Tuesday, February 3, 2026
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उत्तराखंड में पर्वतारोहण को नई उड़ान 83 प्रमुख हिमालयी चोटियां पर्वतारोहियों के लिए खुलीं

देवभूमि उत्तराखंड ने साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पर्वतारोहण को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (UTDB) ने वन विभाग के समन्वय से गढ़वाल और कुमाऊं हिमालय क्षेत्र की 83 प्रमुख पर्वत चोटियों को पर्वतारोहण अभियानों के लिए पूरी तरह खोल दिया है। यह निर्णय उत्तराखंड को वैश्विक पर्वतारोहण मानचित्र पर एक सशक्त और आकर्षक गंतव्य के रूप में स्थापित करेगा।

खोली गई चोटियों की ऊंचाई 5,700 मीटर से 7,756 मीटर तक है। इनमें कामेट (7,756 मीटर), नंदा देवी ईस्ट, चौखंबा समूह, त्रिशूल समूह, शिवलिंग, सतोपंथ, चंगाबांग, पंचचूली और नीलकंठ जैसी विश्व प्रसिद्ध एवं चुनौतीपूर्ण चोटियां शामिल हैं। ये शिखर न केवल तकनीकी कठिनाई और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध हैं, बल्कि हिमालय की भव्यता के जीवंत प्रतीक भी माने जाते हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हिमालय हमारी पहचान, हमारी विरासत और हमारी शक्ति है। 83 प्रमुख पर्वत चोटियों को पर्वतारोहण के लिए खोलना राज्य के साहसिक पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। हमारा उद्देश्य है कि देश के युवा पर्वतारोहण जैसे साहसिक क्षेत्रों में आगे आएं, स्थानीय लोगों को रोजगार मिले और पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलित विकास सुनिश्चित हो। राज्य सरकार सुरक्षित, जिम्मेदार और सतत पर्वतारोहण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारतीय युवाओं को पर्वतारोहण के लिए प्रोत्साहित करना, साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देना और सीमावर्ती व दूर-दराज क्षेत्रों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करना है।

भारतीय पर्वतारोहियों को बड़ी राहत:

अधिसूचित 83 चोटियों पर अब भारतीय पर्वतारोहियों को किसी भी प्रकार का अभियान शुल्क—जैसे पीक फीस, कैंपिंग फीस या पर्यावरण शुल्क—नहीं देना होगा। पहले यह शुल्क भारतीय पर्वतारोहण संस्था (IMF) और वन विभाग द्वारा लिया जाता था, लेकिन अब राज्य सरकार स्वयं इसका वहन करेगी। इससे आर्थिक कारणों से पीछे रह जाने वाले युवाओं को बड़ा अवसर मिलेगा।

विदेशी पर्वतारोहियों के लिए सरल व्यवस्था:

विदेशी पर्वतारोहियों पर पहले लगने वाले राज्य स्तरीय अतिरिक्त शुल्क को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। अब उन्हें केवल IMF द्वारा निर्धारित शुल्क ही देना होगा। इससे उत्तराखंड की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपील बढ़ेगी और विदेशी अभियानों की संख्या में वृद्धि होगी।

ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया:

सभी पर्वतारोहण अभियानों के लिए आवेदन अब उत्तराखंड माउंटेनियरिंग परमिशन सिस्टम (UKMPS) के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किए जाएंगे। यह प्रणाली पारदर्शी, तेज और पूरी तरह डिजिटल है, जिससे अनुमति प्रक्रिया में देरी नहीं होगी।

स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा:

इस फैसले से सीमावर्ती गांवों में पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी। स्थानीय लोगों को गाइड, पोर्टर, होमस्टे, परिवहन और अन्य सेवाओं के माध्यम से रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। यह पहल पलायन रोकने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी सहायक सिद्ध होगी।

सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण पर सख्ती:

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी अभियानों में सुरक्षा मानकों और पर्यावरणीय नियमों का सख्ती से पालन अनिवार्य होगा। पर्वतारोहियों को “लीव नो ट्रेस” सिद्धांत अपनाना होगा और हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी की रक्षा सुनिश्चित करनी होगी।

उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने देश-विदेश के सभी पर्वतारोहियों का इन अद्भुत हिमालयी शिखरों पर स्वागत करते हुए कहा है कि यह पहल देवभूमि उत्तराखंड की साहसिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला मील का पत्थर साबित होगी।

