Wednesday, February 25, 2026
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संस्कृत प्रतिभाओं को सम्मान, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दी छात्रवृत्तियाँ और किया ई-संस्कृत संभाषण शिविर का शुभारंभ

देहरादून। सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने गार्गी बालिका संस्कृत छात्रवृत्ति तथा डॉ. भीमराव अंबेडकर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति संस्कृत छात्रवृत्ति विद्यार्थियों को प्रदान की।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षा स्वाध्याय केन्द्र एवं ई-संस्कृत संभाषण शिविर का वर्चुअल शुभारंभ किया। साथ ही उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के त्रैमासिक पत्र संस्कृत वार्ता का विमोचन भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड की पहचान केवल ऊँचे पर्वतों और ऐतिहासिक मंदिरों से ही नहीं, बल्कि ज्ञान और आस्था की भाषा देववाणी संस्कृत से भी है। वेदों, उपनिषदों, रामायण, महाभारत, आयुर्वेद, खगोलशास्त्र, गणित और दर्शनशास्त्र जैसे समृद्ध ज्ञान की जड़ें संस्कृत में निहित हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत हमारे अतीत की धरोहर ही नहीं, बल्कि भविष्य की संभावना भी है।

उन्होंने संस्कृत की वैज्ञानिकता का उल्लेख करते हुए महर्षि पाणिनि द्वारा रचित अष्टाध्यायी को विश्व के भाषाविदों के लिए आज भी आश्चर्य का विषय बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में संस्कृत के वैज्ञानिक व्याकरण पर शोध किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन हेतु निरंतर कार्य हो रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से संस्कृत को आधुनिक और व्यवहारिक भाषा के रूप में स्थापित करने के प्रयास किए गए हैं। एआई तकनीक के माध्यम से संस्कृत ग्रंथों को नए स्वरूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सदियों से संस्कृत अध्ययन और शोध का केंद्र रहा है। राज्य में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया गया है और सभी जनपदों में आदर्श संस्कृत ग्राम स्थापित किए गए हैं। ‘गार्गी संस्कृत बालिका छात्रवृत्ति योजना’ की शुरुआत भी राज्य में पहली बार की गई है।

संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अनेक नवाचार किए गए हैं। संस्कृत विश्वविद्यालय में सुविधाओं का विस्तार किया गया है और प्रत्येक जनपद में संस्कृत ग्राम स्थापित किए गए हैं।

इस अवसर पर विधायक सविता कपूर, खजान दास, सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक कुमार, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकान्त पाण्डेय एवं निदेशक संस्कृत शिक्षा कंचन देवराड़ी सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

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