Monday, April 20, 2026
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मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान की अवधि 20 फरवरी तक बढ़ाई गई

कोई क्षेत्र नहीं रहेगा वंचित, सभी जिलों में पुनः लगेंगे जनसेवा कैंप

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में राज्य सरकार द्वारा जनसेवा को और अधिक सुदृढ़, प्रभावी एवं व्यापक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान और शासन को जन-जन के और अधिक निकट लाने के उद्देश्य से संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान की अवधि को आगे बढ़ा दिया गया है।

मुख्यमंत्री धामी के मार्गदर्शन में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह अभियान अब 20 फरवरी 2026 तक प्रदेश के सभी जनपदों में संचालित किया जाएगा। इससे पूर्व यह अभियान 31 जनवरी 2026 तक प्रस्तावित था, जिसे जनता की सकारात्मक प्रतिक्रिया तथा कैंपों में बड़ी संख्या में प्राप्त शिकायतों एवं सुझावों के प्रभावी निस्तारण को देखते हुए 20 दिनों के लिए विस्तारित किया गया है।

अब तक हजारों लोगों को मिला सीधा लाभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की जन-केन्द्रित सोच का परिणाम है कि 17 दिसंबर 2025 से प्रदेशभर में आयोजित किए जा रहे इन जनसेवा कैंपों के माध्यम से आम नागरिकों की समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया जा रहा है।

राजस्व, समाज कल्याण, स्वास्थ्य, शिक्षा, पुलिस, नगर निकाय सहित विभिन्न विभागों से संबंधित शिकायतों का त्वरित निस्तारण कर जनता को राहत पहुंचाई जा रही है।

छूटे हुए क्षेत्रों को भी किया जाएगा आच्छादित

मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन क्षेत्रों में अब तक अभियान के अंतर्गत कैंप आयोजित नहीं हो पाए हैं, उन्हें भी विस्तारित अवधि में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए, ताकि प्रदेश का कोई भी नागरिक इस जनसेवा अभियान से वंचित न रहे।

मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि शासन जनता के द्वार तक पहुंचे।

उन्होंने कहा,

“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार अभियान हमारी सरकार की जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। शासन को जनता के द्वार तक पहुंचाना और हर नागरिक की समस्या का समाधान करना हमारी प्राथमिकता है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रदेश का कोई भी क्षेत्र और कोई भी नागरिक इस अभियान से वंचित न रहे।”

जिलाधिकारियों को दिए गए निर्देश

मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार सभी जिलाधिकारियों को अभियान की कार्यक्रम-रूपरेखा शीघ्र सामान्य प्रशासन विभाग को उपलब्ध कराने तथा नियमानुसार कैंपों के आयोजन को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे अभियान को सुचारु, पारदर्शी और प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सके।

यह अभियान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार की संवेदनशील, जवाबदेह और जन-समर्पित शासन व्यवस्था का सशक्त उदाहरण बनकर उभर रहा है।

बजट 2026-27 से देश और राज्यों के विकास को मिलेगी नई दिशा : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

सीएम धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को विकासोन्मुखी बजट के लिए दी बधाई

देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय बजट 2026-27 की सराहना करते हुए कहा कि यह बजट देश और राज्यों के विकास को नई दिशा देने वाला है तथा सभी वर्गों के लिए नए अवसर सृजित करेगा। उन्होंने कहा कि बजट में आर्थिक विकास को गति देने, जन-आकांक्षाओं को पूरा करने और सबका साथ, सबका विकास के संकल्प को सशक्त करने पर विशेष जोर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को विकासोन्मुखी एवं समावेशी बजट प्रस्तुत करने के लिए बधाई देते हुए कहा कि इसमें किसानों, महिलाओं, युवाओं, वंचित वर्गों, छोटे उद्यमियों और पिछड़े तबकों के हितों का विशेष ध्यान रखा गया है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि बजट में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, उद्योग और आधारभूत संरचना के लिए किए गए प्रावधान पूरे देश के साथ-साथ उत्तराखंड के लिए भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होंगे। इससे राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि बजट में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के लिए पर्यावरण-अनुकूल माउंटेन ट्रेल्स विकसित करने की योजना पर्वतीय राज्यों के लिए महत्वपूर्ण पहल है। उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में बजट में पर्यटन और बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान दिया गया है, जो राज्य के समग्र विकास के लिए आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों, पशुपालन, उच्च मूल्य कृषि, पर्यटन और एमएसएमई सेक्टर के लिए किए गए प्रावधान राज्य की ग्रामीण और पर्वतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेंगे। साथ ही पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल तकनीक और बायोफार्मा क्षेत्र में निवेश से राज्य और देश दोनों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह बजट आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य और सबका साथ, सबका विकास की भावना को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार बजट में घोषित योजनाओं और प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए केंद्र सरकार के साथ पूर्ण सहयोग करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 न केवल देश की आर्थिक सुदृढ़ता को और मजबूत करेगा, बल्कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों को भी समान विकास के अवसर प्रदान करेगा।