गौरतलब है कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026–27 में पहाड़ी राज्यों के पर्यटन को नई ऊंचाई देने की महत्वपूर्ण घोषणा की है। बजट में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में पर्यावरण-अनुकूल (इको-फ्रेंडली) माउंटेन ट्रेल्स विकसित करने का ऐलान किया गया है। यह कदम भारत को विश्व स्तरीय ट्रेकिंग और हाइकिंग गंतव्य बनाने की दिशा में बड़ा प्रयास है, जिससे साहसिक पर्यटन को बढ़ावा और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन होगा

मुख्यमंत्री धामी ने फिल्म “जलमभूमि” के पोस्टर का किया विमोचन, फिल्म टीम को दी शुभकामनाएं

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास में फिल्म “जलमभूमि” के पोस्टर का विधिवत विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने फिल्म के निर्माता-निर्देशक के. राम नेगी एवं पूरी फिल्म टीम को शुभकामनाएं और बधाई दीं। उल्लेखनीय है कि यह फिल्म 6 फरवरी को रिलीज होने जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “जलमभूमि” जैसी फिल्में समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती हैं और सिनेमा के माध्यम से सामाजिक सरोकारों को मजबूती मिलती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक सौंदर्य, विविध भौगोलिक परिस्थितियों, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और शांत वातावरण के कारण फिल्म निर्माण के लिए एक आदर्श राज्य के रूप में उभर रहा है।

मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि राज्य सरकार फिल्म उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उत्तराखंड में फिल्म नीति को प्रभावी रूप से लागू किया गया है, जिसके तहत फिल्म निर्माताओं को सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से त्वरित अनुमति प्रदान की जा रही है। शूटिंग अनुमति प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है, ताकि फिल्म निर्माताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा फिल्म शूटिंग पर सब्सिडी, स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और युवाओं को रोजगार के अवसर, तथा स्थानीय संसाधनों के अधिकतम उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के माध्यम से राज्य को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फिल्म मानचित्र पर स्थापित करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि फिल्म नीति का उद्देश्य केवल फिल्मों की शूटिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती मिल रही है। उत्तराखंड में वेब सीरीज, डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिल्म और फीचर फिल्मों के निर्माण को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने फिल्म की सफलता की कामना करते हुए कहा कि राज्य सरकार भविष्य में भी सिनेमा और रचनात्मक उद्योगों को हरसंभव सहयोग देती रहेगी।

इस अवसर पर विधायक दुर्गेश लाल भी उपस्थित रहे।

सीएम धामी के सख्त निर्देश: कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उत्तराखंड में कानून व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यशैली और जनसेवा को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य में शांति, सुरक्षा और सुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए सभी विभागों को पूरी जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करना होगा।

आज सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अखिल भारतीय डीजी/आईजी सम्मेलन से प्राप्त निष्कर्षों की समीक्षा करते हुए राज्य की कानून व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था, पर्यटन प्रबंधन, राजस्व, नशा मुक्ति, अभियोजन, कारागार सुधार एवं जनशिकायत निवारण से जुड़े विषयों पर गहन समीक्षा की। बैठक में मुख्य सचिव सहित सभी जिलों के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तथा पुलिस एवं प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पुलिस का वर्क कल्चर सुधारा जाए और आम आदमी को किसी भी तरह से परेशान न किया जाए। थानों और चौकियों स्तर पर मानवीय, संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए। निर्दोष नागरिकों को अनावश्यक रूप से परेशान करने की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा।

दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे के खुलने के बाद राज्य में पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि की संभावना को देखते हुए मुख्यमंत्री ने सरकार को पूरी तरह अलर्ट रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि होटल, आवास, पार्किंग, ट्रैफिक प्लान, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा से जुड़ी सभी तैयारियाँ समयबद्ध रूप से पूरी की जाएँ, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो। मुख्यमंत्री ने बताया कि कैंची धाम बाईपास का कार्य जून माह तक पूरा कर लिया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बड़ी राहत मिलेगी।

