Thursday, October 15, 2026
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चमोली: 12 साल से बंद पड़ी स्वास्थ्य सुविधाओं के विरोध में सिमली से देहरादून कूच, 50 से अधिक गांवों के ग्रामीणों ने शुरू की पदयात्रा

महिला अस्पताल को पूरी तरह संचालित करने की मांग, मांग पूरी नहीं होने पर 2027 के विधानसभा चुनाव के बहिष्कार की चेतावनी

चमोली/देहरादून। उत्तराखंड के चमोली जिले के सिमली क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को लेकर ग्रामीणों और महिलाओं का आंदोलन तेज हो गया है। सिमली बेस अस्पताल को पूरी तरह संचालित कराने की मांग को लेकर 50 से अधिक गांवों के ग्रामीणों और महिलाओं ने देहरादून की ओर पदयात्रा शुरू कर दी है। सिमली बेस अस्पताल संघर्ष समिति के नेतृत्व में यह पदयात्रा रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को सिमली से शुरू हुई।

12 साल बाद भी अस्पताल पूरी तरह चालू नहीं

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि करीब 12 साल पहले निर्मित महिला अस्पताल (बेस अस्पताल) को पूरी तरह संचालित किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल के पूरी तरह चालू होने से क्षेत्र के लोगों, विशेषकर गर्भवती महिलाओं और अन्य महिला मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी। स्थानीय लोगों को इलाज के लिए दूर-दराज के अस्पतालों का रुख करने की मजबूरी से भी राहत मिलने की उम्मीद है।

पदयात्रा में शामिल ग्रामीणों और महिलाओं ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे। आंदोलनकारियों का कहना है कि क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग है और अब वे इसके समाधान के लिए निर्णायक संघर्ष कर रहे हैं।

संघर्ष समिति ने सरकार से की कार्रवाई की मांग

सिमली बेस अस्पताल संघर्ष समिति के संयोजक देवेंद्र सिंह के अनुसार, अस्पताल को पूरी तरह चालू कराने के लिए लंबे समय से संघर्ष किया जा रहा है, लेकिन स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है। इसी वजह से ग्रामीणों को मजबूर होकर देहरादून की ओर पदयात्रा करनी पड़ रही है।
ग्रामीणों की इस पदयात्रा के जरिए अब सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने और अस्पताल को पूरी तरह संचालित कराने की मांग को निर्णायक स्तर तक ले जाने की कोशिश की जा रही है।
अब देखना होगा कि 50 से अधिक गांवों के ग्रामीणों और महिलाओं की इस पदयात्रा के बाद शासन-प्रशासन उनकी मांग पर क्या कदम उठाता है और 12 साल पुराने अस्पताल को पूरी तरह चालू कराने की दिशा में कब तक ठोस कार्रवाई होती है।

अमित शाह का राहुल गांधी पर हमला, बोले- SIR को हार का बहाना न बनाएं, 2029 में भी प्रचंड हार का सामना करेगी कांग्रेस

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस को चुनावी हार के लिए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को जिम्मेदार ठहराने के बजाय आत्ममंथन करना चाहिए। शाह ने दावा किया कि कांग्रेस 2029 के लोकसभा चुनाव में लगातार चौथी बार हार का सामना करेगी, जबकि भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) भारी बहुमत के साथ सत्ता में लौटेगा।

SIR को लेकर राहुल गांधी पर साधा निशाना

13 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अमित शाह ने कहा कि SIR की प्रक्रिया 2024 के बाद शुरू हुई, जबकि कांग्रेस को कई राज्यों में लंबे समय से चुनावी हार का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने राहुल गांधी से पार्टी के प्रदर्शन पर आत्ममंथन करने की अपील की।

शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी चुनावी विफलताओं के लिए चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाती है, जबकि उसे जनता के बीच अपना समर्थन बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।