प्रवासी उत्तराखण्डियों से संवाद का सशक्त मंच बना ‘उत्तराखण्ड महोत्सव रोहिणी–02’

लोक संस्कृति को विकास से जोड़ने की दिशा में सरकार निरंतर कार्यरत : मुख्यमंत्री धामी

महिला सशक्तिकरण, पर्यटन और संस्कृति संरक्षण से मजबूत हो रहा नया उत्तराखण्ड

प्रधानमंत्री के ‘विकास भी, विरासत भी’ मंत्र पर आगे बढ़ रहा राज्य

नई दिल्ली/रोहिणी: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली के रोहिणी में ‘हम सबका उत्तराखण्ड’ संस्था द्वारा आयोजित ‘उत्तराखण्ड महोत्सव रोहिणी–सीजन 02’ में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखण्डी, लोक कलाकार, युवा एवं महिलाएं उपस्थित रहीं। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर लोक कलाकारों का उत्साहवर्धन किया तथा उत्तराखण्ड की संस्कृति, परंपराओं और लोक विरासत को समर्पित इस आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा ‘उत्तराखण्ड के सितारे’ सम्मान से सुप्रसिद्ध सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर सौरभ जोशी, हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मनोज गोरखेला तथा प्रसिद्ध लोक गायिका कल्पना चौहान को सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन लोक कलाकारों को मंच और सम्मान देने के साथ-साथ समाज को सेवा, संस्कार और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति आज भी अपने गीतों, नृत्यों, वेशभूषा और परंपराओं के माध्यम से जीवंत है और देश-विदेश में बसे उत्तराखण्डी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से गहराई से जुड़े हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इससे बच्चों और युवाओं में अपनी बोली, संस्कृति और परंपराओं के प्रति गर्व की भावना विकसित होती है। लोकनृत्य और लोकगीत राज्य की सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

देवभूमि उत्तराखण्ड को आस्था, तप, त्याग और साधना की भूमि बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगा-यमुना एवं आदि कैलाश जैसे पवित्र स्थलों के कारण राज्य को विश्वभर में विशेष पहचान प्राप्त है। उन्होंने कहा कि स्वयं पहाड़ से जुड़े होने के कारण लोकसंस्कृति उनके जीवन और संस्कारों का अभिन्न हिस्सा रही है, इसी दृष्टिकोण से राज्य सरकार संस्कृति को विकास से जोड़ते हुए आगे बढ़ रही है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “विकास भी, विरासत भी” मंत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी सोच के तहत राज्य में धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों का पुनर्विकास किया जा रहा है। केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के पुनर्निर्माण से न केवल आस्था को मजबूती मिली है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं। मंदिर माला मिशन के माध्यम से धार्मिक स्थलों का संरक्षण और विकास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखण्ड आज वेडिंग डेस्टिनेशन, एडवेंचर टूरिज्म और फिल्म शूटिंग के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। विंटर टूरिज्म, ‘वेड इन उत्तराखण्ड’ और होम-स्टे जैसी पहलों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। कृषि, दुग्ध उत्पादन, मधु उत्पादन और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देकर ग्रामीण आजीविका को सशक्त किया जा रहा है।

महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लखपति दीदी योजना के माध्यम से बड़ी संख्या में महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। ‘एक जनपद–दो उत्पाद’ योजना और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड से उत्तराखण्ड के उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही है। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों की गुणवत्ता की विशेष सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद उत्तराखण्ड ने उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य की अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय, बजट, बिजली उत्पादन और स्वास्थ्य सुविधाओं में निरंतर सुधार हुआ है। पलायन रोकने, किसानों की आय बढ़ाने और युवाओं को रोजगार देने में राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है।

उन्होंने कहा कि सख्त कानूनों, पारदर्शी शासन और समान नागरिक संहिता के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य में सुशासन स्थापित हुआ है। प्रधानमंत्री द्वारा बताए गए “उत्तराखण्ड का दशक” को साकार करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ निरंतर कार्य कर रही है।

कोटद्वार में विकास और प्रकृति संरक्षण का ऐतिहासिक संगम, मुख्यमंत्री ने बर्ड वॉचिंग फेस्टिवल का किया शुभारंभ

326 करोड़ से अधिक की 61 विकास योजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास, बर्ड फेस्टिवल से कोटद्वार को मिली नई पहचान…

पौड़ी/31 जनवरी 2026: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कोटद्वार में आयोजित दो दिवसीय बर्ड वॉचिंग फेस्टिवल में प्रतिभाग कर विकास और पर्यावरण संरक्षण के समन्वय का संदेश दिया। इस अवसर पर उन्होंने जनपद के विभिन्न विकासखंडों के लिए 326 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 61 विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया।

मुख्यमंत्री कोटद्वार पहुंचने पर सबसे पहले दिव्यांग बालक-बालिकाओं से मिले और उनकी शिक्षा के संबंध में संवाद किया। इसके पश्चात उन्होंने सिद्धबली मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। सनेह क्षेत्र में आयोजित बर्ड वॉचिंग फेस्टिवल का विधिवत शुभारंभ करते हुए जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया द्वारा मुख्यमंत्री एवं अन्य अतिथियों का स्वागत किया गया। राजकीय कन्या इंटर कॉलेज कोटद्वार की छात्राओं द्वारा गढ़वाली लोकभाषा में प्रस्तुत स्वागत गीत तथा हेरिटेज स्कूल के बच्चों की पक्षी एवं प्रकृति संरक्षण पर प्रस्तुति कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा कुल 61 विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया। इनमें 21 योजनाओं का शिलान्यास (अनुमानित लागत 8,172.78 लाख रुपये) तथा 40 योजनाओं का लोकार्पण (लागत 24,439.55 लाख रुपये) शामिल रहा। कुल मिलाकर 32,612.33 लाख रुपये की योजनाओं से क्षेत्रीय विकास को नई गति मिली।

मुख्यमंत्री ने फेस्टिवल परिसर में लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया, जहां पक्षियों की फोटो प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा लगाए गए स्थानीय उत्पादों के स्टॉल की सराहना करते हुए कहा कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 21वां दशक उत्तराखण्ड का दशक होगा और इसमें महिलाओं की भूमिका निर्णायक रहेगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि कोटद्वार क्षेत्र में बस टर्मिनल, आयुष चिकित्सालय, खोह नदी को प्रदूषण मुक्त करने हेतु एसटीपी स्थापना, मालन नदी पर 26 करोड़ रुपये से अधिक लागत से पुल निर्माण तथा कोटद्वार–नजीबाबाद फोर लेन परियोजना जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रगति पर हैं।

उन्होंने विकास संबंधी घोषणाएं करते हुए कहा कि हल्दूखाता में नगरीय पेयजल योजना की जीर्ण-शीर्ण पाइपलाइन का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। राजकीय इंटर कॉलेज कोटद्वार में कक्षा-कक्ष, पुस्तकालय, विज्ञान एवं कंप्यूटर कक्ष तथा चहारदीवारी का निर्माण कराया जाएगा। जीतपुर गांव में बाढ़ सुरक्षा कार्य, पीएचसी झंडीचौड़ में 108 एम्बुलेंस सेवा तथा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार में चहारदीवारी निर्माण की भी घोषणा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अनेक पक्षी प्रजातियां विलुप्ति के कगार पर हैं, जिनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैव विविधता से समृद्ध राज्य है, जहां लगभग 71 प्रतिशत भूभाग वन क्षेत्र से आच्छादित है और देश में पाई जाने वाली लगभग 1300 पक्षी प्रजातियों में से 400 से अधिक प्रजातियां उत्तराखण्ड में पाई जाती हैं।

