Tuesday, March 3, 2026
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सरकारी विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा — 880 स्मार्ट टीवी से सजेगी स्मार्ट क्लास

देहरादून, 21 फरवरी 2026// सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार जिला प्रशासन देहरादून द्वारा सरकारी विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में कदम तेज कर दिए गए हैं। जनपद के स्कूलों में स्मार्ट क्लास सुविधा विकसित करने हेतु कुल 880 स्मार्ट टीवी का स्टॉक तैयार कर लिया गया है, जिससे अब सरकारी विद्यालय भी निजी स्कूलों की भांति आधुनिक डिजिटल शिक्षण व्यवस्था से जुड़ सकेंगे।

जिला प्रशासन द्वारा पिछले डेढ़ वर्ष से “उत्कर्ष” परियोजना के तहत सरकारी विद्यालयों को सुविधासंपन्न बनाया जा रहा है। इस परियोजना के अंतर्गत स्कूलों में फर्नीचर, खेल अवस्थापना, शौचालय, विद्युत, पेयजल, मंकीनेट तथा लाइब्रेरी जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जा चुकी हैं।

जिलाधिकारी सविन बसंल के निर्देशानुसार खरीदे गए स्मार्ट टीवी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्री-डिस्पैच इंस्पेक्शन (PDI) कराया जाएगा। इसके तहत जिला सूचना विज्ञान अधिकारी और मुख्य शिक्षा अधिकारी कंपनी के विनिर्माण स्थल पांडिचेरी जाकर उपकरणों का भौतिक निरीक्षण करेंगे।

निरीक्षण के दौरान स्मार्ट टीवी की गुणवत्ता, तकनीकी मानक, सुरक्षा प्रावधान तथा निर्धारित विनिर्देशों के अनुरूपता की विस्तृत जांच की जाएगी। संतोषजनक पाए जाने के बाद ही सामग्री को जनपद में भेजने की अनुमति दी जाएगी।

जिला प्रशासन का उद्देश्य है कि विद्यालयों को उच्च गुणवत्ता वाले उपकरण प्राप्त हों और सार्वजनिक धन का उपयोग पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ हो। इस पहल से शिक्षण प्रक्रिया अधिक रोचक, प्रभावी एवं सहभागितापूर्ण बनेगी, शिक्षकों को ऑडियो-विजुअल माध्यम से पढ़ाने में सुविधा मिलेगी तथा ग्रामीण व दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालय भी तकनीकी रूप से सशक्त बनेंगे।

इस महत्वाकांक्षी स्मार्ट क्लास परियोजना से जिले के हजारों विद्यार्थियों को आधुनिक डिजिटल शिक्षण संसाधनों का लाभ मिलेगा और भविष्य की डिजिटल शिक्षा प्रणाली के लिए मजबूत आधार तैयार होगा।

फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने में उत्तराखण्ड आगे, 25 फिल्मों को ₹8.28 करोड़ अनुदान जारी

देहरादून, 20 फरवरी 2026। उत्तराखण्ड राज्य सरकार फिल्म उद्योग के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्राकृतिक सौंदर्य, सुरक्षित वातावरण, सरल प्रक्रियाएँ और फिल्म-फ्रेंडली नीति के कारण राज्य देश-विदेश के फिल्म निर्माताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनकर उभर रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड में फिल्म नीति-2024 को प्रभावी रूप से लागू किया गया है, जिसके अंतर्गत सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से फिल्म निर्माताओं को त्वरित अनुमति प्रदान की जा रही है। शूटिंग अनुमति प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है, जिससे निर्माताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि फिल्म नीति से पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार फीचर फिल्म, वेब सीरीज, डॉक्यूमेंट्री और शॉर्ट फिल्म निर्माण को भी सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रही है।

उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बंशीधर तिवारी ने बताया कि परिषद द्वारा वर्ष में दो बार अनुदान समिति की बैठक आयोजित की जाती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 25 फिल्मों को ₹8.28 करोड़ की अनुदान राशि जारी की गई। जुलाई 2025 में 12 फिल्मों तथा जनवरी 2026 में 13 फिल्मों को अनुदान स्वीकृत हुआ।

क्षेत्रीय सिनेमा को मिला बड़ा प्रोत्साहन:

फिल्म नीति-2024 के तहत इस वित्तीय वर्ष में 14 गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी फिल्मों को अनुदान जारी किया गया। इनमें “जोना”, “मीठी माँ कु आशीर्वाद”, “मेरे गांव की बाट”, “घपरोल”, “द्वी होला जब साथ”, “गढ़-कुमौं”, “संस्कार”, “मेरु गौ”, “धरती म्यर कुमाऊँ” सहित कई फिल्में शामिल हैं।