2029 के चुनाव को लेकर किया दावा

अमित शाह ने 2029 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस को लगातार चौथी हार के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने भाजपा और NDA की बड़ी जीत का भरोसा भी जताया। हालांकि, यह उनका राजनीतिक दावा है, भविष्य के चुनाव का परिणाम नहीं।

शाह ने अपने बयान में गुजरात, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पार्टी को अपनी राजनीतिक रणनीति और जनता के साथ संपर्क पर विचार करना चाहिए।

SIR के खिलाफ विपक्ष का विरोध जारी

अमित शाह की टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब राहुल गांधी और विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तथा SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध कर रहे हैं। राहुल गांधी ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण जरूरी है और विपक्ष चुनावी हार के कारणों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है।

सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट, सोना ₹706 और चांदी ₹1,954 हुई सस्ती

नई दिल्ली। घरेलू सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। सोने का भाव 706 रुपये प्रति 10 ग्राम घटकर करीब 1.48 लाख रुपये पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी की कीमत में 1,954 रुपये की गिरावट आई है।

सोने की कीमतों में आई इस गिरावट से खरीदारी करने वाले ग्राहकों को राहत मिल सकती है। वहीं, चांदी के भाव में कमी से भी बाजार में खरीदारी करने वालों को फायदा होने की उम्मीद है।

हालांकि, सोने और चांदी के वास्तविक भाव शहर, शुद्धता और स्थानीय सर्राफा बाजार के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। खरीदारी से पहले ग्राहकों को अपने शहर के ताजा रेट की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।

अंकिता भंडारी हत्याकांड: राहुल गांधी इंडिया गेट पर धरने में हुए शामिल, परिजनों से की मुलाकात

नई दिल्ली। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर बुधवार शाम लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इंडिया गेट पहुंचे और अंकिता के परिजनों के धरने में शामिल हुए। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अंकिता के परिवार ने सोमवार को दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद राहुल गांधी के कार्यालय से संपर्क किया था।

अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। 19 वर्षीय अंकिता की 18 सितंबर 2022 को हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रिजॉर्ट के प्रबंधक पुलकित आर्य को दोषी ठहराया गया। पुलकित आर्य, भाजपा के पूर्व नेता विनोद आर्य के बेटे हैं।

अंकिता के लापता होने के छह दिन बाद उनका शव बरामद हुआ था। मामले की जांच करने वाली उत्तराखंड पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने जांच में पाया था कि अंकिता पर कथित तौर पर यौन सेवाएं देने का दबाव बनाया जा रहा था, जिसका उन्होंने विरोध किया था। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर इस मामले ने राज्यभर में व्यापक आक्रोश पैदा किया था।

पुलकित आर्य को हत्या, यौन उत्पीड़न, साक्ष्य मिटाने और अनैतिक देह व्यापार (निवारण) अधिनियम से संबंधित विभिन्न प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया गया था।

विरोध प्रदर्शनों में भी सक्रिय रहे राहुल गांधी

रिपोर्ट के अनुसार, हाल के दिनों में राहुल गांधी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों में भी शामिल हुए हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में भी लिया था।

अंकिता भंडारी के परिजनों के धरने में राहुल गांधी की भागीदारी ऐसे समय में सामने आई है, जब यह मामला एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा में आया है। परिवार की मांगों और धरने से जुड़े अन्य विवरणों की पुष्टि आधिकारिक जानकारी के आधार पर की जानी बाकी है।

राहुल गांधी जाएंगे इंडिया गेट, अंकिता भंडारी के परिजनों से करेंगे मुलाकात

नई दिल्ली/देहरादून। कांग्रेस नेता राहुल गांधी इंडिया गेट पर अंकिता भंडारी के परिजनों से मुलाकात करेंगे। इस संबंध में सामने आई जानकारी के मुताबिक, राहुल गांधी अंकिता भंडारी के परिवार से मिलकर उनकी बात सुनेंगे।

उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर लंबे समय से न्याय की मांग उठती रही है। इस मामले में अंकिता के परिजनों और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से निष्पक्ष जांच और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की जाती रही है।