विधानसभा अध्यक्षा एवं स्थानीय विधायक ऋतु खण्डूरी भूषण ने बर्ड वॉचिंग फेस्टिवल को इको-टूरिज्म और बर्ड-टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने इसे राज्य सरकार के वार्षिक कैलेंडर में शामिल कर प्रत्येक वर्ष 31 जनवरी को ‘बर्ड फेस्टिवल दिवस’ के रूप में मनाने का सुझाव दिया।

जिलाधिकारी ने कहा कि यह आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि जैव विविधता और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह फेस्टिवल आने वाले समय में कोटद्वार को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगा।

दो दिवसीय बर्ड वॉचिंग फेस्टिवल के पहले दिन लगभग 2500 से अधिक लोगों ने प्रतिभाग किया, जिनमें छात्र-छात्राएं, युवा, महिलाएं, बर्ड वॉचर एवं आम नागरिक शामिल रहे। फेस्टिवल के अंतर्गत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को अंतिम दिन पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. पद्मेश बुड़ाकोटी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, बर्ड वॉचर एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से की शिष्टाचार भेंट, कुशलक्षेम जाना

सीएम धामी ने अपने खेत में उत्पादित चावल श्री हरीश रावत को भेंट कर दिया आत्मीयता और सम्मान का संदेश

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ नेता हरीश रावत से उनके डिफेंस कॉलोनी, देहरादून स्थित आवास पर शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने हरदा का कुशलक्षेम जाना तथा उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।

भेंट के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आत्मीय प्रतीक के रूप में अपने खेत में उत्पादित चावल हरीश रावत को भेंट किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भेंट उत्तराखण्ड की कृषि परंपरा, किसानों की मेहनत तथा स्थानीय उत्पादों के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस स्नेहिल व्यवहार एवं आत्मीय भेंट के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी की यह पहल राजनीतिक परंपराओं में आपसी सम्मान, सद्भाव एवं शिष्टाचार का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करती है।

मुख्यमंत्री ने रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा की, युवाओं के कौशल विकास पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सचिवालय में कृषि, पशुपालन, पर्यटन एवं उद्योग क्षेत्रों से संबंधित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में प्रभावी कार्य किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के माध्यम से आम जनता को योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी जाए, ताकि पात्र व्यक्ति समय पर इनका लाभ उठा सकें।

मुख्यमंत्री ने युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने तथा उन्हें स्वरोजगार के लिए अधिकतम अवसर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग यह सुनिश्चित करें कि पात्र लोगों को योजनाओं का समय पर एवं पूर्ण लाभ मिले और साथ ही आवंटित बजट का शत-प्रतिशत आउटकम प्राप्त हो।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि उच्च स्तरीय बैठकों के कार्यवृत्त उन्नति पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड किए जाएं। सेब की अतिसघन बागवानी योजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि इस महत्वाकांक्षी योजना को प्रभावी ढंग से संचालित कर निर्धारित लक्ष्यों को समय से प्राप्त किया जाए तथा किसानों को अधिक से अधिक प्रोत्साहन दिया जाए। उन्होंने किसानों से संबंधित देयकों का भुगतान समय पर सुनिश्चित करने तथा उत्पादों का बेहतर मूल्य दिलाने पर भी जोर दिया। इसके साथ ही राज्य में कीवी उत्पादन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में शहद उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने हनी मिशन के अंतर्गत शहद उत्पादन को और अधिक प्रोत्साहित करने, ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन सुनिश्चित करने तथा बागवानी एवं मौन पालन के क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रहे राज्यों के अध्ययन हेतु अधिकारियों व विशेषज्ञों की टीमें भेजने के निर्देश दिए।

बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश के 29 उत्पादों को जी.आई. टैग प्राप्त हो चुका है, जिनमें से 18 कृषि एवं कृषि कल्याण से संबंधित हैं। इस वर्ष 25 अन्य उत्पादों को जी.आई. टैग के लिए चिन्हित किया जाएगा। राज्य में 134 करोड़ रुपये की लागत से लागू स्टेट मिलेट पॉलिसी के अंतर्गत मंडुवा, झंगोरा, रामदाना, कौणी एवं चीना को शामिल किया गया है। प्रथम चरण में 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल के 24 विकासखंडों तथा द्वितीय चरण में 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल के 44 विकासखंडों का चयन किया गया है। प्रथम चरण में 5 हजार से अधिक गांवों को आच्छादित करते हुए लगभग डेढ़ लाख कृषकों को लाभान्वित किया गया है। मिलेट फसलों की खरीद-बिक्री के लिए 216 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं तथा सहकारिता विभाग के अंतर्गत 20 करोड़ रुपये का रिवॉल्विंग फंड भी बनाया गया है। इस वित्तीय वर्ष में 5 हजार मीट्रिक टन के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 5,386 मीट्रिक टन मिलेट फसलों का क्रय किया जा चुका है।

बैठक में यह भी बताया गया कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना एवं मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 के अंतर्गत चार वर्षों में 32 हजार के लक्ष्य के मुकाबले 33,620 लाभार्थियों को 202.72 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई है। आगामी वर्ष में 9 हजार लोगों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। पर्यटन विभाग के अंतर्गत दीन दयाल उपाध्याय होम स्टे योजना के तहत चार वर्षों में 780 होम स्टे स्थापित किए गए हैं, जिनके लिए 188.58 करोड़ रुपये का वित्त पोषण किया गया है। वहीं वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना के अंतर्गत चार वर्षों में एक हजार से अधिक लोगों को लाभान्वित किया गया है, जिसमें 105 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि का वित्त पोषण हुआ है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत मत्स्य पालन क्षेत्र में 17,450 लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त हुआ है।

फटी विंडपाइप बनी मौत का कारण, मैक्स हॉस्पिटल देहरादून के डॉक्टरों ने बचाई महिला की जान

देहरादून से एक निजी अस्पताल की बड़ी मेडिकल सफलता सामने आई है, जहां मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून के डॉक्टरों ने समय पर सटीक हस्तक्षेप कर एक महिला की जान बचा ली। हरिद्वार के पास हुए एक सड़क हादसे में 45 वर्षीय महिला की सांस की नली (विंडपाइप) लगभग पूरी तरह फट गई थी, जिसे चिकित्सकीय भाषा में अत्यंत दुर्लभ और जानलेवा चोट माना जाता है।

पीड़िता पूनम, जो पेशे से एक स्कूल शिक्षिका हैं, मोटरसाइकिल पर पीछे बैठी थीं। यात्रा के दौरान उनका दुपट्टा अचानक पहिए में फंस गया, जिससे गर्दन पर जोरदार झटका लगा और गंभीर आंतरिक चोटें आईं। प्रारंभिक उपचार के बाद भी जब उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई, तो उन्हें तत्काल मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून रेफर किया गया।

अस्पताल पहुंचते ही चिकित्सकों ने मरीज की स्थिति की गंभीरता को समझते हुए त्वरित जांच शुरू की। सिर और गर्दन में गंभीर चोटें, त्वचा के नीचे हवा भरना और सीने में हवा का रिसाव जैसे लक्षण स्पष्ट रूप से एयरवे इंजरी की ओर संकेत कर रहे थे। अगले 24 घंटों में मरीज की सांस लेने की समस्या और बढ़ गई, जिससे स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो गई।