लैंड फ्रॉड के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि भूमि से जुड़े अपराधों पर कठोर कानून बनाया जाएगा और दोषियों को किसी भी सूरत में राहत नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अवैध निर्माण और अतिक्रमण को संरक्षण देने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अपराध नियंत्रण को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस की रात्रि गश्त को और अधिक सघन किया जाए तथा निरंतर पेट्रोलिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि अपराधियों पर शिकंजा कसा जा सके। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि आपराधिक मामलों की विवेचना अनावश्यक रूप से लंबित न रखी जाए।

नशा मुक्ति अभियान को जन आंदोलन बनाने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जनपद से मासिक नशा मुक्ति रिपोर्ट सीधे शासन को भेजी जाए। इसकी नियमित समीक्षा गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक द्वारा की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने अभियोजन व्यवस्था पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अभियोजन किसी भी स्तर पर कमजोर नहीं होना चाहिए। अभियोजन अधिकारियों का परफॉर्मेंस ऑडिट कराया जाए, ताकि दोषियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया मजबूत हो।

जनशिकायत निवारण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री ने 1905 हेल्पलाइन पर जीरो पेंडेंसी का लक्ष्य निर्धारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाओं का 100 प्रतिशत क्रियान्वयन जिलों में अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। योजनाएँ केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए।

डिजिटल गवर्नेंस को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसे केवल औपचारिकता न मानते हुए पूरी गंभीरता के साथ लागू किया जाए। साथ ही, उन्होंने अगले छह माह में विशेष अभियान चलाकर प्रत्येक जनपद के गांवों को 100 प्रतिशत योजनाओं से संतृप्त करने के निर्देश दिए।

चारधाम यात्रा की तैयारियों के संबंध में मुख्यमंत्री ने संबंधित जनपदों में संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। वहीं, लोक निर्माण विभाग को सड़कों के डामरीकरण का कार्य 15 फरवरी तक प्रारंभ करने और गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न करने के सख्त निर्देश दिए गए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आदमपुर हवाई अड्डे को गुरु रविदास महाराज के नाम समर्पित करना सामाजिक समरसता की दिशा में ऐतिहासिक कदम: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आदमपुर हवाई अड्डे का नाम संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज के नाम पर समर्पित किया जाना, उनके महान विचारों, सामाजिक चेतना और मानवता के प्रति समर्पण को सच्ची श्रद्धांजलि है। संत रविदास जी की जयंती के पावन अवसर पर लिया गया यह निर्णय न केवल अत्यंत सराहनीय है, बल्कि सामाजिक समरसता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम भी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संत रविदास जी ने अपने जीवन और विचारों के माध्यम से समानता, करुणा, सेवा और मानव मात्र के सम्मान का जो संदेश दिया, वह आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने भेदभाव, ऊँच-नीच और असमानता के विरुद्ध आवाज़ उठाकर एक समतामूलक समाज की परिकल्पना प्रस्तुत की, जो आज के समय में भी पूरी तरह प्रासंगिक है।

धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में महापुरुषों और संतों के विचारों को सम्मान देने की परंपरा निरंतर सशक्त हो रही है। आदमपुर हवाई अड्डे को संत गुरु रविदास महाराज के नाम से जोड़ना, उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने और नई पीढ़ी को उनके विचारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय गौरव को और अधिक मजबूत करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि संत रविदास जी के आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज समरसता, सद्भाव और सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ेगा।

मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान की अवधि 20 फरवरी तक बढ़ाई गई

कोई क्षेत्र नहीं रहेगा वंचित, सभी जिलों में पुनः लगेंगे जनसेवा कैंप

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में राज्य सरकार द्वारा जनसेवा को और अधिक सुदृढ़, प्रभावी एवं व्यापक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान और शासन को जन-जन के और अधिक निकट लाने के उद्देश्य से संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान की अवधि को आगे बढ़ा दिया गया है।

मुख्यमंत्री धामी के मार्गदर्शन में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह अभियान अब 20 फरवरी 2026 तक प्रदेश के सभी जनपदों में संचालित किया जाएगा। इससे पूर्व यह अभियान 31 जनवरी 2026 तक प्रस्तावित था, जिसे जनता की सकारात्मक प्रतिक्रिया तथा कैंपों में बड़ी संख्या में प्राप्त शिकायतों एवं सुझावों के प्रभावी निस्तारण को देखते हुए 20 दिनों के लिए विस्तारित किया गया है।

