Friday, October 16, 2026
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प्रदेशभर में 12 दिसंबर 2026 को आयोजित होगी राष्ट्रीय लोक अदालत

देहरादून। उत्तराखण्ड में आगामी 12 दिसंबर 2026 (शनिवार) को प्रदेशभर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशानुसार तथा उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के तत्वावधान में यह आयोजन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक होगा।

उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव एवं माननीय उच्च न्यायालय के सदस्य सचिव श्री प्रदीप कुमार मणी ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से विभिन्न प्रकार के लंबित एवं वाद-पूर्व मामलों का निस्तारण किया जाएगा। इसके लिए उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, नैनीताल तथा प्रदेश के सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के सहयोग से विभिन्न न्यायालयों और न्यायाधिकरणों में सुनवाई की जाएगी।

उन्होंने बताया कि लोक अदालत का आयोजन उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय, सभी जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों, पारिवारिक न्यायालयों, श्रम न्यायालयों, वाणिज्यिक न्यायालयों, राज्य एवं जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोगों तथा ऋण वसूली अधिकरण, देहरादून में किया जाएगा।

11 दिसंबर तक कराएं मामलों का पंजीकरण

सदस्य सचिव ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि जो व्यक्ति अपने लंबित अथवा प्री-लिटिगेशन (वाद-पूर्व) मामलों का त्वरित, सरल और सौहार्दपूर्ण समाधान चाहते हैं, वे 11 दिसंबर 2026 तक किसी भी कार्यदिवस में संबंधित न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। आवेदन स्वयं या अपने अधिवक्ता के माध्यम से देकर मामले को राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए सूचीबद्ध कराया जा सकता है।

यहां से प्राप्त करें जानकारी

राष्ट्रीय लोक अदालत से संबंधित अधिक जानकारी के लिए इच्छुक व्यक्ति उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल अथवा अपने संबंधित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क कर सकते हैं।

राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य आपसी सहमति के आधार पर मामलों का समाधान कर पक्षकारों को सरल एवं त्वरित न्याय उपलब्ध कराने में मदद करना है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार की राहुल गांधी के ख़िलाफ़ याचिका, गर्भवती महिला को धक्का देने का आरोप

महिला पत्रकार से कथित धक्का-मुक्की मामले में राहुल गांधी के खिलाफ अर्जी पर सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट तैयार

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से जुड़े एक मामले में सुनवाई करने पर सहमति जताई है। यह मामला 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट परिसर में प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार के साथ कथित धक्का-मुक्की के आरोपों से संबंधित है। अर्जी में दावा किया गया है कि घटना के समय महिला पत्रकार तीन महीने की गर्भवती थीं।

शुक्रवार, 16 अक्टूबर को वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष इस अर्जी का उल्लेख किया। बताया गया कि यह अर्जी अधिवक्ता दिगंत मिश्रा की ओर से दाखिल उस याचिका से जुड़ी है, जिसमें अदालत परिसर के भीतर राजनीतिक प्रदर्शनों पर रोक लगाने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है।

मौखिक दलील पर संज्ञान लेने से किया था इनकार

इससे पहले, दिल्ली में प्रदर्शनों से संबंधित मामलों की सुनवाई के दौरान गौरव भाटिया ने कथित घटना का जिक्र किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने एक महिला पत्रकार को धक्का दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना से संबंधित एक रिपोर्ट उनके पास मौजूद है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट किया था कि केवल मौखिक दलील के आधार पर किसी घटना का स्वतः संज्ञान नहीं लिया जा सकता। अदालत ने संबंधित पक्ष को औपचारिक अर्जी दाखिल करने को कहा था, ताकि मामले पर विचार किया जा सके।

26 या 27 अक्टूबर को हो सकती है सुनवाई

अब सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अर्जी पर सुनवाई करने की सहमति दी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मामले को 26 या 27 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने की संभावना जताई गई है।

हालांकि, राहुल गांधी पर लगाए गए आरोप अभी आरोप ही हैं। अर्जी पर सुनवाई के लिए सहमति को आरोपों की पुष्टि या अदालत की ओर से किसी दोष-निर्धारण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट की फटकार की खबर फर्जी होने का दावा: कांग्रेस

नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से जुड़ी खबरों पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस की ओर से दावा किया गया है कि मीडिया में राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट की ओर से फटकार लगाए जाने की खबरें भ्रामक और पूरी तरह फर्जी हैं। पार्टी के अनुसार, अदालत की टिप्पणी याचिका में याचिकाकर्ता संख्या छह के संदर्भ में थी, न कि राहुल गांधी के लिए।