राहुल गांधी की प्रस्तावित मुलाकात को इस मामले में राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, मुलाकात के समय, कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी और चर्चा के संभावित मुद्दों की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती है।

उत्तराखंड में गुटखा, पान मसाला और निकोटिन युक्त खाद्य पदार्थों पर एक साल का प्रतिबंध, 13 अक्टूबर से लागू हुआ आदेश

देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने जनस्वास्थ्य के हित में बड़ा फैसला लेते हुए राज्य में गुटखा, पान मसाला और तंबाकू या निकोटिन युक्त खाद्य पदार्थों पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। इस फैसले के तहत ऐसे उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर रोक रहेगी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह प्रतिबंध 13 अक्टूबर 2026 से अगले एक साल तक पूरे उत्तराखंड में लागू रहेगा। इसके तहत किसी भी नाम से बेचे जाने वाले गुटखा, पान मसाला और प्रतिबंध के दायरे में आने वाले तंबाकू या निकोटिन युक्त खाद्य पदार्थों के उत्पादन, भंडारण, वितरण और बिक्री पर रोक लगाई गई है।

एक साल तक लागू रहेंगी पाबंदियां

सरकार के इस फैसले का उद्देश्य लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करना और तंबाकू तथा निकोटिन युक्त प्रतिबंधित खाद्य उत्पादों की उपलब्धता पर अंकुश लगाना है। प्रतिबंध के दायरे में आने वाले उत्पादों के कारोबार से जुड़े निर्माताओं, वितरकों और विक्रेताओं को निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।

नियमों का उल्लंघन करने पर हो सकती है कार्रवाई

प्रतिबंध लागू होने के बाद संबंधित विभागों की जिम्मेदारी होगी कि वे आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करें। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

सरकार के इस निर्णय के बाद राज्यभर में प्रतिबंधित उत्पादों के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर निगरानी महत्वपूर्ण होगी। आदेश की विस्तृत शर्तों और संबंधित विभागों के दिशा-निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

राहुल गांधी और INDIA गठबंधन की याचिका में 14 तकनीकी खामियां, कोर्ट फीस में 220 रुपये की कमी; नौ वकालतनामे भी नहीं मिले

नई दिल्ली। चुनाव आयोग और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर राहुल गांधी और INDIA गठबंधन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका को लेकर तकनीकी अड़चन सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका में कुल 14 कमियां दर्ज की हैं। इनमें कोर्ट फीस में 220 रुपये की कमी, नौ याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे संलग्न नहीं होने और दस्तावेजों के प्रारूप से जुड़ी आपत्तियां शामिल हैं।

याचिका में क्या-क्या कमियां मिलीं?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका की जांच के दौरान कई तकनीकी खामियां चिह्नित की हैं। इनमें प्रमुख रूप से:

  • कोर्ट फीस में कमी: याचिका में निर्धारित कोर्ट फीस से 220 रुपये कम जमा होने की बात कही गई है।
  • नौ वकालतनामे गायब: नौ याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे याचिका के साथ संलग्न नहीं पाए गए।
  • दस्तावेजों के प्रारूप पर आपत्ति: कागजात की फॉर्मेटिंग और निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़ी कमियां भी दर्ज की गई हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, रजिस्ट्री ने कुल 14 तकनीकी आपत्तियां दर्ज की हैं। इनका निस्तारण किए जाने के बाद ही याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

कमियां दूर होने के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री न्यायालय में दाखिल याचिकाओं की प्रारंभिक जांच करती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जरूरी दस्तावेज, निर्धारित शुल्क और प्रक्रियागत औपचारिकताएं पूरी हों। याचिका में दर्ज आपत्तियों को दूर करना सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने की प्रक्रिया का हिस्सा है।

फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि सभी तकनीकी कमियां दूर कर दी गई हैं या नहीं। साथ ही, याचिका पर सुनवाई की तारीख और मामले में आगे की कार्रवाई की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