अब तक हजारों लोगों को मिला सीधा लाभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की जन-केन्द्रित सोच का परिणाम है कि 17 दिसंबर 2025 से प्रदेशभर में आयोजित किए जा रहे इन जनसेवा कैंपों के माध्यम से आम नागरिकों की समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया जा रहा है।

राजस्व, समाज कल्याण, स्वास्थ्य, शिक्षा, पुलिस, नगर निकाय सहित विभिन्न विभागों से संबंधित शिकायतों का त्वरित निस्तारण कर जनता को राहत पहुंचाई जा रही है।

छूटे हुए क्षेत्रों को भी किया जाएगा आच्छादित

मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन क्षेत्रों में अब तक अभियान के अंतर्गत कैंप आयोजित नहीं हो पाए हैं, उन्हें भी विस्तारित अवधि में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए, ताकि प्रदेश का कोई भी नागरिक इस जनसेवा अभियान से वंचित न रहे।

मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि शासन जनता के द्वार तक पहुंचे।

उन्होंने कहा,

“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार अभियान हमारी सरकार की जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। शासन को जनता के द्वार तक पहुंचाना और हर नागरिक की समस्या का समाधान करना हमारी प्राथमिकता है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रदेश का कोई भी क्षेत्र और कोई भी नागरिक इस अभियान से वंचित न रहे।”

जिलाधिकारियों को दिए गए निर्देश

मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार सभी जिलाधिकारियों को अभियान की कार्यक्रम-रूपरेखा शीघ्र सामान्य प्रशासन विभाग को उपलब्ध कराने तथा नियमानुसार कैंपों के आयोजन को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे अभियान को सुचारु, पारदर्शी और प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सके।

यह अभियान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार की संवेदनशील, जवाबदेह और जन-समर्पित शासन व्यवस्था का सशक्त उदाहरण बनकर उभर रहा है।

बजट 2026-27 से देश और राज्यों के विकास को मिलेगी नई दिशा : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

सीएम धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को विकासोन्मुखी बजट के लिए दी बधाई

देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय बजट 2026-27 की सराहना करते हुए कहा कि यह बजट देश और राज्यों के विकास को नई दिशा देने वाला है तथा सभी वर्गों के लिए नए अवसर सृजित करेगा। उन्होंने कहा कि बजट में आर्थिक विकास को गति देने, जन-आकांक्षाओं को पूरा करने और सबका साथ, सबका विकास के संकल्प को सशक्त करने पर विशेष जोर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को विकासोन्मुखी एवं समावेशी बजट प्रस्तुत करने के लिए बधाई देते हुए कहा कि इसमें किसानों, महिलाओं, युवाओं, वंचित वर्गों, छोटे उद्यमियों और पिछड़े तबकों के हितों का विशेष ध्यान रखा गया है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि बजट में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, उद्योग और आधारभूत संरचना के लिए किए गए प्रावधान पूरे देश के साथ-साथ उत्तराखंड के लिए भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होंगे। इससे राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि बजट में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के लिए पर्यावरण-अनुकूल माउंटेन ट्रेल्स विकसित करने की योजना पर्वतीय राज्यों के लिए महत्वपूर्ण पहल है। उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में बजट में पर्यटन और बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान दिया गया है, जो राज्य के समग्र विकास के लिए आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों, पशुपालन, उच्च मूल्य कृषि, पर्यटन और एमएसएमई सेक्टर के लिए किए गए प्रावधान राज्य की ग्रामीण और पर्वतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेंगे। साथ ही पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल तकनीक और बायोफार्मा क्षेत्र में निवेश से राज्य और देश दोनों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह बजट आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य और सबका साथ, सबका विकास की भावना को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार बजट में घोषित योजनाओं और प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए केंद्र सरकार के साथ पूर्ण सहयोग करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 न केवल देश की आर्थिक सुदृढ़ता को और मजबूत करेगा, बल्कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों को भी समान विकास के अवसर प्रदान करेगा।

प्रवासी उत्तराखण्डियों से संवाद का सशक्त मंच बना ‘उत्तराखण्ड महोत्सव रोहिणी–02’

लोक संस्कृति को विकास से जोड़ने की दिशा में सरकार निरंतर कार्यरत : मुख्यमंत्री धामी