कांग्रेस का कहना है कि सुनवाई के दौरान आदेश दर्ज करते समय भी सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी का नाम नहीं लिया, इसके बावजूद मीडिया के कुछ संस्थानों ने टिप्पणी को राहुल गांधी से जोड़कर प्रसारित किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि इस तरह की खबरों के जरिए नेता प्रतिपक्ष की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।

कांग्रेस ने मीडिया से माफी मांगने की मांग की

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि कुछ मीडिया संस्थानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के इशारे पर राहुल गांधी की छवि खराब करने के उद्देश्य से खबरें प्रसारित कीं। पार्टी ने इस तरह की पत्रकारिता को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर बताते हुए संबंधित मीडिया संस्थानों से सार्वजनिक माफी की मांग की है।

हालांकि, उपलब्ध समाचार रिपोर्टों के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने विपक्षी नेताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि वह याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण के बारे में पूछना चाहेगा। अदालत ने उस टिप्पणी में संबंधित याचिकाकर्ता का नाम स्पष्ट नहीं किया था।

‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर लड़ाई जारी रखने की बात

कांग्रेस ने कहा कि राहुल गांधी मताधिकार की रक्षा और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि उसे लोकतंत्र में मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए जारी कानूनी लड़ाई में न्याय मिलने का भरोसा है।

अग्निवीरों के लिए धामी सरकार की पहल, 40वीं वाहिनी पीएसी में दो अग्निवीरों के समायोजन को मंजूरी

देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय सेना से नवंबर 2026 में सेवानिवृत्त होने जा रहे अग्निवीरों के पहले बैच के दो अग्निवीरों को 40वीं वाहिनी पीएसी में समायोजित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह समायोजन वाहिनी में उपलब्ध रिक्त पदों के सापेक्ष किया जाएगा।

राज्य सरकार के इस निर्णय से सेना में सेवा देने के बाद सेवानिवृत्त होने वाले अग्निवीरों को प्रदेश में आगे भी सेवा करने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री ने संबंधित प्रस्ताव पर सहमति प्रदान करते हुए दो अग्निवीरों के समायोजन को अनुमोदन दिया है।

नवंबर 2026 में सेवामुक्त होगा अग्निवीरों का पहला बैच

संयुक्त सचिव, भारत सरकार की ओर से भेजे गए पत्र में अवगत कराया गया था कि अग्निपथ योजना के अंतर्गत भारतीय सेना में भर्ती हुए अग्निवीरों का पहला बैच नवंबर 2026 में सशस्त्र बलों से सेवामुक्त होने जा रहा है। इसी क्रम में उत्तराखंड के दो अग्निवीरों के समायोजन की अपेक्षा की गई थी।

प्रस्ताव पर विचार के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 40वीं वाहिनी पीएसी में उपलब्ध रिक्त पदों के सापेक्ष दोनों अग्निवीरों के समायोजन को मंजूरी प्रदान की। इससे सैन्य सेवा के दौरान अर्जित उनके अनुभव, कौशल और अनुशासन का उपयोग प्रदेश की सेवा में किया जा सकेगा।

अग्निवीरों के कौशल और अनुभव का मिलेगा लाभ: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में शुरू की गई अग्निपथ योजना युवाओं में अनुशासन, राष्ट्रसेवा और कर्तव्यनिष्ठा की भावना को मजबूत कर रही है। अग्निवीर भारतीय सेना में सेवा के दौरान जो कौशल, अनुभव और अनुशासन अर्जित करते हैं, वह राष्ट्र की अमूल्य पूंजी है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अग्निवीरों के योगदान और उनकी क्षमताओं का सम्मान करती है। सरकार का प्रयास है कि देश की सेवा कर चुके युवाओं को आगे भी प्रदेश की सेवा करने का अवसर मिले, ताकि उनके सैन्य अनुभव, अनुशासन और दक्षता का लाभ राज्य को प्राप्त हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और राष्ट्रसेवा के उनके संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

युवाओं को अराजकता की राजनीति का मोहरा बनाने की कोशिश हो रही है: राजनाथ सिंह

लखनऊ, उत्तर प्रदेश। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश में जारी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के युवाओं को अराजकता की राजनीति में मोहरे के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बांग्लादेश की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि कुछ लोग वहां के घटनाक्रम से प्रेरणा लेकर भारत में भी सत्ता परिवर्तन की बात कर रहे हैं।