हिन्दी एवं अंग्रेजी फिल्मों को भी सहायता:

राज्य की फिल्म-फ्रेंडली नीति से आकर्षित होकर देश-विदेश के निर्माता उत्तराखण्ड में शूटिंग कर रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 11 हिन्दी/अंग्रेजी फिल्मों को भी अनुदान दिया गया है, जिनमें “विकी विद्या का वह वाला वीडियो”, “लाइफ हिल गई”, “Tanvi The Great”, “केसरी चैप्टर-2”, “Middle Class Love” सहित अन्य फिल्में शामिल हैं।

परिषद के अनुसार राज्य में फिल्म शूटिंग बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो रही है। सरकार का लक्ष्य उत्तराखण्ड को देश का प्रमुख फिल्म डेस्टिनेशन बनाना है, जिससे सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ आर्थिक विकास को भी गति मिल सके।

परिवहन सुधारों में उत्तराखण्ड को बड़ी उपलब्धि, केन्द्र से ₹125 करोड़ की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत

देहरादून। उत्तराखण्ड में परिवहन क्षेत्र में किए जा रहे व्यापक सुधारों को केन्द्र सरकार ने सराहते हुए पूंजीगत निवेश योजना (SASCI) 2025-26 के अंतर्गत राज्य को ₹105.11 करोड़ की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की है। साथ ही अप्रैल से पूर्व लागू किए गए सुधारों के लिए ₹20 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि भी मंजूर की गई है। इस प्रकार कुल ₹125 करोड़ की प्रोत्साहन राशि परिवहन विभाग उत्तराखण्ड को प्राप्त हुई है।

यह उपलब्धि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में परिवहन क्षेत्र में लागू की जा रही तकनीक आधारित सुधारात्मक नीतियों का परिणाम मानी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में तकनीक आधारित परिवहन सुधारों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे सड़क सुरक्षा मजबूत होने के साथ-साथ पारदर्शिता भी सुनिश्चित हो रही है। इलेक्ट्रॉनिक इंफोर्समेंट एवं वाहन स्क्रैपिंग नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से दुर्घटनाओं में कमी लाने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

रोड सेफ्टी के तहत इलेक्ट्रॉनिक इंफोर्समेंट:

सड़क सुरक्षा के दृष्टिगत राज्य में हाई-रिस्क एवं क्रिटिकल जंक्शनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंफोर्समेंट सिस्टम लागू किए गए हैं। दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में ANPR कैमरे लगाए गए हैं, जिन्हें ट्रैफिक कंट्रोल रूम और ई-चालान प्रणाली से जोड़ा गया है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक 20 स्थानों पर ANPR कैमरे स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि राज्य में कुल 37 लोकेशनों पर कैमरे लगाए गए हैं। इनके माध्यम से ट्रिपल राइडिंग, ओवरस्पीडिंग और बिना हेलमेट जैसे मामलों में प्रतिदिन 5 हजार से अधिक चालान किए जा रहे हैं।

विशेष रूप से उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बन गया है जहां ANPR कैमरों के माध्यम से ग्रीन सेस की वसूली की जा रही है। इस प्रणाली में वाहनों को रोके बिना ही फास्टैग वॉलेट से ग्रीन सेस स्वतः कटकर खाते में जमा हो जाता है।

वाहन स्क्रैपिंग नीति का प्रभावी क्रियान्वयन:

वाहन स्क्रैपिंग नीति के अंतर्गत पुराने वाहनों को पंजीकृत स्क्रैपिंग केंद्रों में निस्तारित करने पर नए वाहन खरीदने पर रोड टैक्स में 50 प्रतिशत तक छूट दी जा रही है।

राज्य में अब तक 564 सरकारी और 5861 निजी वाहनों को स्क्रैप किया जा चुका है। इसके लिए 6425 वाहनों के विरुद्ध ₹9.58 करोड़ की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई है।

ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन को बढ़ावा:

राज्य में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों की स्थापना को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। दो ATS को प्रीलिमिनरी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी होने पर ₹2.5 करोड़ की प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है।

इन सुधारात्मक योजनाओं का क्रियान्वयन परिवहन सचिव बृजेश कुमार संत के निर्देशन में किया गया है, जिससे उत्तराखण्ड परिवहन क्षेत्र में नवाचार आधारित सुधार लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।

