लंदन, 17 अक्टूबर। ब्रिटेन की राजधानी लंदन में 16 अक्टूबर 2026 को भारतीय उच्चायोग (इंडिया हाउस) के बाहर भारत सरकार के विरोध और समर्थन में प्रदर्शन हुए। एक ओर कुछ संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की नीतियों और भारत में चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर विरोध जताया, वहीं दूसरी ओर भारतीय प्रवासी समुदाय के मोदी समर्थक सदस्यों ने सरकार के समर्थन में जवाबी प्रदर्शन किया।
लोकतांत्रिक संस्थाओं और SIR को लेकर विरोध
प्रदर्शन में कांग्रेस समर्थित नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI UK) से जुड़े समूहों के शामिल होने की जानकारी दी गई। प्रदर्शनकारियों ने भारत में लोकतांत्रिक संस्थाओं, चुनावी प्रक्रियाओं और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं।
प्रदर्शनकारियों ने भारतीय सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे उठाए।
मोदी समर्थकों ने किया जवाबी प्रदर्शन
इंडिया हाउस के बाहर ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थक भारतीय प्रवासियों ने जवाबी रैली निकाली। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार के समर्थन में नारे लगाए। समर्थक समूहों का कहना था कि विदेशी धरती पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिशों का विरोध किया जाना चाहिए।
इस तरह एक ही स्थान पर सरकार के विरोध और समर्थन में जुटे समूहों के बीच राजनीतिक मतभेद खुलकर सामने आए।
तनाव बढ़ने पर पुलिस ने संभाली स्थिति
प्रदर्शन के दौरान दोनों पक्षों की नारेबाजी तेज होने और कुछ मामूली झड़पों की स्थिति बनने पर लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने हस्तक्षेप किया। पुलिस ने दोनों समूहों को अलग-अलग रखा और जहां जरूरत पड़ी, वहां कुछ लोगों को मौके से दूर ले गई।
पुलिस की कार्रवाई का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच टकराव रोकना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना था।
भारत से जुड़े राजनीतिक मुद्दे विदेश में भी चर्चा में
लंदन में हुए इन प्रदर्शनों ने भारत की घरेलू राजनीति, लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दों को विदेश में भी चर्चा के केंद्र में ला दिया। एक तरफ प्रदर्शनकारियों ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए, तो दूसरी ओर मोदी समर्थकों ने सरकार के पक्ष में अपनी बात रखी।