राजनाथ सिंह ने कहा कि कुछ लोग खुले तौर पर सरकार को गिराने की अपील कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इस तरह की गतिविधियों से स्पष्ट होता है कि संबंधित लोगों का उद्देश्य लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करना और देश में अशांति का माहौल पैदा करना है।

SIR और चुनाव सुधार को लेकर भी उठाए सवाल

रक्षा मंत्री ने कहा कि यह संघर्ष केवल चुनावी सुधार, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) या ज्ञानेश कुमार से जुड़ा मुद्दा नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की चिंता के बजाय अराजकता फैलाकर सत्ता हासिल करने की कोशिश की जा रही है।

राजनाथ सिंह ने अपने बयान में कहा कि देश में अव्यवस्था पैदा करके सत्ता पर काबिज होने की मंशा से लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर जताई चिंता

रक्षा मंत्री के बयान में लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और देश में राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेश के घटनाक्रम से प्रेरित होकर भारत में भी इसी तरह की स्थिति पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

राजनाथ सिंह के इस बयान से चुनावी प्रक्रिया, SIR और राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों को लेकर जारी बहस के बीच सियासी बयानबाजी तेज होने के संकेत हैं।

140 करोड़ भारतीयों की एकजुट आवाज: विकास, सुशासन और आत्मनिर्भरता ही देश की प्राथमिकता

देश की जनता विकास, सुशासन और आत्मनिर्भरता चाहती है। 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाएं एक ऐसे भारत के निर्माण से जुड़ी हैं, जहां राजनीतिक अस्थिरता और टकराव के बजाय विकास, एकता और जनकल्याण को प्राथमिकता मिले। देश की जनता अब केवल भाषण नहीं, बल्कि धरातल पर ठोस काम और उसके परिणाम देखना चाहती है।

https://x.com/bjp4india/status/2110767904514036147?s=46

इस राजनीतिक संदेश में राष्ट्रीय एकता पर जोर देते हुए कहा गया है कि देश को बांटने और टकराव बढ़ाने वाली राजनीति के बजाय विकास की दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है। भारत की प्रगति के लिए सभी वर्गों की भागीदारी और जनता के विश्वास को मजबूत करना अहम है।

विकास और सुशासन से मजबूत होगा भारत

संदेश में विकास, सुशासन और आत्मनिर्भरता को देश के भविष्य के तीन प्रमुख स्तंभ बताया गया है। इसके अनुसार, सरकारों और जनप्रतिनिधियों का मूल्यांकन उनके वादों और भाषणों से नहीं, बल्कि जनता के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों से होना चाहिए।

साथ ही राजनीतिक नेतृत्व को जनता का विश्वास जीतने और अपनी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की चुनौती दी गई है। संदेश का मूल भाव है कि देश को विवाद और अस्थिरता के बजाय ठोस विकास, जवाबदेही और आत्मनिर्भरता के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए।

जनता के भरोसे पर खरा उतरना जरूरी

यह संदेश राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों को जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराता है। इसमें स्पष्ट रूप से विकास को प्राथमिकता देने, राष्ट्रीय एकता बनाए रखने और शासन व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाने की बात कही गई है।

कुल मिलाकर, संदेश का केंद्र भारत को एकजुट, विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने की आकांक्षा है, जहां राजनीतिक बयानबाजी से अधिक महत्व जमीनी परिणामों को दिया जाए।

मंत्री रेखा आर्या ने पति के खिलाफ दर्ज कराई FIR

देहरादून: उत्तराखंड की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने अपने पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के खिलाफ देहरादून के कैंट थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई है। शिकायत में उन्होंने पति पर धोखे से शादी करने, अन्य महिलाओं से कथित अवैध संबंध रखने, मारपीट, प्रताड़ना और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

पहली शादी छिपाने का आरोप

रेखा आर्या की शिकायत के अनुसार, गिरधारी लाल साहू ने विवाह के समय अपनी पहली शादी और बच्चों से जुड़ी जानकारी छिपाई थी। मंत्री का आरोप है कि पिछले कुछ महीनों से उनके पति का व्यवहार बदल गया था। बाद में उन्हें कथित तौर पर अन्य महिलाओं के साथ उनके संबंधों की जानकारी मिली।

शिकायत में कहा गया है कि इस मामले का विरोध करने पर पति ने लिखित और मौखिक रूप से माफी मांगी, लेकिन इसके बावजूद कथित तौर पर उनका व्यवहार नहीं बदला।

सोशल मीडिया पर वीडियो और ऑडियो क्लिप साझा करने का दावा

रेखा आर्या ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो और दो ऑडियो क्लिप साझा किए हैं। उनके दावे के मुताबिक, ऑडियो रिकॉर्डिंग में उनके पति एक अन्य महिला के साथ मिलकर उनकी हत्या की साजिश पर बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, इन रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता और बातचीत के संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी आवश्यक है।