सीटी स्कैन जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि मरीज की विंडपाइप लगभग पूरी तरह से फट चुकी थी। इसके बाद डॉ. अरविंद मक्कर, डायरेक्टर कार्डियक, थोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी के नेतृत्व में एक मल्टी-डिसिप्लिनरी मेडिकल टीम ने तत्काल इमरजेंसी सर्जरी कर फटी हुई विंडपाइप की सफल मरम्मत की। इस जटिल सर्जरी में डॉ. इरम खान, सीनियर कंसल्टेंट ईएनटी सर्जरी की भी अहम भूमिका रही।

डॉ. अरविंद मक्कर ने बताया कि शुरुआती सुधार के बाद मरीज के गले में सूजन और सीने में दोबारा हवा का रिसाव देखा गया, जिससे सांस लेने में दिक्कत बढ़ने लगी। ऐसी स्थिति में डॉक्टरों ने एहतियातन अस्थायी ट्रेकियोस्ट्रोमी की, ताकि एयरवे सुरक्षित रहे और मरम्मत किए गए हिस्से पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। यह निर्णय मरीज की सुरक्षित रिकवरी में निर्णायक साबित हुआ।

डॉ. मक्कर ने कहा, “विंडपाइप में इस प्रकार की चोट अत्यंत दुर्लभ होती है और यदि समय पर पहचान न हो तो यह जानलेवा सिद्ध हो सकती है। इस मामले में एयरवे लगभग पूरी तरह क्षतिग्रस्त था, जिससे डायग्नोसिस और मैनेजमेंट दोनों ही अत्यंत चुनौतीपूर्ण थे। यह सफलता त्वरित निर्णय, उन्नत सर्जिकल तकनीक और विभिन्न विशेषज्ञों के समन्वय का परिणाम है।”

वर्तमान में मरीज की स्थिति स्थिर है और वह तेजी से स्वस्थ होकर सामान्य जीवन की ओर लौट रही हैं।

यह मामला एक बार फिर प्रमाणित करता है कि मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून अपनी अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर सुविधाओं, उन्नत डायग्नोस्टिक तकनीक और अनुभवी चिकित्सकों की टीम के बल पर दुर्लभ और जटिल मेडिकल आपात स्थितियों को सफलतापूर्वक संभालने में सक्षम है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 1035 सहायक अध्यापकों को सौंपे नियुक्ति पत्र

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को राजकीय दून मेडिकल कॉलेज, पटेलनगर, देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में 1035 सहायक अध्यापक (प्राथमिक शिक्षा) को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इनमें 17 विशेष शिक्षक भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने सभी नव-नियुक्त अध्यापकों को शुभकामनाएं देते हुए आशा व्यक्त की कि वे राज्य में शिक्षा के स्तर को और अधिक सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से नव-नियुक्त शिक्षकों के कंधों पर उत्तराखंड के भविष्य को संवारने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी आ गई है। जब किसी बच्चे को गुणवत्तापूर्ण और संस्कारयुक्त शिक्षा मिलती है, तो वह न केवल अपना जीवन संवारता है, बल्कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में भी अमूल्य योगदान देता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक देश के उज्ज्वल भविष्य के शिल्पकार होते हैं।

मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे बच्चों को उत्कृष्ट शिक्षा देने के साथ-साथ उनमें समाज, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध भी विकसित करें, जिससे वे शिक्षित होने के साथ संस्कारवान और जिम्मेदार नागरिक बन सकें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, तकनीक-समर्थ और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। विद्यालयों के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने, शिक्षक प्रशिक्षण और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में व्यापक सुधार किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में पिछले साढ़े चार वर्षों में 28 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि युवाओं के आत्मसम्मान और विश्वास की जीत है। इस अवधि में दी गई नौकरियां राज्य गठन के बाद पूर्ववर्ती सरकारों की तुलना में दो गुना से भी अधिक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार युवाओं के भविष्य से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ नहीं होने देगी।

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में शिक्षा विभाग में 11 हजार 500 से अधिक नियुक्तियां की गई हैं, जबकि 3 हजार 500 से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया वर्तमान में गतिमान है। उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और गुणवत्ता सुधार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

कार्यक्रम में शिक्षा महानिदेशक दीप्ति सिंह, निदेशक माध्यमिक शिक्षा डॉ. मुकुल कुमार सती, निदेशक प्राथमिक शिक्षा अजय नौडियाल, निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण वंदना गर्ब्याल, अपर निदेशक कंचन देवराड़ी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे

मुख्यमंत्री धामी से केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा की शिष्टाचार भेंट, सड़क व आधारभूत ढांचे के विकास पर हुई अहम चर्चा

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से आज मुख्यमंत्री आवास में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार के राज्य मंत्री अजय टम्टा ने शिष्टाचार भेंट की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी एवं केंद्रीय राज्य मंत्री श्री अजय टम्टा के मध्य उत्तराखंड में सड़क, राष्ट्रीय राजमार्गों तथा आधारभूत ढांचे के विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। बैठक में प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार, सड़क सुरक्षा, पर्वतीय क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी के साथ-साथ चल रही एवं प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं की प्रगति पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र सरकार के सहयोग से उत्तराखंड में सड़क एवं परिवहन अवसंरचना को सुदृढ़ करने हेतु निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि मजबूत और सुरक्षित सड़क नेटवर्क से प्रदेश के आर्थिक विकास को गति मिलेगी तथा पर्यटन, चारधाम यात्रा और सीमावर्ती क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को भी नई मजबूती प्राप्त होगी।

केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा ने उत्तराखंड के विकास के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर क्रियान्वित कर रहा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि भविष्य में भी उत्तराखंड को सड़क एवं परिवहन क्षेत्र में हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।

पांवटा साहिब–बल्‍लूपुर चार लेन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना: सुरक्षित, सुगम और भविष्य-उन्मुख कनेक्टिविटी की दिशा में बड़ा कदम

एनएच-07 कॉरिडोर से देहरादून को यातायात जाम से राहत, यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी; उत्तराखंड–हिमाचल के बीच सुदृढ़ संपर्क

पांवटा साहिब–देहरादून कॉरिडोर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है, जिस पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री, औद्योगिक तथा वाणिज्यिक वाहन आवागमन करते हैं। वर्तमान में देहरादून राजधानी तथा पांवटा साहिब–बल्‍लूपुर कॉरिडोर से जुड़े पर्यटन और औद्योगिक क्षेत्रों में भारी यातायात दबाव देखा जा रहा है, जिसके चलते यात्रा समय बढ़ने, ईंधन की अधिक खपत और यातायात अव्यवस्था जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं।

बढ़ते यातायात दबाव, सीमित सड़क चौड़ाई, रिबन डेवलपमेंट और तीव्र शहरी विस्तार के कारण यह मार्ग लंबे समय से जाम और सड़क सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा था। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, भारत (एनएचएआई) द्वारा पांवटा साहिब–बल्‍लूपुर चार लेन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना (एनएच-07) को स्वीकृति प्रदान की गई।

परियोजना का संक्षिप्त विवरण

एनएच-07 के अंतर्गत पांवटा साहिब–बल्‍लूपुर परियोजना में कुल 44.800 किलोमीटर लंबे खंड का उन्नयन एवं चार-लेनीकरण किया जा रहा है। यह मार्ग पांवटा साहिब (हिमाचल प्रदेश) से प्रारंभ होकर बल्‍लूपुर चौक, देहरादून (उत्तराखंड) तक विस्तारित है। यह दैनिक यात्रियों, औद्योगिक-वाणिज्यिक यातायात और पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग होने के साथ-साथ चारधाम यात्रा के प्रथम धाम यमुनोत्री तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करता है।

मौजूदा सड़क की कुल लंबाई लगभग 52 किलोमीटर (किमी 97.00 से किमी 148.80) है। प्रस्तावित चार-लेन परियोजना के तहत लगभग 25 किलोमीटर ग्रीनफील्ड हाईवे विकसित किया गया है, जो पांवटा साहिब, हरबर्टपुर, सहसपुर, सेलाकुई और सुधोवाला जैसे भीड़भाड़ वाले कस्बों को बायपास करता है। इससे मार्ग की लंबाई में लगभग 7 किलोमीटर की कमी आई है, जिससे यात्रा समय और ईंधन खपत में उल्लेखनीय बचत होगी तथा सड़क उपयोगकर्ताओं को अधिक सुरक्षित और सुगम अनुभव मिलेगा।