मसूरी में 40 अतिरिक्त गोल्फकार्ट संचालन की तैयारी पूरी, इसी माह जिला प्रशासन-आरईसी फाउंडेशन के बीच होगा एमओयू

जिला प्रशासन के सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप पर्यटन नगरी मसूरी को शीघ्र ही 40 अतिरिक्त गोल्फकार्ट की सुविधा प्राप्त होने जा रही है। इस महत्वपूर्ण पहल के लिए सभी तैयारियाँ पूर्ण कर ली गई हैं। गोल्फकार्ट REC Foundation के सहयोग से उपलब्ध कराए जाएंगे।

जिलाधिकारी सविन बंसल के आग्रह पर आरईसी के प्रबंध निदेशक एवं अपर सचिव, भारत सरकार इसी माह देहरादून आगमन कर जिला प्रशासन के साथ औपचारिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करेंगे। एमओयू हस्ताक्षर कार्यक्रम मा० विधायक मसूरी एवं रिक्शा यूनियन के पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न होगा।

जिलाधिकारी ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य मसूरी में बढ़ते यातायात दबाव को कम करना, पर्यटकों एवं स्थानीय नागरिकों को सुगम, सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल परिवहन उपलब्ध कराना तथा पारंपरिक रिक्शा चालकों की आय में वृद्धि करना है। अतिरिक्त गोल्फकार्ट संचालित होने से माल रोड और कैमलबैक रोड पर जाम की समस्या में उल्लेखनीय कमी आएगी तथा प्रदूषण-मुक्त परिवहन को बढ़ावा मिलेगा।

इस सुविधा से वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और पर्यटकों को आरामदायक आवागमन उपलब्ध होगा, जबकि स्थानीय रिक्शा चालकों की आर्थिकी में सुधार होगा। जिला प्रशासन का मानना है कि यह पहल मसूरी को स्वच्छ, सुगम और आधुनिक पर्यटन नगर के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।

जिला प्रशासन द्वारा गोल्फकार्ट के लिए आरईसी फाउंडेशन से सीएसआर फंड के अंतर्गत 3.36 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत कराई गई है। उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2024 में मसूरी में गोल्फकार्ट सेवा का शुभारम्भ किया गया था। प्रथम चरण में 4 गोल्फकार्ट से शुरू हुई यह सेवा वर्तमान में 14 तक पहुँच चुकी है। अब 40 नए गोल्फकार्ट आने के बाद कुल संख्या 54 हो जाएगी।

जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को मार्ग निर्धारण, पार्किंग, चार्जिंग व्यवस्था, सुरक्षा मानक और संचालन प्रणाली समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं तथा स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और पर्यटक हितधारकों से सहयोग की अपेक्षा की है।

जिला प्रशासन के अनुसार, यह पहल मसूरी में यातायात प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और सतत पर्यटन विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगी।

परिवहन सुधारों में उत्तराखण्ड को बड़ी उपलब्धि, केन्द्र से ₹125 करोड़ की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत

देहरादून। उत्तराखण्ड में परिवहन क्षेत्र में किए जा रहे व्यापक सुधारों को केन्द्र सरकार ने सराहते हुए पूंजीगत निवेश योजना (SASCI) 2025-26 के अंतर्गत राज्य को ₹105.11 करोड़ की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की है। साथ ही अप्रैल से पूर्व लागू किए गए सुधारों के लिए ₹20 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि भी मंजूर की गई है। इस प्रकार कुल ₹125 करोड़ की प्रोत्साहन राशि परिवहन विभाग उत्तराखण्ड को प्राप्त हुई है।

यह उपलब्धि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में परिवहन क्षेत्र में लागू की जा रही तकनीक आधारित सुधारात्मक नीतियों का परिणाम मानी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में तकनीक आधारित परिवहन सुधारों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे सड़क सुरक्षा मजबूत होने के साथ-साथ पारदर्शिता भी सुनिश्चित हो रही है। इलेक्ट्रॉनिक इंफोर्समेंट एवं वाहन स्क्रैपिंग नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से दुर्घटनाओं में कमी लाने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

रोड सेफ्टी के तहत इलेक्ट्रॉनिक इंफोर्समेंट:

सड़क सुरक्षा के दृष्टिगत राज्य में हाई-रिस्क एवं क्रिटिकल जंक्शनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंफोर्समेंट सिस्टम लागू किए गए हैं। दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में ANPR कैमरे लगाए गए हैं, जिन्हें ट्रैफिक कंट्रोल रूम और ई-चालान प्रणाली से जोड़ा गया है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक 20 स्थानों पर ANPR कैमरे स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि राज्य में कुल 37 लोकेशनों पर कैमरे लगाए गए हैं। इनके माध्यम से ट्रिपल राइडिंग, ओवरस्पीडिंग और बिना हेलमेट जैसे मामलों में प्रतिदिन 5 हजार से अधिक चालान किए जा रहे हैं।

विशेष रूप से उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बन गया है जहां ANPR कैमरों के माध्यम से ग्रीन सेस की वसूली की जा रही है। इस प्रणाली में वाहनों को रोके बिना ही फास्टैग वॉलेट से ग्रीन सेस स्वतः कटकर खाते में जमा हो जाता है।

वाहन स्क्रैपिंग नीति का प्रभावी क्रियान्वयन:

वाहन स्क्रैपिंग नीति के अंतर्गत पुराने वाहनों को पंजीकृत स्क्रैपिंग केंद्रों में निस्तारित करने पर नए वाहन खरीदने पर रोड टैक्स में 50 प्रतिशत तक छूट दी जा रही है।

राज्य में अब तक 564 सरकारी और 5861 निजी वाहनों को स्क्रैप किया जा चुका है। इसके लिए 6425 वाहनों के विरुद्ध ₹9.58 करोड़ की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई है।

ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन को बढ़ावा:

राज्य में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों की स्थापना को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। दो ATS को प्रीलिमिनरी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी होने पर ₹2.5 करोड़ की प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है।

इन सुधारात्मक योजनाओं का क्रियान्वयन परिवहन सचिव बृजेश कुमार संत के निर्देशन में किया गया है, जिससे उत्तराखण्ड परिवहन क्षेत्र में नवाचार आधारित सुधार लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।

रुद्रप्रयाग के बीरों देवल में मां चंडिका महावन्याथ देवरा यात्रा में शामिल हुए सीएम धामी, मंदिर पुनर्निर्माण व तहसील भवन की घोषणा

रुद्रप्रयाग। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार को जनपद रुद्रप्रयाग के विकासखंड अगस्त्यमुनि के ग्राम बीरों देवल में आयोजित मां चंडिका महावन्याथ देवरा यात्रा में शामिल हुए। उन्होंने मां चंडिका मंदिर पहुंचकर महायज्ञ में भाग लिया तथा वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मां चंडिका मंदिर प्रांगण एवं मंदिर समूह का पुरातत्व विभाग के माध्यम से पुनर्निर्माण कराने तथा तहसील बसुकेदार में नवीन तहसील भवन निर्माण की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने आयोजन स्थल को धार्मिक एवं आध्यात्मिक संगम का प्रतीक बताते हुए कहा कि 20 वर्षों बाद आयोजित यह महायज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि किसी भी देवस्थान पर जाना ईश्वरीय आह्वान और आशीर्वाद का संकेत होता है।

उन्होंने जनसहभागिता को उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में समरसता और एकता को सुदृढ़ करते हैं तथा नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और मूल जड़ों से जोड़ते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है तथा सनातन संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने की दिशा में कार्य हो रहा है और वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति को विशेष सम्मान मिल रहा है।

सीएम ने वर्ष 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ मंदिर में हुए व्यापक पुनर्निर्माण कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज “दिव्य और भव्य केदार” का स्वरूप सभी के सामने है। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार धार्मिक आयोजनों की सफलता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को समृद्ध बनाने, युवाओं के भविष्य को सुदृढ़ करने तथा देवभूमि के मूल स्वरूप की रक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रही है। धर्मांतरण विरोधी कानून सहित कई सख्त कानूनी प्रावधान लागू किए गए हैं तथा राज्यभर में 12 हजार से अधिक भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई गई है।

इस अवसर पर विधायक केदारनाथ आशा नौटियाल ने क्षेत्रीय मांगों से संबंधित ज्ञापन मुख्यमंत्री को सौंपा, जिस पर उन्होंने परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

20 वर्षों बाद आयोजित हो रही दिवारा यात्रा:

मां चंडिका की दिवारा यात्रा 21 नवंबर 2025 से प्रारंभ होकर लगभग 26 गांवों के भ्रमण पर रही। 20 वर्षों के अंतराल के बाद आयोजित इस यात्रा के अंतर्गत विभिन्न गांवों में धार्मिक अनुष्ठान हुए।