महिला सशक्तिकरण, पर्यटन और संस्कृति संरक्षण से मजबूत हो रहा नया उत्तराखण्ड

प्रधानमंत्री के ‘विकास भी, विरासत भी’ मंत्र पर आगे बढ़ रहा राज्य

नई दिल्ली/रोहिणी: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली के रोहिणी में ‘हम सबका उत्तराखण्ड’ संस्था द्वारा आयोजित ‘उत्तराखण्ड महोत्सव रोहिणी–सीजन 02’ में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखण्डी, लोक कलाकार, युवा एवं महिलाएं उपस्थित रहीं। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर लोक कलाकारों का उत्साहवर्धन किया तथा उत्तराखण्ड की संस्कृति, परंपराओं और लोक विरासत को समर्पित इस आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा ‘उत्तराखण्ड के सितारे’ सम्मान से सुप्रसिद्ध सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर सौरभ जोशी, हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मनोज गोरखेला तथा प्रसिद्ध लोक गायिका कल्पना चौहान को सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन लोक कलाकारों को मंच और सम्मान देने के साथ-साथ समाज को सेवा, संस्कार और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति आज भी अपने गीतों, नृत्यों, वेशभूषा और परंपराओं के माध्यम से जीवंत है और देश-विदेश में बसे उत्तराखण्डी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से गहराई से जुड़े हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इससे बच्चों और युवाओं में अपनी बोली, संस्कृति और परंपराओं के प्रति गर्व की भावना विकसित होती है। लोकनृत्य और लोकगीत राज्य की सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

देवभूमि उत्तराखण्ड को आस्था, तप, त्याग और साधना की भूमि बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगा-यमुना एवं आदि कैलाश जैसे पवित्र स्थलों के कारण राज्य को विश्वभर में विशेष पहचान प्राप्त है। उन्होंने कहा कि स्वयं पहाड़ से जुड़े होने के कारण लोकसंस्कृति उनके जीवन और संस्कारों का अभिन्न हिस्सा रही है, इसी दृष्टिकोण से राज्य सरकार संस्कृति को विकास से जोड़ते हुए आगे बढ़ रही है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “विकास भी, विरासत भी” मंत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी सोच के तहत राज्य में धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों का पुनर्विकास किया जा रहा है। केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के पुनर्निर्माण से न केवल आस्था को मजबूती मिली है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं। मंदिर माला मिशन के माध्यम से धार्मिक स्थलों का संरक्षण और विकास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखण्ड आज वेडिंग डेस्टिनेशन, एडवेंचर टूरिज्म और फिल्म शूटिंग के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। विंटर टूरिज्म, ‘वेड इन उत्तराखण्ड’ और होम-स्टे जैसी पहलों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। कृषि, दुग्ध उत्पादन, मधु उत्पादन और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देकर ग्रामीण आजीविका को सशक्त किया जा रहा है।

महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लखपति दीदी योजना के माध्यम से बड़ी संख्या में महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। ‘एक जनपद–दो उत्पाद’ योजना और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड से उत्तराखण्ड के उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही है। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों की गुणवत्ता की विशेष सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद उत्तराखण्ड ने उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य की अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय, बजट, बिजली उत्पादन और स्वास्थ्य सुविधाओं में निरंतर सुधार हुआ है। पलायन रोकने, किसानों की आय बढ़ाने और युवाओं को रोजगार देने में राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है।

उन्होंने कहा कि सख्त कानूनों, पारदर्शी शासन और समान नागरिक संहिता के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य में सुशासन स्थापित हुआ है। प्रधानमंत्री द्वारा बताए गए “उत्तराखण्ड का दशक” को साकार करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ निरंतर कार्य कर रही है।

कोटद्वार में विकास और प्रकृति संरक्षण का ऐतिहासिक संगम, मुख्यमंत्री ने बर्ड वॉचिंग फेस्टिवल का किया शुभारंभ

326 करोड़ से अधिक की 61 विकास योजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास, बर्ड फेस्टिवल से कोटद्वार को मिली नई पहचान…

पौड़ी/31 जनवरी 2026: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कोटद्वार में आयोजित दो दिवसीय बर्ड वॉचिंग फेस्टिवल में प्रतिभाग कर विकास और पर्यावरण संरक्षण के समन्वय का संदेश दिया। इस अवसर पर उन्होंने जनपद के विभिन्न विकासखंडों के लिए 326 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 61 विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया।