यह मामला चुनाव आयोग और कथित वोट चोरी से जुड़े आरोपों के कारण राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। हालांकि, रजिस्ट्री की तकनीकी आपत्तियां अपने आप में याचिका में लगाए गए आरोपों की सत्यता या असत्यता पर कोई न्यायिक निष्कर्ष नहीं हैं।

डॉ. ढाल सिंह बिसेन होंगे उत्तराखंड के नए राज्यपाल, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने की नियुक्ति

देहरादून। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया है। वह लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) का स्थान लेंगे, जिन्होंने 15 सितंबर 2021 को उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में पदभार संभाला था।

कौन हैं डॉ. ढाल सिंह बिसेन?

डॉ. ढाल सिंह बिसेन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता हैं। उनका जन्म 14 मई 1952 को मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के पिपरिया में हुआ था। उन्होंने मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाई है।

ऐसा रहा राजनीतिक सफर

डॉ. ढाल सिंह बिसेन वर्ष 1990, 1993, 1998 और 2003 में मध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। वर्ष 2003 से 2005 तक उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य किया। इसके बाद वर्ष 2011 से 2013 तक वह मध्य प्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष रहे।

वर्ष 2019 में डॉ. बिसेन बालाघाट लोकसभा सीट से सांसद निर्वाचित हुए। अब उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में उनकी नियुक्ति के साथ राज्य को नया संवैधानिक प्रमुख मिलने जा रहा है।

राज्यपाल के रूप में उनकी नियुक्ति से संबंधित कार्यभार ग्रहण करने की तारीख और अन्य औपचारिकताओं की जानकारी आधिकारिक घोषणा के अनुसार स्पष्ट होगी।

इसके अलावा केरलम, तमिलनाडु, ओडिशा, कर्नाटक और सिक्किम में भी नए राज्यपालों की नियुक्ति की गई है।

छह राज्यों में नियुक्ति और फेरबदल

जारी जानकारी के अनुसार, राज्यपालों की नियुक्ति और स्थानांतरण का विवरण इस प्रकार है:

  1. ओम प्रकाश माथुर: सिक्किम के पूर्व राज्यपाल को केरलम का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
  2. राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर: केरलम के पूर्व राज्यपाल को तमिलनाडु का राज्यपाल बनाया गया है।
  3. ब्रज मोहन राम: ओडिशा के राज्यपाल नियुक्त किए गए हैं।
  4. डॉ. सुधा यादव: कर्नाटक की राज्यपाल नियुक्त की गई हैं।
  5. डॉ. ढाल सिंह बिसेन: उत्तराखंड के नए राज्यपाल नियुक्त किए गए हैं।
  6. दुष्यंत गौतम: सिक्किम के राज्यपाल नियुक्त किए गए हैं।

उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 साल पूरे होने पर 9 नवंबर को देहरादून आएंगे पीएम मोदी, ₹8,140 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की देंगे सौगात

देहरादून: उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 नवंबर 2026 को देहरादून पहुंच सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य के रजत जयंती समारोह के दौरान प्रधानमंत्री विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। कार्यक्रम दोपहर करीब 12:30 बजे शुरू होने की जानकारी सामने आई है।

₹8,140 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं पर रहेगा फोकस

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान उत्तराखंड को ₹8,140 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं की सौगात मिलने की संभावना है। इनमें करीब ₹930 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण किया जाएगा, जबकि ₹7,210 करोड़ से अधिक की योजनाओं का शिलान्यास प्रस्तावित है।

इन परियोजनाओं का संबंध पेयजल, सिंचाई, तकनीकी शिक्षा, ऊर्जा, शहरी विकास, खेल और कौशल विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से है। इन योजनाओं के माध्यम से राज्य में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और विकास कार्यों को गति देने पर जोर रहेगा।

