देहरादून, 24 जुलाई। उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग के तत्वावधान में शुक्रवार को धर्मपुर डांडा स्थित आयोग कार्यालय में अध्यक्ष मुकेश कुमार की अध्यक्षता में दो दिवसीय जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किया गया। जनसुनवाई के दौरान कुल 47 प्रकरणों की सुनवाई की गई, जिनमें से 27 मामलों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया, जबकि शेष मामलों के शीघ्र समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए।
आयोग के अध्यक्ष मुकेश कुमार ने कहा कि पीड़ित व्यक्ति जिस विश्वास के साथ आयोग में अपनी शिकायत दर्ज कराता है, उसे न्याय दिलाना आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति समुदाय की समस्याओं के समाधान के लिए जल्द ही जिलों में वृहद स्तर पर जनसुनवाई शिविर आयोजित किए जाएंगे, ताकि लोगों की शिकायतों का स्थानीय स्तर पर समाधान हो सके और पात्र लाभार्थियों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी मिल सके।
जनसुनवाई में देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली, नैनीताल, रुद्रप्रयाग सहित विभिन्न जिलों से आए शिकायतकर्ताओं की समस्याओं को गंभीरता से सुना गया। प्रमुख शिकायतों में पेयजल कनेक्शन न मिलना, भूमि पर अवैध कब्जा, भूमि की पैमाइश, छात्रवृत्ति भुगतान, उत्पीड़न, कृषि भूमि का दाखिल-खारिज, आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा, भूमि का कब्जा दिलाना, पदोन्नति, सेवा बहाली, जातिगत भेदभाव तथा मृतक आश्रित प्रमाणपत्र जारी न होने जैसे मामले शामिल रहे।
अध्यक्ष मुकेश कुमार ने कहा कि आयोग का उद्देश्य अनुसूचित जाति समाज के पीड़ित और वंचित लोगों को त्वरित एवं प्रभावी न्याय उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि सक्षम अधिकारियों की जनसुनवाई में उपस्थिति से शिकायतों का त्वरित निस्तारण संभव हो पाता है। उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से नियमों के अनुरूप जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करने की अपील करते हुए कहा कि यदि प्रशासन संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करेगा तो लोगों को आयोग की शरण लेने की आवश्यकता कम पड़ेगी।
कार्यक्रम में आयोग के सदस्य विशाल मुखिया, भागीरथी कुंजवाल, सुनीता देवी, सचिव कविता टम्टा, विधि सलाहकार राजू मेहर, तीरपन सिंह सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।