मुख्यमंत्री कोटद्वार पहुंचने पर सबसे पहले दिव्यांग बालक-बालिकाओं से मिले और उनकी शिक्षा के संबंध में संवाद किया। इसके पश्चात उन्होंने सिद्धबली मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। सनेह क्षेत्र में आयोजित बर्ड वॉचिंग फेस्टिवल का विधिवत शुभारंभ करते हुए जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया द्वारा मुख्यमंत्री एवं अन्य अतिथियों का स्वागत किया गया। राजकीय कन्या इंटर कॉलेज कोटद्वार की छात्राओं द्वारा गढ़वाली लोकभाषा में प्रस्तुत स्वागत गीत तथा हेरिटेज स्कूल के बच्चों की पक्षी एवं प्रकृति संरक्षण पर प्रस्तुति कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा कुल 61 विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया। इनमें 21 योजनाओं का शिलान्यास (अनुमानित लागत 8,172.78 लाख रुपये) तथा 40 योजनाओं का लोकार्पण (लागत 24,439.55 लाख रुपये) शामिल रहा। कुल मिलाकर 32,612.33 लाख रुपये की योजनाओं से क्षेत्रीय विकास को नई गति मिली।

मुख्यमंत्री ने फेस्टिवल परिसर में लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया, जहां पक्षियों की फोटो प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा लगाए गए स्थानीय उत्पादों के स्टॉल की सराहना करते हुए कहा कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 21वां दशक उत्तराखण्ड का दशक होगा और इसमें महिलाओं की भूमिका निर्णायक रहेगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि कोटद्वार क्षेत्र में बस टर्मिनल, आयुष चिकित्सालय, खोह नदी को प्रदूषण मुक्त करने हेतु एसटीपी स्थापना, मालन नदी पर 26 करोड़ रुपये से अधिक लागत से पुल निर्माण तथा कोटद्वार–नजीबाबाद फोर लेन परियोजना जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रगति पर हैं।

उन्होंने विकास संबंधी घोषणाएं करते हुए कहा कि हल्दूखाता में नगरीय पेयजल योजना की जीर्ण-शीर्ण पाइपलाइन का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। राजकीय इंटर कॉलेज कोटद्वार में कक्षा-कक्ष, पुस्तकालय, विज्ञान एवं कंप्यूटर कक्ष तथा चहारदीवारी का निर्माण कराया जाएगा। जीतपुर गांव में बाढ़ सुरक्षा कार्य, पीएचसी झंडीचौड़ में 108 एम्बुलेंस सेवा तथा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार में चहारदीवारी निर्माण की भी घोषणा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अनेक पक्षी प्रजातियां विलुप्ति के कगार पर हैं, जिनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैव विविधता से समृद्ध राज्य है, जहां लगभग 71 प्रतिशत भूभाग वन क्षेत्र से आच्छादित है और देश में पाई जाने वाली लगभग 1300 पक्षी प्रजातियों में से 400 से अधिक प्रजातियां उत्तराखण्ड में पाई जाती हैं।

विधानसभा अध्यक्षा एवं स्थानीय विधायक ऋतु खण्डूरी भूषण ने बर्ड वॉचिंग फेस्टिवल को इको-टूरिज्म और बर्ड-टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने इसे राज्य सरकार के वार्षिक कैलेंडर में शामिल कर प्रत्येक वर्ष 31 जनवरी को ‘बर्ड फेस्टिवल दिवस’ के रूप में मनाने का सुझाव दिया।

जिलाधिकारी ने कहा कि यह आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि जैव विविधता और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह फेस्टिवल आने वाले समय में कोटद्वार को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगा।

दो दिवसीय बर्ड वॉचिंग फेस्टिवल के पहले दिन लगभग 2500 से अधिक लोगों ने प्रतिभाग किया, जिनमें छात्र-छात्राएं, युवा, महिलाएं, बर्ड वॉचर एवं आम नागरिक शामिल रहे। फेस्टिवल के अंतर्गत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को अंतिम दिन पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. पद्मेश बुड़ाकोटी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, बर्ड वॉचर एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से की शिष्टाचार भेंट, कुशलक्षेम जाना

सीएम धामी ने अपने खेत में उत्पादित चावल श्री हरीश रावत को भेंट कर दिया आत्मीयता और सम्मान का संदेश

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ नेता हरीश रावत से उनके डिफेंस कॉलोनी, देहरादून स्थित आवास पर शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने हरदा का कुशलक्षेम जाना तथा उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।