राज्य स्थापना की रजत जयंती पर जारी होगा विशेष डाक टिकट

उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक स्मारक डाक टिकट जारी किए जाने की भी जानकारी है। यह डाक टिकट राज्य की रजत जयंती के अवसर को यादगार बनाने के लिए जारी किया जाएगा।

9 नवंबर को मनाया जाता है उत्तराखंड स्थापना दिवस

उत्तराखंड का गठन 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग होकर हुआ था। वर्ष 2026 में राज्य अपने गठन के 25 वर्ष पूरे कर रहा है। इसी उपलक्ष्य में प्रदेशभर में रजत जयंती से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री के प्रस्तावित दौरे को लेकर विकास परियोजनाओं और राज्य स्थापना दिवस समारोह पर विशेष ध्यान रहेगा। हालांकि, कार्यक्रम की अंतिम रूपरेखा और आधिकारिक विवरण की पुष्टि संबंधित सरकारी सूचना के आधार पर की जानी चाहिए।

नहीं रहे दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर, 75 साल की उम्र में निधन; ‘विश्वनाथ’ से ऐसे बने थे ‘नाना’

मुंबई/गोवा। हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार सुबह गोवा के डोना पाउला स्थित उनके आवास पर उन्हें बेहोशी की हालत में पाया गया। गंभीर कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक CPR देकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। अस्पताल में उन्हें सुबह करीब 5:20 बजे मृत घोषित किया गया।

विश्वनाथ गजानन पाटेकर था असली नाम

नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुड-जंजीरा में हुआ था। उनका असली नाम विश्वनाथ गजानन पाटेकर था। उनके पिता का नाम दिनकर पाटेकर और मां का नाम निर्मला पाटेकर था। मराठी परिवार में जन्मे नाना ने मुंबई के बांद्रा स्कूल ऑफ आर्ट से पढ़ाई की थी।

मां की सहेली ने दिया ‘नाना’ नाम

आज पूरी दुनिया उन्हें नाना पाटेकर के नाम से जानती है, लेकिन ‘नाना’ नाम उन्हें जन्म के साथ नहीं मिला था। एक पुराने इंटरव्यू में नाना ने खुद बताया था कि उनकी मां की एक सहेली थीं, जो उनके लिए बहन जैसी थीं। बचपन में वह उन्हें प्यार से ‘नाना-नाना’ कहकर बुलाती थीं। धीरे-धीरे यही नाम परिवार और आसपास के लोगों के बीच लोकप्रिय हो गया।

नाना ने बताया था कि उन्हें यह नाम बेहद पसंद था और उनके पासपोर्ट, आधार कार्ड और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में भी नाना पाटेकर नाम ही दर्ज था।

स्कूल में ‘विशू’ नाम से पुकारे जाते थे

स्कूल के दिनों में नाना को विश्वनाथ या ‘विशू’ कहकर बुलाया जाता था। उन्होंने बताया था कि अगर आज कोई उन्हें ‘विशू’ कहकर पुकारता है तो वह समझ जाते हैं कि सामने वाला उनके स्कूल के दिनों का कोई पुराना परिचित है।

समय के साथ ‘नाना’ नाम उनकी पहचान बन गया और विश्वनाथ पीछे छूट गया।

दमदार अभिनय से बनाई अलग पहचान

नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा के साथ-साथ रंगमंच पर भी अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी दमदार आवाज, तीखे संवाद और सहज लेकिन प्रभावशाली अभिनय ने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे विशिष्ट अभिनेताओं में शामिल किया। ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अब तक छप्पन’, ‘वेलकम’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा। उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले और भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से भी सम्मानित किया। 

एक साधारण नाम से बनी करोड़ों दिलों की पहचान

‘विश्वनाथ’ से ‘नाना’ बनने की उनकी कहानी जितनी सरल है, उतनी ही भावुक भी। मां की सहेली द्वारा प्यार से दिया गया एक घरेलू नाम आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गया। पर्दे पर अपने दमदार किरदारों से लोगों के दिलों में जगह बनाने वाले नाना पाटेकर का निधन भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति है।