Wednesday, November 4, 2026
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MBA छात्रा के लापता होने के छह दिन बाद भी सुराग नहीं, 150 सदस्यीय टीम चला रही सर्च ऑपरेशन

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उत्तरकाशी, 11 जून। उत्तराखंड के प्रसिद्ध ट्रैकिंग स्थल दयारा बुग्याल में ट्रैकिंग के दौरान लापता हुई 24 वर्षीय एमबीए छात्रा बबीता पांडे की तलाश में व्यापक खोज अभियान जारी है। छात्रा के छह दिन से अधिक समय से लापता रहने के बाद पुलिस ने उसके साथ ट्रैक पर गए दोनों दोस्तों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई परिजनों की शिकायत के आधार पर की गई है।

बबीता पांडे अपने दो मित्रों हरमनपाल सिंह (ऊधमसिंह नगर, उत्तराखंड) और हरमनप्रीत सिंह (शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश) के साथ 25 मई को देहरादून पहुंची थीं। इसके बाद तीनों ने हर्षिल, गंगोत्री और आसपास के पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया। उत्तरकाशी के पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय के अनुसार, 28 मई को वे रैथल गांव पहुंचे और वहीं रुके। रैथल में लगे सीसीटीवी कैमरों में उन्हें अंतिम बार देखा गया था।

29 मई को तीनों ने रैथल से दयारा बुग्याल के लिए ट्रैकिंग शुरू की और गोई बेस कैंप में रात बिताई। पुलिस के अनुसार, आधी रात के आसपास बबीता पांडे कैंप से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गईं। इसके बाद से उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

छात्रा की तलाश के लिए सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा प्रतिवादन बल (एनडीआरएफ), पुलिस, वन विभाग और जिला आपदा प्रबंधन की संयुक्त 150 सदस्यीय टीम लगातार अभियान चला रही है। खोज अभियान में स्निफर डॉग्स और ड्रोन की भी मदद ली जा रही है। घने जंगलों, ट्रैकिंग मार्गों और गुफाओं में लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

गोई कैंप के समीप स्थित एक झील में भी छह सदस्यीय गोताखोर टीम द्वारा तलाश की जा रही है। पुलिस ने बबीता की तस्वीर सोशल मीडिया पर जारी कर आम जनता से सहयोग की अपील की है। किसी भी प्रकार की सूचना मिलने पर पुलिस हेल्पलाइन नंबर 01374-222116, 9411112863, 8193990347 अथवा परिजनों के नंबर 7465949032 पर संपर्क करने का अनुरोध किया गया है।

इस मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में पाया गया कि ट्रैकिंग एजेंसी ‘प्रो माउंटेन’ ने बबीता और उनके साथियों को फर्जी परमिट के आधार पर ट्रैक पर भेजा था। इसके बाद एजेंसी का पंजीकरण निलंबित कर दिया गया है। एजेंसी से जुड़े ट्रैकिंग गाइड और अन्य व्यक्तियों से भी पूछताछ की जा रही है।

जिला पर्यटन अधिकारी के.के. जोशी ने बताया कि जांच में सामने आया है कि बबीता और उनके साथियों के नाम से आधिकारिक पर्यटन पोर्टल पर कोई वैध डिजिटल परमिट जारी नहीं किया गया था। आरोप है कि एजेंसी ने सरकारी नियमों और प्रतिदिन 150 ट्रैकर्स की निर्धारित सीमा को दरकिनार करते हुए एक पुराने और समाप्त हो चुके परमिट पर इनके नाम चिपकाकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे।

जांच में यह भी सामने आया कि चेकपोस्ट पर परमिट के क्यूआर कोड को स्कैन करने पर पूर्व में ट्रैकिंग कर चुके अन्य लोगों का डेटा सामने आया। अधिकारियों का कहना है कि इस फर्जीवाड़े के कारण शुरुआती चरण में रेस्क्यू टीमों को ट्रैकर्स और संबंधित एजेंसी की पहचान करने में कठिनाई हुई, जिससे खोज अभियान प्रभावित हुआ।

पुलिस अब इस मामले में व्यक्तिगत विवाद, आपराधिक साजिश या किसी अन्य संदिग्ध गतिविधि के पहलुओं की भी गहन जांच कर रही है। फिलहाल बबीता पांडे की तलाश जारी है और प्रशासन को उम्मीद है कि जल्द ही इस रहस्यमयी गुमशुदगी से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।

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