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मंत्री ने यह भी आरोप लगाया है कि सरकारी आवास पर स्टाफ के सामने उनके साथ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर अपमानजनक व्यवहार किया गया।

धोखाधड़ी और SC/ST एक्ट के तहत मुकदमा

शिकायत के मुताबिक, गिरधारी लाल साहू पर धोखाधड़ी, प्रताड़ना और कथित जालसाजी से जुड़े आरोप भी लगाए गए हैं। इनमें फर्जी हस्ताक्षर के जरिए कंपनी के निदेशक पद से हटाने का प्रयास किए जाने का आरोप शामिल है।

दी गई जानकारी के अनुसार, पुलिस ने शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। प्राथमिकी दर्ज होना आरोपों का अंतिम प्रमाण नहीं है। पुलिस जांच और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

भारत-कनाडा संबंधों को मजबूत करने पर जोर, पीएम मोदी और एस. जयशंकर से मिलीं कनाडाई विदेश मंत्री अनीता आनंद

नई दिल्ली: भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, रक्षा, सुरक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।

2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य

बैठक में भारत और कनाडा के बीच आर्थिक सहयोग को नई गति देने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को लेकर चल रही वार्ताओं को जल्द पूरा करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य भी चर्चा के केंद्र में रहा।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय व्यापार 23.66 अरब अमेरिकी डॉलर रहा था। दोनों देश व्यापारिक संबंधों के विस्तार के साथ निवेश और आर्थिक सहयोग की संभावनाओं को भी आगे बढ़ाना चाहते हैं।

‘टीम कनाडा ट्रेड मिशन’ के साथ बढ़ेगा आर्थिक सहयोग

कनाडाई विदेश मंत्री अनीता आनंद की भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू के नेतृत्व में ‘टीम कनाडा ट्रेड मिशन’ भी भारत में सक्रिय है। इस पहल का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक संपर्कों और कारोबारी सहयोग को बढ़ावा देना है।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच भी द्विपक्षीय संबंधों को लेकर बातचीत हो चुकी है। इन उच्चस्तरीय संपर्कों को दोनों देशों के बीच सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों को आगे बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

दिसंबर 2026 में कनाडा जा सकते हैं पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिसंबर 2026 में कनाडा दौरे पर जाने की संभावना जताई गई है। प्रस्तावित यात्रा को भारत-कनाडा संबंधों को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, दोनों देशों के बीच हालिया बैठकों और व्यापारिक संपर्कों का मुख्य उद्देश्य आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना, व्यापार बढ़ाना और रक्षा, तकनीक, ऊर्जा तथा शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग की नई संभावनाएं तलाशना है।

हिमालयी आपदाओं से निपटने में AI की होगी अहम भूमिका, सतत विकास में स्थानीय समुदायों की भागीदारी जरूरी: मुख्य सचिव

देहरादून, 15 अक्टूबर 2026: उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने गुरुवार को दून विश्वविद्यालय में “बदलती जलवायु में हिमालय: आपदाएं, सतत विकास एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ती चुनौतियों से निपटने, आपदाओं का आकलन करने और जोखिम कम करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मुख्य सचिव ने जोर दिया कि आधुनिक तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल के साथ सतत विकास की योजनाओं में स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

आपदा प्रबंधन और पूर्वानुमान में तकनीक का इस्तेमाल जरूरी

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र अपनी भौगोलिक परिस्थितियों और संवेदनशीलता के कारण कई तरह की चुनौतियों का सामना करता है। ऐसे में आपदाओं का आकलन करने, उनके संभावित प्रभावों का पूर्वानुमान लगाने और प्रभावी योजनाएं तैयार करने के लिए नवीन तकनीकों का उपयोग किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित समाधान स्थानीय जरूरतों और परिस्थितियों के अनुरूप विकसित किए जाने चाहिए, ताकि उनका लाभ आम लोगों तक पहुंच सके और आपदा जोखिम को कम करने में मदद मिले।

‘स्मॉल AI’ से कम संसाधनों में विकसित होंगे प्रभावी समाधान

संगोष्ठी में दक्षिण कैरोलिना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर तथा आईएआईआरओ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं संस्थापक निदेशक प्रो. अमित शेठ ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की उभरती तकनीक ‘स्मॉल AI’ की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि कम संसाधनों में सुलभ और प्रभावी तकनीकी समाधान विकसित करके भारत की विशिष्ट विकास संबंधी जरूरतों को पूरा किया जा सकता है। हिमालयी क्षेत्रों में लगातार सामने आने वाली आपदाओं से निपटने और उनके प्रभाव को कम करने में भी इन तकनीकों का उपयोग महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

