में की गई कार्रवाई के बीच अंतर को संबंधित सरकारी दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट किया जा सकता है।

उत्तराखंड के 9 जिलों में बारिश, बिजली चमकने और तेज हवाओं का अलर्ट, 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

देहरादून। उत्तराखंड में मौसम को लेकर मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार, राज्य के नौ जिलों में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली चमकने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना है। वहीं, कुछ स्थानों पर बहुत हल्की से हल्की बारिश होने का भी अनुमान है।

मौसम विभाग की 14 अक्टूबर 2026 की मौसम चेतावनी के अनुसार, देहरादून, टिहरी, हरिद्वार, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, नैनीताल और पिथौरागढ़ जिलों में मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। इन जिलों में कहीं-कहीं गरज के साथ बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।

3800 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के आसार

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, संबंधित जिलों में कुछ स्थानों पर बहुत हल्की से हल्की बारिश हो सकती है। वहीं, 3800 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी की संभावना है।

शेष जिलों में मौसम रहेगा शुष्क

राज्य के अन्य जिलों में मौसम शुष्क रहने की संभावना जताई गई है। मौसम में संभावित बदलाव को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को गरज-चमक और तेज हवाओं के दौरान सावधानी बरतनी चाहिए।

मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार, अगले मौसम अपडेट पर नजर रखना और खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों तथा पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचना उचित रहेगा।