भेंट के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आत्मीय प्रतीक के रूप में अपने खेत में उत्पादित चावल हरीश रावत को भेंट किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भेंट उत्तराखण्ड की कृषि परंपरा, किसानों की मेहनत तथा स्थानीय उत्पादों के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस स्नेहिल व्यवहार एवं आत्मीय भेंट के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी की यह पहल राजनीतिक परंपराओं में आपसी सम्मान, सद्भाव एवं शिष्टाचार का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करती है।

मुख्यमंत्री ने रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा की, युवाओं के कौशल विकास पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सचिवालय में कृषि, पशुपालन, पर्यटन एवं उद्योग क्षेत्रों से संबंधित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में प्रभावी कार्य किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के माध्यम से आम जनता को योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी जाए, ताकि पात्र व्यक्ति समय पर इनका लाभ उठा सकें।

मुख्यमंत्री ने युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने तथा उन्हें स्वरोजगार के लिए अधिकतम अवसर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग यह सुनिश्चित करें कि पात्र लोगों को योजनाओं का समय पर एवं पूर्ण लाभ मिले और साथ ही आवंटित बजट का शत-प्रतिशत आउटकम प्राप्त हो।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि उच्च स्तरीय बैठकों के कार्यवृत्त उन्नति पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड किए जाएं। सेब की अतिसघन बागवानी योजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि इस महत्वाकांक्षी योजना को प्रभावी ढंग से संचालित कर निर्धारित लक्ष्यों को समय से प्राप्त किया जाए तथा किसानों को अधिक से अधिक प्रोत्साहन दिया जाए। उन्होंने किसानों से संबंधित देयकों का भुगतान समय पर सुनिश्चित करने तथा उत्पादों का बेहतर मूल्य दिलाने पर भी जोर दिया। इसके साथ ही राज्य में कीवी उत्पादन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में शहद उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने हनी मिशन के अंतर्गत शहद उत्पादन को और अधिक प्रोत्साहित करने, ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन सुनिश्चित करने तथा बागवानी एवं मौन पालन के क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रहे राज्यों के अध्ययन हेतु अधिकारियों व विशेषज्ञों की टीमें भेजने के निर्देश दिए।

बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश के 29 उत्पादों को जी.आई. टैग प्राप्त हो चुका है, जिनमें से 18 कृषि एवं कृषि कल्याण से संबंधित हैं। इस वर्ष 25 अन्य उत्पादों को जी.आई. टैग के लिए चिन्हित किया जाएगा। राज्य में 134 करोड़ रुपये की लागत से लागू स्टेट मिलेट पॉलिसी के अंतर्गत मंडुवा, झंगोरा, रामदाना, कौणी एवं चीना को शामिल किया गया है। प्रथम चरण में 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल के 24 विकासखंडों तथा द्वितीय चरण में 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल के 44 विकासखंडों का चयन किया गया है। प्रथम चरण में 5 हजार से अधिक गांवों को आच्छादित करते हुए लगभग डेढ़ लाख कृषकों को लाभान्वित किया गया है। मिलेट फसलों की खरीद-बिक्री के लिए 216 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं तथा सहकारिता विभाग के अंतर्गत 20 करोड़ रुपये का रिवॉल्विंग फंड भी बनाया गया है। इस वित्तीय वर्ष में 5 हजार मीट्रिक टन के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 5,386 मीट्रिक टन मिलेट फसलों का क्रय किया जा चुका है।

बैठक में यह भी बताया गया कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना एवं मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 के अंतर्गत चार वर्षों में 32 हजार के लक्ष्य के मुकाबले 33,620 लाभार्थियों को 202.72 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई है। आगामी वर्ष में 9 हजार लोगों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। पर्यटन विभाग के अंतर्गत दीन दयाल उपाध्याय होम स्टे योजना के तहत चार वर्षों में 780 होम स्टे स्थापित किए गए हैं, जिनके लिए 188.58 करोड़ रुपये का वित्त पोषण किया गया है। वहीं वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना के अंतर्गत चार वर्षों में एक हजार से अधिक लोगों को लाभान्वित किया गया है, जिसमें 105 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि का वित्त पोषण हुआ है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत मत्स्य पालन क्षेत्र में 17,450 लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त हुआ है।