Sunday, November 8, 2026
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दीपावली पर वीर जवानों के बीच पहुंचे CM धामी, अपने हाथों से खिलाई मिठाई; बोले- सैनिकों के त्याग से रोशन होते हैं हमारे घरों के दीप

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गढ़ीकैंट में गढ़वाल रेजीमेंट के जवानों के साथ मुख्यमंत्री ने मनाई दीपावली, सैनिक परिवार से जुड़ी यादें साझा कर हुए भावुक

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को गढ़वाल ग्रीन्स प्रशिक्षण मैदान, गढ़ीकैंट में आयोजित दीपावली मिलन कार्यक्रम में वीर जवानों के साथ दीपावली की खुशियां साझा कीं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने जवानों को अपने हाथों से मिठाई खिलाकर दीपावली की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सैनिकों से आत्मीय संवाद करते हुए देश की सुरक्षा के लिए उनके साहस, शौर्य और समर्पण की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गढ़वाल रेजीमेंट के वीर जवानों के बीच पहुंचकर उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है, मानो वह अपने परिवार के साथ दीपावली मना रहे हों। उन्होंने कहा कि त्योहारों की वास्तविक खुशी अपनों के बीच होती है और देश के सैनिक भी उनके परिवार का हिस्सा हैं। जब देशवासी अपने घरों में परिवार के साथ दीपावली मनाते हैं, उस समय हमारे वीर जवान सीमाओं पर मुस्तैद रहकर देश की सुरक्षा का दायित्व निभाते हैं। हमारे घरों में जलने वाले दीपों के पीछे सैनिकों का त्याग और उनके परिवारों का समर्पण भी है।

सैनिक परिवार में जन्म लेना मेरे लिए गर्व की बात : धामी

मुख्यमंत्री ने अपने सैनिक परिवार से जुड़ी स्मृतियां साझा करते हुए बताया कि उनका जन्म एक सैनिक परिवार में हुआ है। उनके पिता ने सेना में रहते हुए उन्हें देशसेवा, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के संस्कार दिए, जो आज भी उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं।

उन्होंने बताया कि उनके पिता अक्सर गढ़वाल रेजीमेंट के वीर सैनिकों की शौर्यगाथाएं सुनाया करते थे। विशेष रूप से महावीर चक्र से सम्मानित अमर शहीद जसवंत सिंह रावत के अदम्य साहस और बलिदान का उल्लेख करते थे। वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध में नूरानांग मोर्चे पर उनका पराक्रम भारतीय सैन्य इतिहास का गौरवशाली अध्याय है। आज उसी गौरवशाली रेजीमेंट के जवानों के बीच उपस्थित होकर उन्हें अपने पिता की बातें याद आ रही हैं।

गढ़वाल रेजीमेंट का इतिहास साहस और बलिदान की गौरवगाथा

मुख्यमंत्री ने अमर शहीद जसवंत सिंह रावत सहित मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सभी वीर सैनिकों को नमन किया। उन्होंने कहा कि गढ़वाल रेजीमेंट का इतिहास अदम्य साहस, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और बलिदान की गौरवगाथाओं से भरा है। प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध से लेकर आजादी के बाद विभिन्न युद्धों और सैन्य अभियानों तक रेजीमेंट के जवानों ने अपनी वीरता का परिचय दिया है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की वीरभूमि ने हमेशा ऐसे वीर सपूतों को जन्म दिया है, जिनके लिए राष्ट्र प्रथम और कर्तव्य सर्वोपरि रहा है।

सैन्य शक्ति को मजबूत कर रहा भारत : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सैन्य शक्ति और सामरिक क्षमता निरंतर मजबूत हो रही है। सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, सेनाओं के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों, पुलों, सुरंगों और आधुनिक संचार सुविधाओं के विस्तार से सैन्य आवागमन और संचार व्यवस्था भी मजबूत हुई है।

शहीदों के परिजनों को 50 लाख रुपये की अनुग्रह राशि

मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों का सम्मान एवं कल्याण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी क्रम में शहीद सैनिकों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये की गई है।

इसके साथ ही शहीद सैनिकों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी सेवा में नियुक्ति देने की व्यवस्था के तहत अनेक आश्रितों को सरकारी नौकरी प्रदान की गई है। इस व्यवस्था के तहत आवेदन की समय-सीमा भी दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष की गई है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि देहरादून में निर्माणाधीन सैन्यधाम का कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है। यह सैन्यधाम देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के शौर्य, त्याग और बलिदान का प्रतीक बनेगा।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिक केवल देश की सीमाओं के प्रहरी नहीं हैं, बल्कि करोड़ों देशवासियों के सुरक्षित जीवन और खुशियों के रक्षक भी हैं। उन्होंने वीर जवानों के साथ उनके परिवारों को भी नमन करते हुए सभी के सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।

इस अवसर पर गढ़वाल मंडल आयुक्त आनंद स्वरूप, पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल परिक्षेत्र राजीव स्वरूप, उत्तराखंड सब एरिया के डिप्टी जीओसी ब्रिगेडियर आर.एस. थापा, कर्नल प्रतुल थपलियाल, लेफ्टिनेंट कर्नल रवि मोहन बिष्ट, लेफ्टिनेंट कर्नल मोहित जोशी, लेफ्टिनेंट कर्नल एस.एस. सिद्दीकी, मेजर के.डी. सिंह और सूबेदार मेजर रघुवीर सिंह भंडारी सहित सैन्य अधिकारी एवं जवान मौजूद रहे।

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