अनुसंधान को बढ़ावा देने पर दिया जोर

अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) के संयुक्त सचिव डॉ. निशांत वर्मा ने दून विश्वविद्यालय में विकसित हो रहे शोध और अनुसंधान के वातावरण की सराहना की। उन्होंने देश में अनुसंधान गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा शोध के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने में एएनआरएफ की भूमिका पर जानकारी दी।

वहीं, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और शोध संबंधी उपलब्धियों को साझा किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों और शोधार्थियों के निरंतर प्रयासों से विश्वविद्यालय में अनुसंधान गतिविधियों को मजबूत किया जा रहा है।

जलवायु परिवर्तन और हिमालयी चुनौतियों पर होगा मंथन

दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में जलवायु परिवर्तन से हिमालयी क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले खतरों, आपदा आकलन, जोखिम न्यूनीकरण, सतत विकास और शोध एवं निर्णय प्रक्रिया में AI के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ चर्चा करेंगे।

संगोष्ठी में दिल्ली विश्वविद्यालय, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की सहित देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों और दून विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के संयोजक एवं भूविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. विपिन कुमार सहित अन्य लोग भी उपस्थित रहे।

इस संगोष्ठी का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्रों की विशिष्ट चुनौतियों के समाधान के लिए वैज्ञानिक शोध, आधुनिक तकनीक और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विचार-विमर्श करना है।

अंकिता भंडारी हत्याकांड: उत्तराखंड पुलिस ने 24 घंटे में गिरफ्तार किए थे तीनों आरोपी, 88 दिन में दाखिल किया आरोपपत्र

देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच और न्यायिक कार्रवाई को लेकर अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) डॉ. वी. मुरुगेशन ने गुरुवार को पुलिस मुख्यालय, देहरादून में आयोजित प्रेस वार्ता में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में ऋषिकेश के निकट वनंतरा रिजॉर्ट में हुई इस घटना के बाद उत्तराखंड पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 24 घंटे के भीतर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित हुई थी एसआईटी

डॉ. मुरुगेशन के अनुसार, मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था। जांच की जिम्मेदारी डीआईजी स्तर की महिला आईपीएस अधिकारी को सौंपी गई, ताकि मामले की निष्पक्ष और प्रभावी जांच सुनिश्चित की जा सके।

88 दिन में दाखिल किया गया आरोपपत्र

एडीजी ने बताया कि एसआईटी ने जांच के दौरान डिजिटल, तकनीकी, फॉरेंसिक और भौतिक साक्ष्य जुटाए। इसके साथ ही आरोपियों से पूछताछ की गई तथा गवाहों के बयानों और फॉरेंसिक रिपोर्टों का गहन विश्लेषण किया गया।

उन्होंने बताया कि एसआईटी ने 88 दिनों में जांच पूरी कर करीब 500 पृष्ठों का विस्तृत आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। पुलिस के अनुसार, जांच में उपलब्ध साक्ष्यों को व्यवस्थित रूप से संकलित कर अभियोजन की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।

तीनों दोषियों को सुनाई गई आजीवन कठोर कारावास की सजा

डॉ. मुरुगेशन ने बताया कि मामले में त्वरित सुनवाई और प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के लिए उत्तराखंड शासन की ओर से आवश्यक प्रयास किए गए। अभियोजन पक्ष की पैरवी और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर 30 मई 2025 को कोटद्वार स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने तीनों आरोपियों पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई।

पुलिस के अनुसार, तीनों दोषी वर्तमान में जेल में बंद हैं और सजा काट रहे हैं।

अंकिता भंडारी हत्याकांड ने पूरे उत्तराखंड को झकझोरा

सितंबर 2022 में 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या के मामले ने पूरे उत्तराखंड में व्यापक आक्रोश पैदा किया था। घटना के बाद न्याय की मांग को लेकर प्रदेशभर में विरोध-प्रदर्शन हुए थे। यह मामला आज भी राज्य में महिला सुरक्षा, निष्पक्ष जांच और न्यायिक जवाबदेही से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में चर्चा में रहता है।

पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में एडीजी ने जांच से लेकर न्यायालय में दोषसिद्धि तक की कार्रवाई का विवरण साझा करते हुए मामले में पुलिस की कार्रवाई और अभियोजन प्रक्रिया की जानकारी दी।