चमोली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को बिरही (बेडूबगड़) में नीति-माणा जनजाति कल्याण समिति द्वारा आयोजित तीन दिवसीय जनजाति समागम-2026 के समापन समारोह में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनजाति समुदाय के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय निवासी देश की सीमाओं के सजग प्रहरी हैं।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में नीति घाटी भोटिया जनजाति के शीतकालीन प्रवास एवं भूमि संबंधी मामलों के निस्तारण, बेडूबगड़ भोटिया पड़ाव में सामुदायिक भवन निर्माण, स्व. गौरा देवी की प्रतिमा एवं पार्क निर्माण, बैरासकुंड मंदिर के सौंदर्यीकरण तथा बेडूबगड़ पड़ाव की भूमि को सुरक्षित करने के लिए कार्यों की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम हैं। जनजातीय समाज ने सदियों से प्रकृति संरक्षण, लोकज्ञान और सामूहिक जीवन की परंपरा को सहेजकर समाज को मजबूत किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समाज के उत्थान के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें उन्नत ग्राम अभियान और एकलव्य आदर्श विद्यालय प्रमुख हैं। राज्य में जनजातीय छात्रों को प्राथमिक से स्नातकोत्तर स्तर तक छात्रवृत्ति दी जा रही है, 16 राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय संचालित हैं तथा बेटियों के विवाह हेतु 50 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान है।
उन्होंने बताया कि जनजातीय संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिवर्ष जनजातीय एवं खेल महोत्सव आयोजित किए जा रहे हैं। टिम्मरसैंण महादेव, हीरामणि मंदिर और मलारी गांव के सामुदायिक स्थल के विकास के लिए करोड़ों रुपये की धनराशि स्वीकृत की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान के तहत प्रदेश के 128 जनजातीय गांव चिन्हित किए हैं, जहां शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही तकनीकी शिक्षा से जोड़ने के लिए आईटीआई संस्थान और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु निशुल्क कोचिंग की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने कहा कि चमोली जिले में 800 से अधिक होम-स्टे संचालित हैं, जिनसे 4 हजार से अधिक स्थानीय लोगों को स्वरोजगार मिला है। जनजातीय संस्कृति, धार्मिक और साहसिक पर्यटन के माध्यम से आजीविका के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं तथा उत्तराखंड की समृद्ध परंपराओं को वैश्विक पहचान मिल रही है।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, जनजातीय संगठनों के पदाधिकारियों और जिला स्तरीय अधिकारियों सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।