बीरोन देवल में 15 फरवरी से 9 दिवसीय महायज्ञ आयोजित किया जा रहा है। 22 फरवरी 2026 को विशाल जलयात्रा निकाली जाएगी तथा 24 फरवरी 2026 को पूर्णाहुति के साथ महावन्याथ यात्रा का समापन होगा और मां चंडिका अपने दिव्य स्थल पर विराजमान होंगी।

‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान से आमजन को मिली राहत, चिन्यालीसौड़-गौचर हवाई पट्टी सेना से संचालित होंगी : मुख्यमंत्री

विकासखंड परिसर चिन्यालीसौड़ में आयोजित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम में गुरुवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभागीय स्टालों का निरीक्षण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनते हुए अधिकारियों की मौजूदगी में अधिकांश मामलों का मौके पर ही निस्तारण कराया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान से आमजन को बड़ी राहत मिली है और प्रशासनिक व्यवस्था अधिक सुगम तथा पारदर्शी बनी है। उन्होंने बताया कि अब तक प्रदेशभर में 600 से अधिक शिविर आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें पांच लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए तथा 40 हजार से अधिक लोगों को विभिन्न योजनाओं का सीधा लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए जिला मुख्यालय तक न जाना पड़े, इसलिए गांव-गांव में शिविर लगाकर मौके पर समाधान किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में हेली सेवाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि चिन्यालीसौड़ और गौचर हवाई पट्टियों से हेली सेवा शुरू की जाएगी और दोनों का संचालन सेना के माध्यम से करने की योजना है। उन्होंने बताया कि अप्रैल से चारधाम यात्रा प्रारंभ होनी है, जिसकी तैयारियां पहले से शुरू कर दी गई हैं ताकि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा को सफल बनाने में स्थानीय हितधारकों—तीर्थ पुरोहित, होटल व्यवसायी, टैक्सी संचालक और स्थानीय नागरिकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया में सनातन संस्कृति का उद्घोष हो रहा है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसमें उत्तराखंड भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।

महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि अब तक दो लाख से अधिक “लखपति दीदियों” को सशक्त किया जा चुका है। स्थानीय मांगों पर उन्होंने सीएचसी चिन्यालीसौड़ और महाविद्यालय के उच्चीकरण को मुख्यमंत्री घोषणाओं में शामिल करने का आश्वासन दिया।

मुख्य सचिव आनन्द वर्द्धन ने कहा कि अभियान के तहत अब तक पांच लाख से अधिक नागरिकों ने भाग लिया है और 40 हजार से ज्यादा प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि छोटी समस्याओं के समाधान के लिए संयुक्त टीमें गठित कर मौके पर निस्तारण किया जा रहा है, जबकि शेष मामलों का ऑनलाइन फॉलो-अप किया जाएगा।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति रही।

उत्तराखंड ने सौर ऊर्जा स्थापना में 1 गीगावाट का ऐतिहासिक आंकड़ा पार किया

उत्तराखंड ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए राज्य में स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता को 1 गीगावाट (1000 मेगावाट) से अधिक के स्तर पर पहुँचा दिया है। नवीनतम आँकड़ों के अनुसार राज्य की कुल स्थापित सौर क्षमता लगभग 1027.87 मेगावाट से अधिक हो चुकी है, जो स्वच्छ और हरित ऊर्जा के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि पर कहा कि सौर ऊर्जा क्षमता का 1 गीगावाट का आंकड़ा पार करना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और नवीकरणीय ऊर्जा के प्रति उनकी स्पष्ट नीति का परिणाम है। उन्होंने कहा कि “आत्मनिर्भर भारत” और हरित ऊर्जा के विजन से प्रेरित होकर उत्तराखंड में सौर ऊर्जा को जनआंदोलन का रूप दिया गया है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के समन्वय से हजारों युवाओं और स्थानीय उद्यमियों को स्वरोजगार के नए अवसर मिले हैं।

यह उपलब्धि विभिन्न योजनाओं और पहलों के माध्यम से संभव हुई है, जिनमें ग्रिड कनेक्टेड रूफटॉप सोलर परियोजनाएं, ग्राउंड माउंटेड सोलर प्लांट, सरकारी भवनों पर सौर संयंत्र, कृषि क्षेत्र के लिए सोलर पंप, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सोलर योजनाएं तथा कॉमर्शियल और औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं।