दिल्ली–देहरादून इकोनोमिक कॉरिडोर से एकीकरण

यातायात जाम की समस्या के समाधान हेतु एनएचएआई द्वारा इस कॉरिडोर के उन्नयन के साथ-साथ एक ग्रीनफील्ड हाईवे का विकास किया जा रहा है, जो दिल्ली–देहरादून इकोनोमिक कॉरिडोर का विस्तार होगा। इस एकीकरण से देहरादून शहर में प्रवेश करने वाले थ्रू-ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्ग मिलेगा, जिससे शहर को यातायात जाम से बड़ी राहत प्राप्त होगी।

परियोजना विभाजन एवं लागत

परियोजना को हाइब्रिड एन्यूटी मोड (HAM) के तहत दो पैकेजों में क्रियान्वित किया जा रहा है—

पैकेज-I: पांवटा साहिब से मेदनीपुर (18.700 किमी)

लागत ₹553.21 करोड़। इसके अंतर्गत 1,175 मीटर लंबा चार-लेन यमुना नदी पुल निर्मित किया गया है, जो एक प्रमुख इंजीनियरिंग उपलब्धि है।

पैकेज-II: मेदनीपुर से बल्‍लूपुर, देहरादून (26.100 किमी)

लागत ₹1,093 करोड़। इसमें अनेक अंडरपास, सर्विस रोड और शहरी बायपास खंड शामिल हैं, जिससे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में यातायात सुचारु रहेगा।

परियोजना की कुल लागत ₹1,646.21 करोड़ है, जिसमें भूमि अधिग्रहण, वन स्वीकृति और यूटिलिटी शिफ्टिंग शामिल है। कुल 25 गांव प्रभावित हैं—21 उत्तराखंड और 4 हिमाचल प्रदेश में।

वर्तमान स्थिति

दोनों पैकेजों के अंतर्गत सभी प्रमुख पुल, अंडरपास और संरचनात्मक कार्य पूर्ण हो चुके हैं। सीमित हिस्सों में आरई वॉल (Reinforced Earth Wall) और अंतिम चरण का पेवमेंट कार्य प्रगति पर है, जिसे फरवरी 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। सड़क सुरक्षा ऑडिट के बाद 31.50 किलोमीटर पूर्ण खंड पर वाणिज्यिक यातायात प्रारंभ कर दिया गया है।

प्रमुख इंजीनियरिंग एवं सड़क सुरक्षा विशेषताएं

  • 1,175 मीटर लंबा चार-लेन यमुना नदी पुल
  • 105 मीटर लंबा चार-लेन आसन नदी पुल
  • ऊंचे तटबंधों पर थ्री-बीम क्रैश बैरियर
  • एंटी-ग्लेयर स्क्रीन और उन्नत प्रकाश व्यवस्था
  • 24×7 PTZ कैमरों से निगरानी
  • आधुनिक साइनएज व रोड मार्किंग
  • टेंसर तकनीक से बिटुमिन खपत में कमी
  • ढलान सुरक्षा और व्यापक पौधारोपण से हरित कॉरिडोर

जनसामान्य को लाभ

परियोजना पूर्ण होने पर पांवटा साहिब से देहरादून का यात्रा समय लगभग 2 घंटे से घटकर करीब 35 मिनट रह जाएगा। देहरादून शहर को यातायात जाम से बड़ी राहत मिलेगी, दिल्ली–देहरादून इकोनोमिक कॉरिडोर से बेहतर संपर्क बनेगा, तथा पर्यटन, व्यापार, उद्योग और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा। दीर्घकाल में यह कॉरिडोर प्रस्तावित देहरादून–मसूरी कनेक्टिविटी से भी जुड़ेगा।

एनएचएआई सुरक्षित, स्थायी और भविष्य-उन्मुख राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। पांवटा साहिब–बल्‍लूपुर चार लेन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना क्षेत्रीय संपर्क को सुदृढ़ करने और आमजन को सुगम व सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सिद्ध होगी।