मुंबई/गोवा। हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार सुबह गोवा के डोना पाउला स्थित उनके आवास पर उन्हें बेहोशी की हालत में पाया गया। गंभीर कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक CPR देकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। अस्पताल में उन्हें सुबह करीब 5:20 बजे मृत घोषित किया गया।
विश्वनाथ गजानन पाटेकर था असली नाम
नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुड-जंजीरा में हुआ था। उनका असली नाम विश्वनाथ गजानन पाटेकर था। उनके पिता का नाम दिनकर पाटेकर और मां का नाम निर्मला पाटेकर था। मराठी परिवार में जन्मे नाना ने मुंबई के बांद्रा स्कूल ऑफ आर्ट से पढ़ाई की थी।
मां की सहेली ने दिया ‘नाना’ नाम
आज पूरी दुनिया उन्हें नाना पाटेकर के नाम से जानती है, लेकिन ‘नाना’ नाम उन्हें जन्म के साथ नहीं मिला था। एक पुराने इंटरव्यू में नाना ने खुद बताया था कि उनकी मां की एक सहेली थीं, जो उनके लिए बहन जैसी थीं। बचपन में वह उन्हें प्यार से ‘नाना-नाना’ कहकर बुलाती थीं। धीरे-धीरे यही नाम परिवार और आसपास के लोगों के बीच लोकप्रिय हो गया।
नाना ने बताया था कि उन्हें यह नाम बेहद पसंद था और उनके पासपोर्ट, आधार कार्ड और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में भी नाना पाटेकर नाम ही दर्ज था।
स्कूल में ‘विशू’ नाम से पुकारे जाते थे
स्कूल के दिनों में नाना को विश्वनाथ या ‘विशू’ कहकर बुलाया जाता था। उन्होंने बताया था कि अगर आज कोई उन्हें ‘विशू’ कहकर पुकारता है तो वह समझ जाते हैं कि सामने वाला उनके स्कूल के दिनों का कोई पुराना परिचित है।
समय के साथ ‘नाना’ नाम उनकी पहचान बन गया और विश्वनाथ पीछे छूट गया।
दमदार अभिनय से बनाई अलग पहचान
नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा के साथ-साथ रंगमंच पर भी अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी दमदार आवाज, तीखे संवाद और सहज लेकिन प्रभावशाली अभिनय ने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे विशिष्ट अभिनेताओं में शामिल किया। ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अब तक छप्पन’, ‘वेलकम’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा। उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले और भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से भी सम्मानित किया।
एक साधारण नाम से बनी करोड़ों दिलों की पहचान
‘विश्वनाथ’ से ‘नाना’ बनने की उनकी कहानी जितनी सरल है, उतनी ही भावुक भी। मां की सहेली द्वारा प्यार से दिया गया एक घरेलू नाम आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गया। पर्दे पर अपने दमदार किरदारों से लोगों के दिलों में जगह बनाने वाले नाना पाटेकर का निधन भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति है।