राज्य की कुल स्थापित सौर क्षमता में प्रमुख रूप से ग्राउंड माउंटेड 397 मेगावाट, रूफटॉप सोलर (पीएम सूर्यघर) 241 मेगावाट, मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना 137 मेगावाट, कॉमर्शियल नेट मीटरिंग 110 मेगावाट, कैप्टिव सोलर पावर प्लांट 51 मेगावाट, कनाल टॉप व बैंक 37 मेगावाट और सरकारी भवनों पर 26 मेगावाट शामिल हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के अंतर्गत 100 मेगावाट से अधिक क्षमता के संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं।

इस उपलब्धि में Uttarakhand Renewable Energy Development Agency (UREDA) का विशेष योगदान रहा है। एजेंसी ने सौर परियोजनाओं के क्रियान्वयन, जन-जागरूकता, तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं के प्रभावी संचालन में अग्रणी भूमिका निभाई है। दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों तक सौर ऊर्जा समाधान पहुँचाने के प्रयासों से यह सफलता संभव हुई है।

राज्य में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल नीतिगत वातावरण, सब्सिडी प्रावधान, सरल अनुमोदन प्रक्रिया और निजी निवेश को प्रोत्साहन जैसी पहलों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। सरकार ने भविष्य में सौर ऊर्जा क्षमता को और बढ़ाने, दूरस्थ क्षेत्रों में सौर समाधान को प्रोत्साहित करने और आम नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।

यह उपलब्धि सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

देर रात दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे मुख्यमंत्री, व्यवस्थाओं का लिया जायजा

देहरादून।। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार देर रात राजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय, देहरादून पहुंचकर अस्पताल की व्यवस्थाओं का औचक निरीक्षण किया। देर रात हुए इस निरीक्षण से अस्पताल प्रशासन में काफी सक्रियता देखने को मिली।

मुख्यमंत्री ने आपातकालीन कक्ष, विभिन्न वार्डों, दवा वितरण केंद्र, स्वच्छता व्यवस्था तथा मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों से सीधे संवाद कर उपचार, दवाओं की उपलब्धता, जांच सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में फीडबैक प्राप्त किया।

मरीजों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रत्येक नागरिक को समय पर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अस्पताल में स्वच्छता, दवाओं की उपलब्धता, चिकित्सकीय स्टाफ की उपस्थिति और जांच सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने अस्पताल प्रशासन को निर्देशित किया कि गंभीर मरीजों के उपचार में विशेष सतर्कता बरती जाए तथा तीमारदारों को समय पर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाएं निजी अस्पतालों के समकक्ष बेहतर और भरोसेमंद बनाना सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार लगातार संसाधनों का विस्तार कर रही है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

इस अवसर पर दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय के चिकित्सक और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” बना जनसेवा का प्रभावी मॉडल : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम प्रदेश में सुशासन और सेवा वितरण का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। इस अभिनव पहल के तहत सरकार स्वयं जनता के द्वार पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान कर रही है तथा योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित किया जा रहा है।

17 फरवरी 2026 तक प्रदेश के सभी 13 जनपदों में कुल 648 कैंप आयोजित किए जा चुके हैं, जबकि आज विभिन्न जिलों में 10 कैंप लगाए गए। अब तक इन कैंपों में 5,12,767 नागरिकों ने भाग लेकर अपनी समस्याएं दर्ज कराई हैं और आज आयोजित शिविरों में 15,660 नागरिकों ने सहभागिता की। यह आंकड़े कार्यक्रम को मिल रहे व्यापक जनसमर्थन को दर्शाते हैं।

कार्यक्रम के अंतर्गत प्राप्त शिकायतों का त्वरित निस्तारण किया जा रहा है। अब तक 32,841 शिकायतों का समाधान किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र जारी करने के लिए 70,243 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिन पर नियमानुसार कार्रवाई जारी है। अन्य योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित व्यक्तियों की संख्या 2,85,738 तक पहुंच चुकी है।

जनपदवार प्रगति के अनुसार अल्मोड़ा, बागेश्वर, चम्पावत, पिथौरागढ़, नैनीताल, ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी सहित सभी जिलों में व्यापक स्तर पर कैंप आयोजित किए गए हैं। विशेष रूप से हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, देहरादून और पौड़ी में बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लेकर अपनी समस्याओं का समाधान कराया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं बल्कि उन्हें धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करना है। यह कार्यक्रम प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को समाप्त कर सुशासन के नए मानक स्थापित कर रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक शिकायत का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जाए तथा कोई भी पात्र व्यक्ति योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल उत्तराखंड में सेवा, पारदर्शिता और जवाबदेही आधारित प्रशासन की नई संस्कृति को मजबूत कर रही है और सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।